चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. पूर्वी लद्दाख में पांच महीने से जारी तनातनी के बीच चीन जहां लगातार बॉर्डर पर अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ा रहा है, वहीं किसी भी हालात से निपटने के लिए भारतीय फ़ौज भी तैयार खड़ी है. भारत ने अपने उत्तरी सीमा पर फ़ौजियों के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर का ऐसा मजबूत जाल बिछाया है कि इस बार चीन की हर चाल उल्टी पड़ने वाली है.
उधर, हालात को देखते हुए अमेरिका ने भी अपना रुख साफ कर दिया है. अमेरिका ने कहा कि लगता है चीन बातचीत से अपना रवैया नहीं बदलने में वाला है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चीन से जंग के बिना बात नहीं बनेगी?
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चीन ने बॉर्डर पर तैनात किए 60 हज़ार सैनिक
भारत और चीन के सीमाई इलाक़ों में इस वक्त कड़ाके की ठंड है. ऊपर से सैटेलाइट इमेज बता रहे हैं कि आने वाले दिनों में हालात और मुश्किल होने वाले हैं. उसने जहां बॉर्डर पर 60 हजार से ज़्यादा फ़ौजियों को तैनात कर रखा है. वहीं हर हफ्ते दस दिनों में फौजियों को बदल भी रहा है. बॉर्डर के इलाक़े में वो फौजियों के लिए अस्थाई गर्म तंबूनुमा मकान भी बनाने में जुटा है, जिसे देख कर साफ पता लगता है कि चीन का इरादा फिलहाल पीछे हटने का तो कतई नहीं है. ऐसे में आने वाले वक़्त में बेहद सावधान रहने की ज़रूरत है.
अमेरिका ने भारत के पास भेजा विध्वंसक युद्धपोत
चीन और भारत के दरम्यान जारी इसी तनातनी को देखते हुए अमेरिका ने भी अपना स्टैंड क्लीयर कर दिया है. अमेरिका ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की हरकतों को जवाब देने के लिए अपने दो सबसे ख़ौफनाक हथियारों को उतार दिया है. ये अमेरिकी हथियार हैं ओहियो क्लास की क्रूज मिसाइल सबमरीन यूएसएस जॉर्जिया और एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस रोनाल्ड रीगन. ये इतने बड़े विनाशक हैं कि किसी भी देश को पलक झपकते तबाह कर सकते हैं.
यूएस जॉर्जिया एटम बम ले जाने की सलाहियत रखनेवाले मिसाइलों से लैस है. ये सबमरीन पानी से जमीन पर हमला कर सकनेवाले 154 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस है. ठीक इसी तरह अमेरिका के सुपरकैरियर्स में से एक यूएसएस रोनाल्ड रीगन परमाणु शक्ति से चलने वाला ऐसा एयरक्राफ्ट कैरियर है, जिसमें 90 लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर्स के अलावा 3000 के आसपास नौसैनिक तैनात होते हैं.
चीन ने किया समंदर में अमेरिकी जहाज़ का पीछा
लेकिन इसी चीन के लिए विनाश काले विपरीत बुद्धि की कहेंगे कि वो समंदर में अमेरिका का पीछा करने की गुस्ताखी कर रहा है. हाल ही में अमेरिका का मिसाइल विध्वंसक जॉन एस मैकेन दक्षिण चीन सागर में जब उसके कब्जे वाले द्वीपों के करीब से गुज़रा तो चीन ने उसके पीछे अपने जहाज और फाइटर भेजे. साथ ही ये कह कर अमेरिका को ललकारने की कोशिश की कि वो दक्षिण चीन सागर में अपनी गतिविधियों से चीन को उकसाने की कोशिश कर रहा है.
अमेरिका ने कहा, "मुंहतोड़ जवाब के लिए तैयार भारत"
हालांकि अमेरिका ने चीन के ऐतराज़ को दो टुक जवाब दिया और कहा कि चीन भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका यानी क्वाड देशों के लिए खतरा पैदा करना चाहता है. अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने भी कहा कि भारत चीन बॉर्डर पर चीन जिस तरह अपनी ताकत के दम पर हालात काबू में करने की कोशिश कर रहा है, वो उसकी विस्तारवादी सोच का सबूत है. अगर चीन अपना रवैया नहीं बदलता है, तो भारत भी पूरी तरह तैयार है.
वैसे भारत की तैयारियों को आप इसी से समझ सकते हैं कि भारतीय वायुसेना का बोइंग-सी17 ग्लोबमास्टर को लद्दाख में तैनात कर रखा है. भारतीय वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर एलएसी पर उड़ान भर रहे हैं. लद्दाख के लेह एयरबेस से वायुसेना के मिग-29 ने भी उड़ान भरी है. ऊंची चोटियों पर तो ख़ैर हमारे रणबांकुरे तैनात हैं ही. ऐसे में चीन की किसी भी ग़लती का उसे जबरदस्त खामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है.