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'लाल बत्ती' की हसरत और धोखाधड़ी के 5 इल्जाम... पूजा खेडकर के IAS के ओहदे पर अब यूं लटकी तलवार

विवादित आईएएस पूजा खेडकर को डीओपीटी ने कारण बताओ नोटिस थमा कर उन पर लगे इल्ज़ामों के बारे में पूछा है. इसका जवाब उनको 2 अगस्त तक देना है. इसके इस जवाब पर डिपेंड करता है कि वो आगे एक आईएएस के तौर पर काम कर सकेंगी या फिर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी.

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विवादित आईएएस पूजा खेडकर को डीओपीटी ने कारण बताओ नोटिस थमा दिया है.
विवादित आईएएस पूजा खेडकर को डीओपीटी ने कारण बताओ नोटिस थमा दिया है.

आईएएस बनते ही अब तक यदि किसी का नाम सबसे तेजी से विवादों में घिरा है, तो वो है महाराष्ट्र कैडर की आईएएस ऑफिसर पूजा खेडकर. फिर चाहे उम्र को लेकर की गई धांधली का आरोप हो, जाति को लेकर की गई घोटालेबाजी का इल्ज़ाम हो या फिर दिव्यांगता के झूठे सर्टिफिकेट का मामला, पूजा हर तरफ से घिरी हुई हैं. अब इसी घेरेबंदी के बीच डीओपीटी यानी डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग ने उनको कारण बताओ नोटिस थमा कर उन पर लगे इल्ज़ामों के बारे में पूछा है. इसका जवाब उनको 2 अगस्त तक देना है.

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पूजा खेडकर के इस जवाब पर ही डिपेंड करता है कि वो आगे एक आईएएस के तौर पर काम कर सकेंगी या फिर उनकी सेवाएं हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त कर दी जाएंगी. डीओपीटी यानी डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग सीधे प्रधानमंत्री के अधीन आता है. इसी डीओपीटी की ओर से 26 जुलाई को जारी किए गए इस नोटिस में उन्हें या तो व्यक्तिगत तौर पर पेश हो कर अपनी बात रखने को कहा गया है. इस में पूजा के पासे एक विकल्प ये भी है कि वो चाहें तो वो डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग को लिखित जवाब दे सकती हैं. 

डीओपीटी ने इसी नोटिस के साथ ये साफ कर दिया है कि यदि पूजा इसका जवाब नहीं देती है तो डीओपीटी आगे की कार्रवाई करेगा और महकमे के अंदरुनी सूत्रों की मानें तो ये कार्रवाई पूजा से एक आईएएस का ओहदा छीनने के साथ-साथ उन्हें टर्मिनेट करने तक कुछ भी हो सकता है. यूपीएससी की एक सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के हवाले से दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच पहले ही पूजा खेडकर के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज कर चुकी है. इसमें जालसाज़ी, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत इल्जाम शामिल हैं.

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आइए जान लेते हैं कि आखिर पूजा खेडकर पर वो कौन-कौन से संगीन इल्जाम हैं, जिन्होंने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया है...

इल्जाम नंबर- 1: उम्र के नाम पर धांधली

अपने सीनियर के कमरे पर कब्ज़ा, प्राइवेट गाड़ी पर लाल-नीली बत्ती लगा कर रौब-दाब दिखाना पूजा खेडकर को इतना भारी पड़ा कि उनके खिलाफ यूपीएससी ने जांच की शुरुआत कर दी. इसके लिए बाकायदा एक, एक सदस्यीय कमेटी बना दी गई. इस कमेटी ने पूजा के आईएएस बनने को लेकर जिस सबसे बड़े घोटाले से पर्दा उठाया, वो उम्र को लेकर की गई जालसाज़ी ही है. यूपीएससी की रिपोर्ट की मानें तो पूजा ने यूपीएससी इम्तेहान में चयन के लिए यूपीएससी के नियमों के तहत मान्य अधिकतम सीमा से भी अधिक बार परीक्षा दी. उसका लाभ उठाया है. 

इस जांच से यह पता चला है कि उसने अपना नाम, अपने पिता और माता का नाम, अपनी तस्वीर/हस्ताक्षर, अपनी ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और पता बदलकर अपनी फर्जी पहचान बनाकर परीक्षा नियमों के तहत स्वीकार्य सीमा से अधिक प्रयास का धोखाधड़ी से लाभ उठाया. दरअसल यूपीएससी के एग्जाम में बैठने के लिए अलग-अलग कैटेगरी के तहत उम्मीदवारों को अलग-अलग मौके मिलते हैं. मसलन जनरल कैटेगरी का कोई भी उम्मीदवार 32 साल की उम्र से पहले तक कुल छह बार यूपीएससी का एग्जाम दे सकता है.

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ओबीसी कैटेगरी के तहत 35 साल की उम्र तक कुल 9 बार इम्तेहान देने की छूट है. जबकि एससी एसटी कोटा के तहत 37 साल की उम्र तक यूपीएससी के इम्तेहान में बैठा जा सकता है. यूपीएससी के इस बयान से साफ है कि पूजा खेडकर ने एग्जाम क्लीयर करने के लिए तय सीमा से ज्यादा बार इम्तेहान दिया. इसके लिए हर बार उसने नए नाम और नए पहचान का सहारा लिया.

