जयपुर में चांदी की चोरी की अनोखी वारदात सामने आई है. चोरों की चांदी हो गई, जो शख्स लुटा, उसकी हालत खराब. क्या आपने कभी सुना है कि कोई शख्स चोरी की शिकायत दर्ज कराने थाने जाए, लेकिन वह यह न बता पाए कि उसे चोरी से कितने का नुकसान हुआ है? क्या आपने कभी सुना है कि चोर, चोरी करने से पहले करीब एक करोड़ रुपये निवेश करे? अंदाजा लगाना मुश्किल है कि जिस चोरी की प्लानिंग में 1 करोड़ रुपये इन्वेस्ट कर दिए जाएं, उसकी कीमत कितनी होगी. इसी पहेली को सुलझाने की जयपुर पुलिस कोशिश कर रही है.
दुनिया में तरह तरह के चोर हैं. कुछ शातिर. कुछ महाशातिर. कुछ उससे भी ज़्यादा शातिर. लेकिन कुछ ऐसे हैं, जिनसे शातिर शब्द की उत्पत्ति हुई. ये उन सब शातिरों, महाशातिरों और उससे भी ज़्यादा शातिरों के भी पिता समान हैं. आज कहानी है उन्हीं शातिरों के पिताजी की. और यकीन जानिए ऐसा शातिरानापन आपने अपनी ज़िंदगी में पहले कभी नहीं देखा होगा.
हिंदुस्तान के इतिहास में भी कभी इतनी हैरान करने वाली रॉबरी नहीं हुई होगी. हमने चलती ट्रेन की छत काट कर चोरों के कैश चुराने की खबर देखी. सुरंग बनाकर चोरों को बैंक के लॉकर से सैकड़ों करोड़ की ज्वैलरी चुराने की तस्वीरें भी देखी. लेकिन ये चोरी अनोखी है. ये पाताल से पाताल में चोरी है. हॉलीवुड की किसी रॉबरी थ्रिलर टाइप की फिल्मी कहानी. लोहे के बड़े बड़े बक्से सोने चांदी से भरे हुए थे और पाताल में गड़े हुए थे. मगर उन्हें चुरा लिया गया. कैसे? इसके लिए आपको इस फिल्मी कहानी को जानना होगा.
मामला जयपुर के वैशाली नगर का है. जहां रहने वाले डॉ. सुनीत सोनी और उनकी पत्नी का घर है. डॉक्टर साहब शहर के जाने माने हेयर ट्रांसप्लांट सर्जन और उनकी पत्नी मॉडल रह चुकी है. दोनों ने मिलकर मेडीस्पा नाम का ये हेयर ट्रांसप्लांट सेंटर बनाया. लोगों के बाल उगा-उगाकर डॉक्टर साहब ने भी खुद का मनी प्लान्ट उगा लिया. लाखों करोड़ों अरबों रुपये उस मनी प्लांट पर उगने लगे. उनके प्लान्ट पर इतनी मनी उगी की उन्हें समझ नहीं आया कि अब इस मनी का क्या करें. तो उन्होंने अपना आलीशान क्लीनिक बनाया. उसके अंदर एक बेसमेंट बनाया. बेसमेंट में गड्ढ़ा खुदवाया.
उस गड्ढ़े में अभी तक की जानकारी के मुताबिक बड़े-बड़े तीन लोहे के बक्से रखवाए. बकौल डॉक्टर सोनी के उन बक्सों को चांदी से भर दिया. फिर उस गड्ढ़े को पटवाया. उस पर प्लास्टर करवाया. आखिर में उसपर महंगी महंगी इटैलियन टाइल्स लगवा दी. सोचा अब मामला ठीक है. चैन की नींद आएगी. मगर कोई था, जो उनसे भी आगे की सोच रहा था. और वो बस डॉक्टर साहब के चैन की नींद सोने का ही इंतज़ार कर रहा था. मगर उसने आम चोरों की तरह रात के अंधेरे में मुंह उठाकर चोरी नहीं की. उसने प्लानिंग की.
