चीन अपनी करतूतों से पूरी दुनिया में अलग-अलग थलग पड़ चुका है, इस बात से सब वाकिफ हैं. लेकिन इसके बावजूद भी चीन की हालत कुछ ऐसी है, जैसे रस्सी जल गई मगर बल नहीं गया. वो एलएसी पर भारत से उलझ रहा है. ताइवान को भी रह-रह कर दबाने की कोशिश कर रहा है. ताइवान की मदद करने से नाराज़ होकर अमेरिका को भी घुड़की दे रहा है. इस तनातनी के बीच अब वो अपने फ़ौजियों में जोश भरने की कोशिश कर रहा है. ताकि वो जंग के लिए तैयार रहें.
दरअसल, चीनी फ़ौजी कुछ ही महीने पहले गलवान घाटी में भारत के शूरवीरों का दम देख चुके हैं. सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि गलवान घाटी में हुई उस झड़प के बाद खुद चीनी फ़ौजियों की हवा ख़राब है. लेकिन चीनी हुकूमत है कि अपने घबराए फ़ौजियों में जोश भर कर उन्हें फिर से मौत के मुंह में भेजना चाहता है. इसके लिए जहां वो भारत के उत्तरी बॉर्डर पर अपने सैनिकों की तादाद लगातार बढ़ा रहा है, वहीं मरीन सैनिकों के बहाने ही सही राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी घबराई फ़ौज में जान फूंकने की कोशिश कर रहे हैं.
भारत के साथ चल रहे तनाव के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने गुआंगडोंग इलाके का दौरा किया और सेना के एक अड्डे पर पहुंचे. सैन्य अड्डे पर शी जिनपिंग ने मरीन सैनिकों को युद्ध के लिए तैयार रहने और हमेशा सतर्क रहने के लिए कहा. उन्होंने शांतोउ इलाके का भी दौरा किया जो विदेशों में रहने वाले कई चीनी लोगों का घर भी है.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक शी जिनपिंग ने मरीन सैनिकों से कहा कि एक साथ कई मोर्चो पर तैयार रहें और त्वरित प्रतिक्रिया दें. सभी मौसम और इलाके में जंग लड़ने के लिए तैयार रहें. आपको अपना दिमाग और पूरी ऊर्जा युद्ध की तैयारी के लिए लगाना चाहिए और हमेशा बेहद सतर्क रहें. मरीन सैनिकों के बहुत से अलग-अलग मिशन हैं और आपकी डिमांड काफी ज्यादा होगी. इसको देखते हुए आपको अपनी ट्रेनिंग में जंग की तैयारी पर फोकस रखना चाहिए. साथ ही अपने प्रशिक्षण के मानकों और लड़ाकू क्षमता को बढ़ाएं.
इतना ही नहीं मरीन सैनिकों के सामने शी जिनपिंग का ये बयान साफ इशारा कर रहा है कि चीन भारत के साथ साथ साउथ चाइना सी में अमेरिका का सामने करने की भी तैयारी कर रहा है. और चीन के लिए कम से कम अमेरिका से जंग की हालत में मरीन सैनिकों का रोल काफी अहम होगा. हालांकि भारत के साथ उसकी ऐसी कोई समुद्री सीमा या तटस्थ्य इलाका नहीं जहां जंग की गुंजाइश बनें.
माना जा रहा है कि चीनी राष्ट्रपति ने इशारे-इशारे ही में ताइवान और साउथ चाइना सी चीन के दावे का जिक्र किया है. ये दौरा ऐसे वक्त पर हो रहा है जब ताइवान स्ट्रेट में तनाव अपने चरम पर है. साथ ही अमेरिका और ताइवान के बीच रिश्ते और ज्यादा नज़दीकी होते जा रहे हैं. ज़ाहिर है चीन जहां एक तरफ ताइवान को अपने नियंत्रण में लाना चाहता है. वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ताइवान को किसी भी कीमत पर चीन के पाले में जाने नहीं देना चाहता है.
मगर ड्रैगन भी कहां इतनी आसानी से मानने वाला है. उसने ताइवान को हथियाने के लिए साम-दाम-दंड-भेद सब कुछ लगा दिया है. माना जा रहा है कि इसके लिए जरूरी हुआ तो वो सेना का भी इस्तेमाल कर सकता है.
इससे पहले ऐसी खबरें आईं थी कि अमेरिकी कांग्रेस ताइवान को अत्याधुनिक हथियार देने के तीन डील की समीक्षा कर रही है. उसने चीन को करारा जवाब देने की तैयारी भी पूरी कर ली है. ऐसे में अगर जंग हुई तो ड्रैगन कई तरफ से घिर सकता है. उसका ये डर इस बात से ज़ाहिर होता है कि वो लगातार गीदड़ भभकियां दे रहा है. अमेरिका को भी उसने एक ऐसी ही गीदड़ भभकी देते हुए ताइवान को हथियार बेचने की योजना को रद्द करने की धमकी दी है.