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जज हत्याकांडः अभी तक नहीं सुलझी कत्ल की पहेली, अब CBI के सामने कातिल को पकड़ने की चुनौती!

28 जुलाई 2021 को धनबाद शहर में सुबह के वक्त एक ऑटो से टक्कर मारकर एडीजे यानी एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज उत्तम आनंद का कत्ल कर दिया जाता है. इत्तेफाक से कत्ल की ये तस्वीरें सीसीटीवी कैमरे में क़ैद होती हैं और देखते ही देखते वायरल भी हो जाती हैं.

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जज उत्तम आनंद की मौत के मामले में अब सीबीआई जांच करेगी
जज उत्तम आनंद की मौत के मामले में अब सीबीआई जांच करेगी

एक जज कत्ल और उस पर झारखंड हाई कोर्ट की नजर है. साथ ही देश की सबसे बड़ी अदालत भी इस मामले पर नजर रख रही है. जिस कत्ल की पहेली को सुलझाने के लिए झारखंड के सबसे तेज़ तर्रार पुलिस अफसरों ने दिन रात एक कर दिया है. इस हाई प्रोफाइल मर्डर केस में दो आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है. मगर इन सबके बावजूद जज उत्तम आनंद के कत्ल की पहेली नहीं सुलझ पाई है. कातिल और कत्ल का मकसद अभी भी एक राज बना हुआ है. इस संगीन कत्ल की जांच अब सीबीआई के हवाले कर दी गई है. बुधवार को सीबीआई ने इस मामले में नया केस दर्ज किया है. 

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28 जुलाई 2021 को धनबाद शहर में सुबह के वक्त एक ऑटो से टक्कर मारकर एडीजे यानी एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज उत्तम आनंद का कत्ल कर दिया जाता है. इत्तेफाक से कत्ल की ये तस्वीरें सीसीटीवी कैमरे में क़ैद होती हैं और देखते ही देखते वायरल भी हो जाती हैं. आनन-फानन में पुलिस आईपीसी की धारा 302 के तहत कत्ल का मुकदमा दर्ज कर मामले की तफ्तीश शुरू कर देती है. और अगले दिन की सुबह होने से पहले ही क़त्ल में शामिल ऑटो ड्राइवर लखन और उसके सहयोगी राहुल को गिरफ्तार कर लिया जाता है. चूंकि मामला बेहद संगीन है, खुद सुप्रीम कोर्ट झारखंड सरकार से जल्द से जल्द गुनहगारों तक पहुंचने की बात कहती है. लेकिन इतना सबकुछ होने के बावजूद ये रहस्य अब भी जस का तस है कि आखिर धनबाद के एडीजे का कत्ल किसने किया? 

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अब आप कहेंगे कि जब पुलिस ने कत्ल के इल्जाम में दोनों मुल्ज़िमों यानी ऑटो ड्राइवर और उसके साथी को पकड़ लिया है. दोनों को जेल भी भेज दिया, तो फिर इस सवाल के क्या मायने हैं कि आख़िर एडीजे का क़त्ल किसने किया? तो इसका जवाब छुपा है कत्ल के मोटिव यानी मकसद में. क्योंकि सवाल ये है कि आखिर एडीजे जैसी बड़ी हस्ती का कत्ल करने के पीछे दो मामूली ऑटो ड्राइवरों का क्या मकसद हो सकता है? वो भी तब, जब अब तक कि छानबीन के मुताबिक दोनों ने एडीजे का कत्ल करना तो दूर एडीजे को जानने की बात तक से इनकार किया है.

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सूत्रों की मानें तो अब तक की पूछताछ में गिरफ्तार ऑटो ड्राइवर लखन और उसके सहयोगी राहुल ने अपने ऑटो की टक्कर से एडीजे की मौत होने की बात तो कबूल की है, लेकिन दोनों का कहना है कि उन्होंने एडीजी का कत्ल नहीं किया, बल्कि नशे में उनसे एक्सीडेंट हो गया और इस एक्सीडेंट में एडीजे साहब की जान चली गई. लेकिन क्या यही सच है? या फिर एडीजे की मौत के पीछे कोई गहरी साज़िश है? और ये ऑटो ड्राइवर उस साज़िश के मोहरे? कहीं ऐसा तो नहीं साज़िश का मास्टरमाइंड पुलिस की पकड़ से दूर कहीं छुपा बैठा है? फिलहाल तो मामले की जांच कर रही धनबाद पुलिस की एसआईटी को भी यही लगता है और इसीलिए पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए अब ऑटो ड्राइवरों के दिमाग में घुसकर इस वारदात का सच करने का फ़ैसला किया है. 