तो इस प्लानिंग की शुरुआत होती है, डॉ. सुनीत सोनी की आलीशान कोठी के बगल में खाली पड़े एक प्लॉट से. चोरों ने पहले बनवारी नाम के एक शख्स को लालच देकर उसके नाम पर उस प्लॉट को खरीदा. वो भी पूरे 97 लाख रुपये में. यानी एक करोड़ में सिर्फ तीन लाख कम. तो अंदाज़ा लगाए कि अगर कोई चोर चोरी के लिए 97 लाख रुपये का इंवेस्टमेंट कर रहा था. तो ये चोरी कितनी बड़ी होने वाली थी. प्लॉट खरीदने के बाद उसे चारों तरफ से नीले रंग की टीन शेड से इसे घेरा गया. फिर ज़मीन पर बनी पुरानी इमारत को गिराया गया. यानी ये भूमिका तैयार करने की कोशिश की गई कि यहां अब किसी नई इमारत का निर्माण शुरु हो चुका है. नींव खोदी जा रही है. लिहाज़ा खुदाई में होने वाली खटर-पटर की आवाज़ से ना किसी को कोई एतराज़ होना चाहिए और ना ही शक.
ज़ाहिर तौर पर वहां मकान के लिए नींव खुद रही थी. जबकि हकीकत ये थी कि ये नींव नहीं बल्कि डॉ. सुनीत के घर तक पहुंचने के लिए सुरंग खोदी जा रही थी. इस चोरी में शुरुआती वक्त में दो लोग शामिल थे. शेखर अग्रवाल और जतिन जैन. वे दोनों सिर्फ इस महा रॉबरी के मास्टरमाइंड ही नहीं थे बल्कि रिश्ते में मामा और भांजे भी थे. यानी ये मामा-भाजे की जोड़ी थी. पहले दोनों खुद ही सुरंग खोदने में लगे हुए थे. लेकिन जल्द ही उन्हें लग गया कि अकेले तो उन्हें ये सुरंग बनाने में सालों लग जाएंगे. लिहाज़ा उन्होंने धीरे धीरे लोगों को लालच देकर इसमें शामिल करना शुरु किया.
सबसे पहले शामिल किया गया बनवारी लाल को. फिर ठेकेदार केदार जाट और उसके दोस्त कालूराम सैनी को. इन तीनों को लालच दिया गया कि लूट के माल में हिस्सेदारी देंगे. दुनिया की नज़र से छुपकर सुरंग को खोदते खोदते तीन महीने का वक्त लग गया. 10 फीट गहरी और 26 फीट लंबी सुरंग खोदने के बाद. फिर एक रात. एक हथौड़ा ऐसा पड़ा जिसने चोरों को इस बक्से तक पहुंचा दिया. सबने तबियत से चोरी की और चलते बनें. अगले दिन जब डॉक्टर डॉ. सुनीत सोनी ज़मीन में गड़ी अपनी जागीर को देखने पहुंचे तो पचा चला कि ज़मीन में गड़े तीन में से एक बक्सा खुदा पड़ा है.
डॉक्टर साहब सकते में आ गए. उन्हें समझ नहीं आया कि करें तो क्या करें. वो पुलिस को बताने में भी हिचकिचा रहे थे और चुप रह नहीं सकते थे. लिहाज़ा पुलिस को बताना ही बेहतर समझा. डॉक्टर साहब ने पुलिस को बताया कि जिस बक्से में चोरी हुई, उसमें चांदी की 18 छड़ें थीं. बाकी दो बक्से खाली थी. बाकी आप खुद समझदार हैं.
उस बक्से में रखी 18 छड़ों का वज़न और कीमत कितनी थी. ये डॉक्टर साहब ने नहीं बताया. मौजूदा वक्त में एक किलो चांदी की कीमत 71,570 रुपये है. अगर ये माना जाए कि बक्से में जो 18 छड़ें रखी हुईं थी. उनका वज़न एक किलो था तो इसकी कीमत 12 लाख 88 हज़ार 260 रुपये होती है. सोचिए क्या 12 लाख रुपये के लिए डॉक्टर साहब इतनी प्लानिंग के साथ पाताल में ये खज़ाना खड़वाएंगे. और क्या 12 लाख रुपये के लिए 97 लाख की ज़मीन खरीदकर उसके पाताल में 3 महीने तक खुदाई करेंगे.
डॉ. सुनीत सोनी ने अभी तक पुलिस को भी ये नहीं बताया है कि उनके घर के नीचे बने पाताल में गड़े बक्सों में क्या क्या था. कितना था और कितने का था. जांच चल रही है. इस मामले में 4 लोग पकड़े तो गए हैं. लेकिन चांदी का कुछ पता नहीं. और कहानी यहीं खत्म नहीं होगी. इसके बाद डॉ सुनीत को भी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को इन जवाहरातों की रसीदें दिखानी पड़ेंगी. वरना चोरों के साथ वो भी जेल का रास्ता देख सकते हैं.