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Jyoti Murder Case: कानपुर का अरबपति कारोबारी, इश्क की दीवानगी और बीवी का कत्ल... हैरान कर देगी ये वारदात

जुर्म के कई मामले ऐसे होते हैं, जो पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं. वजह होती है उन मामलों का हाई प्रोफाइल होना. क्योंकि इस तरह की वारदातों पर मीडिया, सरकार और जनता सबकी निगाहें लगी रहती हैं. 8 साल पहले यूपी के कानपुर शहर में एक ऐसा ही मामला सामने आया था.

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पीयूष एक अरबपति कारोबारी का बेटा है, जो इस मामले का मुख्य आरोपी है
पीयूष एक अरबपति कारोबारी का बेटा है, जो इस मामले का मुख्य आरोपी है

जुर्म की कुछ कहानियां पुलिस के लिए अबूझ पहेली बन जाती हैं. ऐसी पहेली कि उनका हल तलाश करना पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता. आए दिन ऐसे मामले हमें देखने और सुनने को मिलते हैं. मगर कई मामले ऐसे होते हैं, जो पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं. वजह होती है उन मामलों का हाई प्रोफाइल होना. क्योंकि इस तरह की वारदातों पर मीडिया, सरकार और जनता सबकी निगाहें लगी रहती हैं. 8 साल पहले यूपी के कानपुर शहर में एक ऐसा ही केस सामने आया था. वो मामला था एक अरबपति कारोबारी की बहू के कत्ल का. जिसने जांच अधिकारियों को हैरान कर दिया था. क्राइम कथा में इस बार कहानी उसी वारदात की. 

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रविवार, 27 जुलाई 2014, कानपुर
यूपी की उद्योग नगरी कानपुर उस दिन भी रोज की तरह कारोबार में मसरूफ थी. दोपहर का वक्त था. तभी शहर के एक बड़े कारोबारी के बेटे ने पुलिस को इत्तिला दी कि कुछ बाइक सवार बदमाशों ने उन्हें रास्ते में रोक कर उनकी पत्नी को कार समेत अगवा कर लिया और उनके साथ मारपीट की. कारोबारी के बेटे ने पुलिस को बताया कि बदमाशों ने इस वारदात को उस वक्त अंजाम दिया, जब वह करीब 12:30 बजे अपनी पत्नी ज्योति के साथ होंडा अकॉर्ड कार में सवार होकर कार्निवल नाम के एक रेस्तरां से घर की तरफ वापस लौट रहे थे. 

अरबपति की बहू का अपहरण
पुलिस को इत्तिला देने वाला कोई मामूली इंसान नहीं था. वो शहर के अरबपति कारोबारी ओम प्रकाश दासानी का 30 वर्षीय छोटा बेटा पीयूष दासानी था. लिहाजा पूरा पुलिस अमला हरकत में आ गया. शहरभर में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई थी. पुलिस अब पीयूष की कार और पत्नी ज्योति को तलाश कर रही थी. पीयूष का हाल बहुत बुरा था. वो पाण्डुनगर में अपने बंगले पर आ चुका था. ज्योति के अगवा हो जाने ख़बर पूरे शहर में आग की तरह फैल चुकी थी.

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आला अफसरों को बताई पूरी वारदात
दासानी परिवार के आवास पर उनके रिश्तेदार और कारोबारी जुटने लगे थे. पुलिस के तमाम आला अफसर भी मौके पर पहुंच चुके थे. कानपुर के आईजी, डीआईजी और एसएसपी पीयूष से बात करने की कोशिश कर रहे थे. पीयूष का रो रोकर बुरा हाल था. उसने बामुश्किल पुलिस को वही बात बताई, जो वो पहले इत्तिला के तौर पर पुलिस को बता चुका था. 