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जी हां, अब झारखंड पुलिस गिरफ्तार ऑटो ड्राइवर लखन और राहुल का लाई डिटेक्टर, ब्रेन मैपिंग, पॉलीग्राफ़, सस्पेक्ट डिटेंसन, लायर्ड वॉइस एनालाइजिंग और ब्रेन इक्ट्रिकल ऑक्सीलेशन टेस्ट करवाना चाहती है. धनबाद की सीजेएम यानी चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत ने दोनों मुल्ज़िमों की रज़ामंदी से ये टेस्ट कराने के लिए पुलिस को इजाज़त भी दे दी है.

यानी अब पुलिस को उम्मीद है कि गुजरात के गांधीनगर में मौजूद फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी में इन आरोपियों की साइंटिफिक जांच के बाद मामले की तह तक पहुंचना मुमकिन हो जाएगा. क्योंकि अब तक की पूछताछ में दोनों ने बेशक एडीजे की मौत को एक्सीडेंट का नतीजा बताया हो, कैमरे में क़ैद वारदात की सीसीटीवी फुटेज को देखकर तो ऐसा कतई नहीं लगता कि मामला एक्सीडेंट का है. क्योंकि जिस तरह से ऑटो ने एक खाली सड़क के बीचों-बीच से चलते हुए अपनी बायीं ओर जाकर एडीजे को टक्कर मारी और टक्कर माने के बाद फिर से सीधा चलने लगा, उसे देख कर मामला एक्सीडेंट कम और साज़िश ही ज़्यादा लगता है. और ऊपर से एडीजी जैसी कुर्सी पर बैठा शख्स अक्सर अपराधियों और बाहुबलियों के खिलाफ़ जिस तरह के अदालती फैसले लेता है, उससे उनके दुश्मनों का होना भी कोई हैरानी की बात नहीं है.

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लेकिन एडीजे के छुपे हुए दुश्मन और इस क़त्ल की तफ्तीश को और आगे बढ़ाने से पहले, आइए ये जान लेते हैं कि आखिर धनबाद पुलिस इस मामले की जांच में फिलहाल कहां खड़ी है क्यों उसने मामले के गिरफ्तार आरोपियों की ब्रेन मैपिंग समेत दूसरे साइंटिफिक टेस्ट करवाने का फैसला किया है. सीसीटीवी फुटेज की बिनाह पर एडीजे की मौत के इस मामले में कत्ल की एफआईआर दर्ज करने के साथ ही पुलिस ने मामले की तफ्तीश ऑटो की तलाश करने से शुरू की. इसके लिए पुलिस ने वारदात वाली जगह यानी रणधीर वर्मा चौक से लेकर वहां से जुड़नेवाली दूसरी सड़कों के सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों के फुटेज चेक किए और इस कोशिश में उसे कामयाबी भी मिली.

पुलिस को एक सीसीटीवी फुटेज में वारदात के बाद संदिग्ध ऑटो गोविंदपुर के एक पेट्रोल पंप पर तेल भराता हुआ नज़र आया. इससे पुलिस को शक हुआ कि शायद एडीजे की जान लेने के बाद ऑटो गिरिडीह की तरफ गई हो. पुलिस का शक सही निकला और जल्द ही पुलिस ने वारदात में शामिल ऑटो को ज़ब्त करने के साथ-साथ इसके ड्राइवर लखन और उसके साथी राहुल को गिरफ्तार कर लिया. शुरुआती पूछताछ में ही दोनों ने रणधीर वर्मा चौक पर एक शख्स को टक्कर मारने की बात भी कबूल कर ली. 

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उधर, मामले की जांच कर रही पुलिस की एक दूसरी टीम ने इस ऑटो के मालिक रामदेव लोहार को उसके पाथरडीह वाले घर से इंटरसेप्ट कर लिया. यानी उठा लिया. लेकिन उसने ये कह कर इस मामले को एक नया ट्विस्ट दे दिया कि उसे तो इस वारदात का पता ही नहीं है, क्योंकि उसका ऑटो तीन दिन पहले ही चोरी हो चुका है और वो पिछले तीन दिनों से पुलिस थाने के चक्कर काट-काट कर थक चुकने के बाद ऐन वारदात वाले रोज़ यानी बुधवार को ही अपने ऑटो चोरी की रिपोर्ट लिखवाने में कामयाब हुआ है.