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इल्जाम नंबर- 2: मां-बाप का नाम तक बदल देना

अब जब उम्र से जुड़ी धांधली करनी थी, तो जाति भी बदलनी थी और जाति बदलने के लिए पूजा खेडकर अपने मां-बाप का नाम तक बदल डाला. यूपीएससी ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि पूजा खेडकर ने अपना नाम, अपने पिता और माता का नाम, अपनी फोटो, सिग्नेचर, अपनी ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर और पता तक बदल डाला और तय सीमा से ज्यादा बार यूपीएससी की परीक्षा दी. 

इल्जाम नंबर- 3: मलाईदार लाइफ, नॉन क्रीमी लेयर का फायदा

पूजा खेडकर ने ओबीसी नॉन क्रीमी लेयर के कोटे से यूपीएससी का इम्तेहान पास किया, जबकि खुद उनके नाम पर 17 से 20 करोड़ के आस-पास की प्रॉपर्टी है. इससे लाखों रुपए किराया भी आता है. अब यूपीएससी के इम्तेहान में बैठने वाले नॉन क्रीमी लेयर के छात्रों का पैमाना ये है कि उनकी आमदनी सालाना 8 लाख से कम होनी चाहिए. असल में अभी हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में पूजा के पिता दिलीप खेडकर भी चुनाव में कूद पड़े थे, जनाब चुनाव तो हार गए, लेकिन चुनाव आयोग को सौंपा गया संपत्ति का उनका ब्यौरा अब खुद उनके साथ-साथ उनकी आईएएस बेटी के गले पड़ गया है. चूंकि संपत्ति के ब्यौरे में अपने अलावा उन्होंने पत्नी और बेटी की भी जानकारी दी थी, तो पता चला पूरा परिवार आधा अरबपति है. यानी पूजा नॉन क्रीमी लेयर से नहीं आती. 

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इल्जाम नंबर- 4: घुटने में दिव्यांगता का रिपोर्ट भी झूठी?

पूजा खेडकर पर एक इल्ज़ाम गलत तरीके से खुद को दिव्यांग बता कर आईएएस के इम्तेहान में फायदा लेने का भी है. असल में पुणे के यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल अस्पताल ने पूजा को सात प्रतिशत दिव्यांग घोषित किया था. उनके बांये घुटने में लोकोमोटर दिव्यांगता की बात कही गई थी. लेकिन इसी अस्पताल के फिजियोथेरेपरी डिपार्टमेंट की रिपोर्ट कहती है कि पूजा खेडकर को कोई दिव्यांगता है ही नहीं. यानी अब पूजा की दिव्यांगता सर्टिफिकेट को लेकर खुद अस्पताल प्रशासन भी सवालों के घेरे में है. 

इल्जाम नंबर- 5: नजर का धोखा या नजर की धांधली?

अब तक के ये घोटाले और इल्ज़ाम भी मानों कम थे कि यूपीएससी की जांच में ये साफ हो गया कि पूजा ने गलत तरीके से यूपीएससी का इम्तेहान पास करने के लिए खुद को मानसिक दिक्कत होने और अपनी नज़रें कमज़ोर होने की भी बात कही थी. पूजा ने इसके लिए बाकायदा यूपीएससी में सर्टिफिकेट दिया था. इस मेडिकल सर्टिफिकेट के मुताबिक उन्हें मानसिक दिक्कत है और नजरें कमजोर. रौशनी जा रही है. मानसिक दिक्कत के बारे में उन्होंने बताया कि उन्हें चीज़ें याद नहीं रहती. यूपीएससी मे ऐसे छात्रों के लिए बाकायदा दिव्यांग कोटा होता है. 

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पूजा खेडकर की मां भी कम दबंग नहीं हैं, हाथ में हथियार लहराते किसानों को धमका रही थी...

यहां तो पूजा के पास कई हथियार थे. ओबीसी नॉन क्रीमी लेयर का हथियार था और दिव्यांगता का वार भी था. इन दोनों हथियारों के बलबूते पर उन्होंने यूपीएससी का इम्तेहान क्लीयर किया और 2022 में ऑल इंडिया रैंक 821 के साथ आईएएस बन गई. हालांकि रिटन और इंटरव्यू को मिलाकर पूजा के जो कुल नंबर आए थे, यदि वही नंबर किसी जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट को आता, तो सवाल ही नहीं था कि वो ये इम्तेहान पास कर पाती.

नियम के मुताबिक पोस्टिंग से पहले यूपीएससी ने दिव्यांगता के सारे सबूत पूजा से मांगे. इसके लिए यूपीएससी ने बाकायदा एम्स में पूजा की जांच कराने का फैसला किया. यूपीएससी सिर्फ सरकारी अस्पतालों की रिपोर्ट को ही मानता है. यूपीएससी इस रिपोर्ट के जरिए इस बात की तस्दीक करना चाहता था कि पूजा को सचमुच मानसिक बीमारी है और उनकी नजरें कमजोर हैं. पूजा के मेडिकल टेस्ट के लिए यूपीएससी ने कुल छह बार एम्स में डॉक्टरों से अप्वाइंटमेंट लिया. पर आपको जानकर हैरानी होगी कि पूजा हर बार बहाना बना कर टेस्ट से बचती रही. यूपीएससी की जांच में ये बात भी पूजा के खिलाफ गई. 

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