पीयूष ने पुलिस को दिया था ये बयान
पीयूष ने पुलिस के आला अफसरों को बताया कि वो अपनी पत्नी के साथ होंडा अकॉर्ड कार से करीब 11.30 बजे रेस्टोरेंट से निकले थे. रास्ते में उनकी पत्नी ज्योति ने लॉन्ग ड्राइव पर जाने की बात कही थी, तो पीयूष उसे मना कर दिया था. ज्योति के दोबारा जिद करने पर पीयूष उसे कंपनी बाग चौराहे से रावतपुर रोड की तरफ ले गए. तभी चार बाइक सवार अनजान बदमाशों ने उनकी कार रास्ते में जबरन रुकवा ली. बदमाशों ने उनकी कार को चारों तरफ से घेर लिया और फिर पीयूष को कार से जबरन बाहर खींचकर उसकी पिटाई की.

फोन पर सुनी थी ज्योति के चिल्लाने की आवाज़
पीयूष के मुताबिक इसके बाद उनमें से तीन बदमाश उसकी पत्नी ज्योति को उसी की कार में जबरन बैठाकर वहां से फरार हो गए. जब बदमाश ज्योति को अगवा करके ले जा रहे थे, तो उसने ज्योति के मोबाइल पर दो से तीन बार कॉल की. तभी किसी ने फोन कॉल रिसीव की. दूसरी तरफ से ज्योति की तेज आवाज़ आ रही थी. वो बचाओ-बचाओ चिल्ला रही थी. बदमाश उसे गाली देते हुए मारने की धमकी दे रहे थे. इसके बाद फोन कट गया और जब पीयूष ने दोबारा कॉल की तो किसी ने कॉल रिसीव नहीं की.

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पुलिस स्टेशन पहुंचने की कहानी
बकौल पीयूष इसके बाद उसने रास्ते से गुजरने वाले कई लोगों से मदद मांगी, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की. बड़ी मशक्कत के बाद एक बाइकवाले ने उसे लिफ्ट दी और रावतपुर पहुंचा दिया. जहां से पीयूष पुलिस स्टेशन पहुंचा और पुलिस को वारदात की जानकारी दी. इसी बीच उसने अपने पिता और भाई को फोन पर घटना के बारे में बताया.

कार और ज्योति की बरामदगी
जब पुलिस के तीनों बड़े अधिकारियों के सामने पीयूष का बयान दर्ज किया जा रहा था, ठीक उसी वक्त यानी करीब दोपहर के 1:30 बजे पुलिस ने कानपुर के पनकी इलाके से पीयूष की होंडा अकॉर्ड कार बरामद कर ली. उसी कार के अंदर ज्योति भी मौजूद थी, लेकिन जिंदा नहीं मुर्दा. उसका कत्ल हो चुका था. उसकी लाश खून से सनी हुई थी. उसका जिस्म किसी तेजधार हथियार से गोदा गया था. कार में इस कदर खून फैला था कि ज्योति के कपड़ों का रंग भी पहचान में नहीं आ रहा था. ये ख़बर मिलते ही पीयूष दासानी के घर पर कोहराम मच गया. पूरे शहर को पता चल चुका था कि अरबपति कारोबारी की बहू का बेरहमी से कत्ल कर दिया गया है. पुलिस के तमाम बड़े अफसरान मौका-ए-वारदात की तरफ रवाना हो चुके थे.

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साल 2012 में हुई थी पीयूष और ज्योति की शादी
पीयूष के पिता ओम प्रकाश देश के जाने-माने बिस्कुट निर्माता है. मुकेश और पीयूष उनके बेटे हैं. पीयूष परिवार में सबसे छोटा है. नवंबर 2012 उसकी शादी जबलपुर के नैपियर टाउन निवासी प्लास्टिक कारोबारी शंकर लाल नागदेव की 24 वर्षीय बेटी ज्योति के साथ हुई थी. पीयूष भी अपने पिता के साथ बिस्कुट कारोबार से ही जुड़ा था. उसकी पत्नी ज्योति गृहणी थी.

