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इजरायल और हमास की जंग के 41 दिन पूरे हो चुके हैं. गाजा पट्टी में हमास के ठिकानों पर इजरायली सेना का हमला जारी है. ग्राउंड ऑपरेशन के तहत इजरायल की सेना ने यूं तो गाजा में कई अस्पतालों को निशाना बनाया है. लेकिन बुधवार को इजरायली सेना गाजा के सबसे बड़े अस्पताल अल शिफा में दाखिल हो गई. जहां कई कमरों और तहखानों की तलाशी ली गई. वहां से कुछ हथियार और सामान तो बरामद हुआ लेकिन हमास के लड़ाके नहीं मिले. जबकि इजरायली सेना का दावा था कि अल शिफा अस्पताल में हमास का कमांड सेंटर चलता है.
इजरायल ने किया था ये दावा
इजरायल ने दावा किया था कि गाजा के अस्पतालों का इस्तेमाल हमास अपने सैन्य अभियानों और बंधकों को रखने के लिए कर रहा है. अमेरिका ने भी इजरायल के इन दावों का समर्थन किया था. यही वजह थी कि इजरायल की सेना ने गाजा के अस्पतालों को अपना निशाना बनाया. इस दौरान विवाद भी हुआ कि हमलावरों ने मरीजों को भी नहीं बख्शा. उनकी वजह से कई मरीजों की मौत भी हो गई. हालांकि इजरायल ने इन खबरों को बेबुनियाद करार दिया.
अमेरिका ने किया था दावे का समर्थन
इजरायली सेना लगातार दावा कर रही है कि अल शिफा हॉस्पिटल के नीचे हमास का प्रमुख ऑपरेशन कमांड सेंटर है और हमास के लड़ाके मरीजों, कर्मचारियों और नागरिकों का इस्तेमाल अपनी ढाल के तौर पर करते हैं. अमेरिका ने भी मंगलवार को इस बात की पुष्टि कर दी थी. यही वजह थी कि पिछले कई दिनों से इजरायल की सेना ने अल शिफा अस्पताल को घेर रखा था.
अस्पताल से मिले हथियार और उपकरण
लेकिन बुधवार को इजरायल की सेना गाजा के सबसे बड़े अस्पताल अल शिफा में दाखिल तो हो गई. लेकिन उसके हाथ कुछ खास नहीं लगा. हालांकि वहां से कुछ हथियार और अन्य सैन्य उपकरण ज़रूर बरामद हुए. दावा किया जा रहा है कि इससे पहले अस्पताल के बाहर हमास के लड़ाकों के साथ इजरायली सेना की मुठभेड़ भी हुई. जिसमें हमास के पांच लड़ाके मारे गए.
नहीं मिले हमास के लड़ाके
इजरायली सेना का दावा था कि हमास के आतंकी अस्पताल के नीचे सुरंगों में छिपे हुए हैं, जबकि वहां भी उन्हें कुछ नहीं मिला. इजरायल के इस दावे को हमास हमेशा नकारता रहा है. जबकि इसी वजह को लेकर इजरायली सेना ने अल शिफा अस्पताल पर धावा बोला है. मगर वहां अंदर हमास का कोई फाइटर इजरायली सेना को नहीं मिला. ना ही अस्पताल के नीचे किसी सुरंग में कोई सुराग मिला. अब सवाल है कि आखिर हमास के लड़ाके कहां हैं?
अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
इजरायली सेना के प्रवक्ता डैनियल हगारी ने कहा, अस्पताल में हमें हथियार, सैन्य तकनीक से जुड़ा सामान और कुछ उपकरण मिले हैं. साथ ही वहां से हमास का कुछ सामान और हमास की वर्दी भी बरामद हुई है. इजरायली सेना ने अस्पताल में मिले हथियारों, हथगोले और अन्य सैन्य उपकरणों की फोटो और वीडियो भी जारी की है. डैनियल हगारी का दावा है कि इस बरामद सामान से साबित होता है कि अस्पताल का इस्तेमाल आतंक के लिए किया गया था, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है.