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लेकिन मामला तब उलझ गया, जब चोरी गया ऑटो उसी ड्राइवर यानी लखन के पास से बरामद हो गया. यानी ऑटो चलानेवाले ड्राइवर ने ऑटो चुराया था. और इससे पहले कि वो चोरी के ऑटो से कोई खास फायदा ले पाता, उसी ऑटो से 28 जून की सुबह एडीजे को टक्कर लग गई और ऑटो ड्राइवर और उसका साथी गिरफ्तार कर लिए गए. पुलिस सूत्रों की मानें तो लखन ऑटो के मालिक रामदेव लोहार के साथ मिलकर उसे चोरीशुदा दिखाकर इंश्योरेंस की रकम झटकने की साजिश कर रहा था. लेकिन इस साज़िश के अंजाम तक पहुंचने से मामले ही एडीजे की मौत से मामला दूसरी दिशा में मुड़ गया. फिलहाल ऑटो ड्राइवरों ने पुलिस को बताया है कि उस रात उन्होंने धनबाद स्टेशन के पास ही जमकर नशा किया था. और इसके बाद वो सुबह-सुबह अपने घर लौट रहे थे और इसी बीच उनके ऑटो से एडीजे की टक्कर हो गई.

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इस मामले की तफ्तीश में अब तक धनबाद पुलिस ने पूरी ताकत झोंक रखी है. मामले की जांच खुद एडीजी संजय आनंद लाटकर की अगुवाई में चल रही है. पुलिस ने एक ऑटो का पता लगाने के लिए पूरे ज़िले के 55 थाना इलाक़ों से करीब ढाई सौ ऑटो जब्त किए. करीब 246 छोटे-बड़े बदमाशों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की और 17 बदमाशों को अलग-अलग मामलों में जेल भी भेज दिया. लेकिन सच्चाई यही है कि इतना सबकुछ करने के बावजूद वो ना तो अब तक कत्ल के मास्टरमाइंड का पता लगा सकी है और ना ही पकड़े गए मुल्ज़िमों से कुबूलवाने में कामयाब हो सकी है कि ये एक क़त्ल था. बल्कि पकड़े गए ऑटो ड्राइवरों ने इसे नशे में हुआ एक्सीडेंट बताकर मामले की जांच को वहीं पहुंचा दिया है, जहां से ये शुरू हुई थी.

धनबाद के एडीजे उत्तम आनंद की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और घरवालों की मांग को देखते हुए झारखंड सरकार ने मामले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी है. हालांकि औपचारिक तौर पर मामले की तफ्तीश सीबीआई के हवाले किए जाने से पहले धनबाद पुलिस की एसआईटी इसका सच जानना चाहती है. पुलिस ने कत्ल के आरोपी ऑटो ड्राइवर और उसके असिस्टेंट को तो पकड़ लिया है, लेकिन उसे अब मास्टरमाइंड की तलाश है. सवाल है कि आखिर जज उत्तम आनंद का दुश्मन कौन हो सकता है? शक है कि कहीं उनसे दुश्मनी की वजह उनके पेशे से जुड़ी तो नहीं?

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इसी बीच जज उत्तम आनंद की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से नया खुलासा हुआ है. आजतक के पास पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी मौजूद है. रिपोर्ट के मुताबिक उनकी मौत सिर पर गंभीर चोट लगने की वजह से हुई. उनके जबड़ा टूटा हुआ था और सिर की हड्डी कई जगहों से टूटी हुई थी. इसके अलावा शरीर पर तीन जगह बाहरी जबकि सात जगह अंदरुनी चोटें थीं. अब पुलिस इस रिपोर्ट के आधार पर जांच आगे बढ़ाएगी. 

फिलहाल, इस मामले में शक की सुई दो केस और उससे जुड़े लोगों पर है. इनमें से एक केस में तो पिछहे हफ्ते ही जज साहब ने एक आरोपी की ज़मानत अर्ज़ी खारिज की है. इत्तेफाक से इन दोनों मामलों के तार कहीं ना कहीं धनबाद की तीन सबसे ताकतवर जगहों से जाकर जुड़ते हैं. इनमें से एक है सिंह मेंशन, दूसरा कुंती निवास और तीसरा रघुकुल. धनबाद के कोयला किंग रहे सूर्यदेव सिंह के बेटे संजीव सिंह फिलहाल एक रिश्तेदार के क़त्ल के इल्ज़ाम में जेल में हैं, जबकि संजीव सिंह के एक बेहद करीबी रंजय सिंह की भी हत्या हो चुकी है. इस मामले में झारखंड के कुख्यात अपराधी अमन सिंह का नाम आया था. फिलहाल अमन सिंह भी जेल में है.

पिछले दिनों जज उत्तम आनंद ने अमन सिंह की ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी थी. तो सवाल ये है कि अगर जज उत्तम आनंद की मौत वाकई कत्ल है, तो क्या इस कत्ल के पीछे अमन सिंह का हाथ है? या फिर मौके का फायदा उठा कर कोई और अमन सिंह को फंसाना चाहता है? इन सवालों के जवाब मिलना अभी बाकी है.

 

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