पुलिस को मौके से नहीं मिला कातिल का सुराग
अब पुलिस के सारे बड़े अधिकारी उस जगह पहुंच चुके थे, जहां से पीयूष की कार और उसकी पत्नी की लाश बरामद की गई थी. पुलिस ने फोरेंसिक टीम को भी मौके पर बुला लिया था. कार और आस-पास के इलाके में आरोपियों के सुराग तलाश किए जा रहे थे. पुलिस के अब पीयूष के बयान मौजूद थे. साथ ही उसकी कार और पत्नी की लाश भी बरामद हो चुकी थी. लेकिन कातिल और कत्ल की वजह अभी तक पुलिस के लिए पहेली ही थे.

ज्योति पर किए गए थे 17 जानलेवा वार
पुलिस ने ज्योति की लाश बरामद करने के बाद उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया था. जहां जांच के दौरान पता चला कि ज्योति का कत्ल किसी चाकूनुमा तेजधार हथियार से किया गया था. उसके जिस्म पर चाकू से गोदे जाने के एक नहीं दो नहीं, बल्कि 17 निशान थे. यानी कातिल किसी भी हाल में ज्योति को जिंदा नहीं छोड़ना चाहता था. लिहाजा उस पर एक के बाद एक 17 बार वार किए गए थे. या यूं कहें के उसके जिस्म को छलनी कर दिया गया था. हर तरफ से खून रिसकर जमता जा रहा था.

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कुछ ही देर में बदल गई थी पीयूष की टी-शर्ट
अभी तक पुलिस के हाथ इस मामले में कुछ नहीं लगा था. हालांकि पुलिस की जांच जारी थी. उधर, ज्योति का पोस्टमॉर्टम हो रहा था. पीयूष और उसका परिवार भी पोस्टमॉर्टम केंद्र पहुंच चुका था. इस दौरान कुछ पुलिस अफसरों ने गौर किया कि वारदात के वक्त और पोस्टमॉर्टम के समय पीयूष ने अलग-अलग टी-शर्ट पहन रखी थी. पुलिस इस हाई प्रोफाइल में छोटी से छोटी बात पर ध्यान दे रही थी. 

सीसीटीवी फुटेज में हैरानी वाली बात
इसी दौरान पुलिस ने उस रेस्तरां की सीसीटीवी कैमरा फुटेज भी खंगाली, जहां वारदात से पहले पीयूष अपनी पत्नी ज्योति के साथ खाना-खाने के लिए गए थे. फुटेज देखने पर पुलिस को एक अजीब सी बात देखने को मिली. पुलिस ने पाया कि पीयूष और ज्योति वहां खाना तो साथ बैठकर खा रहे थे लेकिन दोनों के बीच बिल्कुल भी बातचीत नहीं हो रही थी. इस दौरान पीयूष लगातार किसी से फोन पर बातें कर रहा था.

पीयूष की तरफ घूमने लगी थी शक की सुई
असल में इस हाई प्रोफाइल मर्डर केस की जांच पर खुद आईजी जोन आशुतोष पांडे नजर रख रहे थे. उनके निर्देशन में ही कई टीम बनाकर इस मामले की जांच की जा रही थी. तकनीकी सर्विलांस का इस्तेमाल भी किया जा रहा था. पुलिस ज्योति और पीयूष से जुड़े हर पहलू पर नजर रख रही थी. यही वजह थी कि वारदात के कुछ घंटे बाद ही पोस्टमॉर्टम के वक्त पीयूष की बदली हुई टी-शर्ट पर पुलिसवालों का ध्यान गया था. इसके बाद रेस्टोरेंट की सीसीटीवी फुटेज को खंगालने पर पुलिस ने जो देखा, उसे देखकर पुलिस के शक की सुई पीयूष की तरफ घूमने लगी थी. 