इजरायल ने जारी किया अस्पताल का वीडियो
अपने दावा को पुख्ता करने के लिए इजरायली सेना ने अल शिफा अस्पताल के अंदर का एक वीडियो जारी किया है. जिसमें अंदर मिले तीन डफेल बैग दिखाए गए हैं. ये एमआरआई लैब के आसपास मिले हैं. हर बैग में एक असॉल्ट राइफल, ग्रेनेड और हमास की वर्दी थी. इसके अलावा एक कमरे से गोला बारूद, कई असॉल्ट राइफलें बरामद हुई हैं. एक लैपटॉप भी वहां से जब्त किया गया है.
इजरायली सेना की वजह से कई लोगों की मौत
गाजा के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इजरायली सेना की घेराबंदी और हमले के दौरान तीन नवजात सहित कई मरीजों की मौत हो गई है. हालांकि, इजरायली सेना ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी सफाई में कहा कि हमने अस्पताल के गेट पर हमास के लड़ाकों को मारा और हम मेडिकल सप्लाई लेकर आए थे.
इजरायली सेना ने दी सफाई
इजरायली सेना का दावा है कि अस्पताल में घुसने से पहले हमास के आतंकियों के साथ उनकी लड़ाई हुई, जिसमें हमास के लड़ाके मारे गए. उन्होंने कहा कि हम अस्पताल के लिए इनक्यूबेटर, शिशु के लिए आहार और मेडिकल सप्लाई लेकर आए थे, जिसे सफलतापूर्वक पहुंचा दिया गया है. उन्होंने कहा कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि ये सामान जरूरतमंद लोगों तक पहुंच जाए.
रातभर चलती रही लड़ाई
अस्पताल के सर्जन डॉ. अहमद एल मोहललाती ने समाचार एजेंसी रायटर को बताया कि रात भर अस्पताल के बाहर जंग चली, जिस वजह से कर्मचारी छुपे हुए हैं. उन्होंने कहा कि मंगलवार की शाम से ही गोलीबारी शुरू हो गई थी. अस्पताल के अंदर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि इजरायली टैंक सुबह करीब साढ़े तीन बजे अस्पताल परिसर में दाखिल हो गए थे. इसके बाद इजरायली सैनिक पूरे अस्पताल में फैल गए और कोने-कोने में तलाशी ली.
बिना इलाज के परेशान हैं गाजा के कैंसर मरीज
उचित उपचार और देखभाल के बिना गाजा पट्टी में 2000 कैंसर रोगी बुरे हालात का सामना कर रहे हैं. अपनी व्हीलचेयर पर बैठकर सईदा बारबाख खान यूनिस संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित स्कूल में भीड़-भाड़ वाली कक्षा को देखती हैं. वह गहरी आहें भरती हैं. और बताती हैं कि उन्हें कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है.
असल में 62 वर्षीय सईदा बारबाख खान को हड्डी का कैंसर है. उनकी दवा कई दिन पहले ही खत्म हो गई थी. उनका इलाज कब्जे वाले पूर्वी येरुशलम के अल माकासेद अस्पताल में किया गया था. वहां उनकी सफल लेकिन जटिल सर्जरी हुई थी. वह लड़ाई शुरू होने से दो दिन पहले 5 अक्टूबर को गाजा पट्टी लौट आई थी.
वह कहती हैं, ''मुझे मेडिकल चेक-अप के लिए दो हफ्ते बाद वापस जाना था. मुझे उम्मीद नहीं थी कि चीजें खतरे के इस स्तर तक पहुंच जाएंगी. संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित स्कूल में 725,000 विस्थापित फिलिस्तीनियों ने एक महीने से अधिक समय से शरण ले रखी है, ताकि वे इजरायली बमबारी से बच सकें. लेकिन ये बीमार मरीजों के लिए आदर्श स्थिति नहीं हैं.