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पुलिस के पास थी शक की कईं वजह
कानपुर के तत्कालीन आईजी आशुतोष पांडे के मुताबिक पुलिस के पास पीयूष पर शक करने की कई वजह थीं. पहली पीयूष ने डिनर के वक्त कोई और टी-शर्ट पहन रखी थी जबकि पत्नी के पोस्टमॉर्टम के वक्त वो दूसरी टी-शर्ट पहनकर आया था. दूसरी वजह ये कि बकौल पीयूष ज्योति को अगवा करते वक्त बदमाशों ने उनके साथ मारपीट की थी लेकिन पीयूष के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं पाए गए थे.तीसरा अपहरण की सूचना देने में पीयूष ने एक घंटा क्यों लगाया जबकि उसके पास मोबाइल फोन भी था और मौका-ए-वारदात के करीब ही महज 500 मीटर दूर एक पुलिस चौकी भी मौजूद थी. चौथी वजह ये कि पीयूष के बयान में एकरूपता नहीं थी. 

ज्योति के घरवालों का था बुरा हाल
लाड़ली बेटी के कत्ल की सूचना उसके घरवालों को भी दे दी गई थी. इसके बाद जबलपुर के प्लास्टिक कारोबारी शंकर लाल नागदेव अपनी पत्नी और बेटे के साथ कानपुर में मौजूद अपनी बेटी की ससुराल में पहुंच चुके थे. वहां बेटी की लाश देखकर उनका कलेजा फट गया. वे दहाड़े मारकर रो रहे थे. कुछ पत्रकारों ने उनसे बात करने की कोशिश भी की थी, लेकिन उन्होंने इस मामले में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया था. ज्योति की मां कंचन वहीं बेहोश होकर गिर पड़ी थीं.

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किसी लड़की के संपर्क में था पीयूष
ज्योति के मर्डर को तीन दिन बीत चुके थे. पुलिस ज्योति और पीयूष के मोबाइल की सीडीआर भी हासिल कर चुकी थी. पीयूष की कॉल डिटेल में पुलिस को एक नंबर मिला, जिस पर वो घंटों बातें किया करता था. पुलिस ने उस नंबर की छानबीन की तो पता चला वो नंबर किसी मनीषा मखीजा नाम की लड़की का था. पुलिस ने ये भी पाया कि वारदात के दिन पीयूष और उस लड़की ने कॉल्स के अलावा एक दूसरे को 150 मैसेज किए थे. पीयूष की पिछले कई दिनों में सैकड़ों बार उससे बातचीत हुई थी. वॉट्सएप और मैसेजिंग के जरिये भी दोनों के बीच बातचीत होती थी.

बड़े कारोबारी की बेटी निकली मनीषा
पुलिस ने फौरन मनीषा मखीजा की कुंडली खंगाल डाली. पता चला कि मनीषा एक पान मसाला कंपनी के मालिक हरीश मखीजा की बेटी है. जो पीयूष की बिस्कुट कंपनी के बड़े डीलर भी थे. पुलिस को अब पूरा मामला समझ आने लगा था. तस्वीर साफ होती जा रही थी. पुलिस शक सही साबित होता जा रहा था. पुलिस के हाथ केस का एक सिरा आ चुका था. 

31 जुलाई 2014
ज्योति के कत्ल की वारदात को 4 दिन बीत चुके थे. पुलिस के पास अहम सुराग भी मौजूद थे. लिहाजा पुलिस ने बिना देर किए अरबपति कारोबारी के बेटे पीयूष को गिरफ्तार कर लिया. उससे पूछताछ शुरू की गई. पीयूष पुलिस के सामने तमाम तरह के झूठ बोलता रहा. फिर पुलिस ने मनीषा मखीजा को पूछताछ के लिए बुलाया. आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई तो पीयूष की सारी चालबाजी धरी रह गई और वो पुलिस के सवालों के सामने टूट गया. उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया. 