बिजली नहीं है. साफ पानी की कमी है. खाने और बिस्तर के साथ-साथ शौचालय जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं. बारबाख ने कहा, उन्हें देखभाल और नींद की जरूरत है और वे उस व्हीलचेयर से ज्यादा चल-फिर नहीं सकती हैं. कैंसर के साथ-साथ इस बदसूरत और दर्दनाक जंग में बेहद भयानक है.
एर्दोगन ने फिर की इजरायल की निंदा
गाजा में बढ़ती मौतों की वजह से तुर्की के राजनेता, विशेष रूप से राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन लगातार इजरायल की आलोचना कर रहे हैं. एर्दोगन ने हाल ही में कहा था कि उन्होंने इजरायल के हमले को लेकर इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ पूरी तरह से संबंध तोड़ दिए हैं, हालांकि उन्होंने सरकारों के बीच संचार के स्तर को कम नहीं किया है.
राष्ट्रपति ने 3 नवंबर को विदेश यात्रा से लौटते हुए संवाददाताओं से कहा था कि नेतन्याहू अब ऐसे व्यक्ति नहीं हैं, जिनसे हम बात कर सकें. हमने उसे अपनी लिस्ट से मिटा दिया और फेंक दिया. राजनीतिक जोखिम सलाहकार समूह टेनेओ के सह-अध्यक्ष वोल्फैंगो पिककोली ने कहा, एर्दोगन की बयानों से पता चलता है कि उन्होंने तुर्की और इज़राइल के बीच जो मेल-मिलाप चल रहा था, उसे पूरी तरह से खत्म नहीं किया है, बस उसे डीप फ्रीजर में फेंक दिया है.
इजरायल में 7 अक्टूबर को हुए हमास के हमले में जिस अबू जिना की अहम भूमिका थी, वो भी इजरायली सेना के हमले में मारा जा चुका है. उसके बनाए रॉकेट से हमास से इजरायल का सबसे ज्यादा नुकसान किया था.
इससे पहले इजरायल डिफेंस फोर्सेस ने हमास की दीर अल-बलाह बटालियन के कमांडर वाएल असेफा को मार गिराया था. उसने सेंट्रल कैंप ब्रिगेड के कमांडरों के साथ इजरायल में हुए नरसंहार के दौरान हमास के आतंकवादियों को भेजने में मदद की थी. उसके बाद भी कई आतंकी वारदातों में शामिल था. उसे साल 1992-1998 के बीच इजरायल विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की वजह से जेल की सजा मिली थी. इसके साथ ही आईडीएफ ने कई अहम कमांडरों को गाजा के सुरंगों में घेर रखा है.
इजरायली सेना आपसी तालमेल की वजह से लगातार हमास के खिलाफ सफल ऑपरेशन चला रही है. जमीन पर मौजूद उसके सैनिकों ने अपने पास सक्रिय एक एंटी टैंक मिसाइल सेल की पहचान करके आईडीएफ जेट को सूचित किया था. उसके बाद आईडीएफ के फाइटर जेट ने हमास के एंटी टैंक मिसाइल सेल को नेस्तनाबूत कर दिया था. इसी तरह नौसैनिकों ने भी हमास के कई ठिकानों पर हमला किया था.
जमीन पर मौजूद सैनिकों ने हमास के कई लड़ाकों को ढूंढ निकाला, जिन्होंने खुद को अल-कुद्स अस्पताल के निकट एक इमारत में बंद कर लिया था. आईडीएफ आर्टिलरी का आक्रमण आतंकियों में खलबली मचा रहा था. मकानों, ठिकानों को उड़ाती इजरायली सेना हमास को मिट्टी में मिलाना चाहती है. इसलिए गाजा में तबाही का मिशन जारी है.