पीयूष ने ही रची थी ज्योति के कत्ल की साजिश
पीयूष ने खुद पुलिस के सामने कबूल किया कि उसने पहले जो बयान पुलिस को दिए थे, वो एक मनगढ़ंत कहानी थी. दरअसल, उसने खुद ही अपनी पत्नी की हत्या की साजिश रची थी. जिसमें उसका ड्राइवर अवधेश और नौकर रेणु भी शामिल थे. उन दोनों को इस मर्डर के लिए सुपारी दी गई थी. असल में पीयूष और मनीषा के बीच एक्सट्रा मैरिटल अफेयर था. पीयूष उससे शादी करना चाहता था. इसी वजह से वो ज्योति को रास्ते से हटाना चाहता था.

ड्राइवर ने किए थे ज्योति पर वार
वारदात के दिन पीयूष ने ज्योति को लॉन्ग ड्राइव के लिए ड्राइवर की व्यवस्था हो जाने की बात कही थी. जब ज्योति तैयार हो गई तो उसने ड्राइवर अवधेश को बुलाया, उसके साथ रेणु कनौजिया भी कार में सवार हो गई थी. अवधेश कार चला रहा था, रेणु उसके बगल में बैठी थी. जबकि पीयूष और ज्योति पीछली सीट पर बैठे थे. इसी दौरान सीएस आजाद विश्वविद्यालय और रावतपुर के बीच अवधेश ने कार रोकी. और अचानक ज्योति पर तेजधार हथियार से एक बाद एक 17 बार वार कर डाले. फिर पीयूष, अवेधश और रेणु कार को वहीं छोड़ कर निकल गए. पीयूष ने पुलिस के पास जाने से पहले सारे सबूत मिटा दिए थे. 

ज्योति ने की थी सास-ससुर से पीयूष की शिकायत
इस केस से जुड़ी पुलिस की जांच रिपोर्ट में बताया गया था कि ज्योति को पीयूष के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के बारे में शक होने लगा था. उसने इस बारे में अपने सास-ससुर से भी शिकायत की थी. ज्योति ने उन्हें बताया था कि पीयूष रात में 1 बजे से 4 बजे के बीच कहीं चला जाता है और सुबह लौटता है. 

ज्योति की डायरी में अहम खुलासा
इस मामले की जांच पड़ताल के दौरान पुलिस के हाथ ज्योति की एक डायरी भी लगी थी. जिसके मुताबिक ज्योति और पीयूष दासानी का रिश्ता शादी के पहले दिन से ही ठीक नहीं था. डायरी में ज्योति ने लिखा था कि वो दुनिया की निगाह में पीयूष की पत्नी है, किसे कहे और कैसे कहे कि वो पत्नी नहीं पत्नी जैसी है. पीयूष ने उसे कभी पत्नी का दर्जा नहीं दिया था, लेकिन वो परिवार की बदनामी के डर से ये बात किसी को नहीं बताती थी. हमेशा पत्नी की भूमिका निभाती रही. ज्योति ने डायरी में पीयूष पर उसे मानसिक रूप प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया था. 

22 नवंबर 2020
इस मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इस मामले में करीब 6 साल तक पीयूष की जमानत याचिका कई अदालतों से खारिज होती रही. इसकी एक बड़ी वजह शायद ये भी थी कि यह मामला काफी लंबे समय तक मीडिया की सुर्खियों में बना रहा. लेकिन लंबे इंतजार के बाद हाई प्रोफाइल ज्योति हत्याकांड के मुख्य आरोपी पीयूष दासानी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी. जबकि पीयूष की गर्लफ्रेंड मनीषा मखीजा को पहले ही बेल मिल चुकी थी. पुलिस ने महज चार दिनों में इस मर्डर केस का खुलासा कर दिया था.

नोट- हमारा मकसद क्राइम कथा में इस तरह की सच्ची कहानी बताकर जुर्म का बखान करना बिल्कुल नहीं है. बल्कि हम आपको इस तरह के गुनाहों से आगाह करना चाहते हैं. हम बताना चाहते हैं कि मुजरिम चाहे कितना भी शातिर हो, एक दिन वो कानून के शिकंजे में आ ही जाता है. इसलिए सर्तक रहें, सावधान रहें, सुरक्षित रहें.

 

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