जब कोई कत्ल होता है, तो लोग अक्सर पुलिस के पास जाते हैं. लेकिन अगर पुलिस की वर्दी में ही कातिल आ जाए तो फिर पुलिस का हैरान हो जाना लाजमी है. कोलकाता में छात्रों को मिलने वाली ग्रांट को लेकर एक छात्र पिछले पांच महीने से एक यूनिवर्सिटी के खिलाफ आंदोलन कर रहा था. 19 फरवरी की रात उसी छात्र के घर अचानक चार लोग घुस आए. जिनमें एक पुलिस की वर्दी में था. फिर वो चारों लोग उस छात्र को उसके घर की तीसरी मंजिल पर ले गए और वहां से उसे नीचे फेंक दिया.
अब सवाल ये था कि उस छात्र का कातिल खुद पुलिस है, या पुलिस की वर्दी में कोई और आया था. इस मामले को लेकर कोलकाता में खासा हंगामा हो रहा है. इस कहानी का आगाज़ 18 और 19 फरवरी की दरम्यानी रात को हुआ. कोलकाता पश्चिम से करीब 50 किलोमीटर दूर हावड़ा के आमता इलाक़े में एक ऐसी वारदात हुई, जिसने सिर्फ आमता या हावड़ा को ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल को दहला दिया. आधी रात चार लोग दनदनाते हुए एक मकान में दाखिल हुए.
पहले घरवालों से उनके बेटे अनीस ख़ान के बारे में पूछताछ की और इससे पहले कि वो कोई जवाब दे पाते ये लोग सीधे चौथी मंज़िल पर यानी घर की छत पर चले गए. इन चार लोगों में से एक पुलिस की वर्दी में था, जिसके पास गन भी थी. घरवाले इन्हें रोकते रह गए, लेकिन इन लोगों ने छत पर मौजूद अनीस को धर दबोचा और उसे बुरी तरह पीटते हुए तीसरी मंज़िल पर लेकर आए. इससे पहले कि घरवाले उनसे ऐसा करने का कोई सबब पूछ पाते या उन्हें रोक पाते. बड़ी अनहोनी हो गई. घर में घुस आए इन लोगों ने अनीस ख़ान को सीधे तीसरी मंज़िल से नीचे फेंक दिया और ऊंचाई से गिरने की वजह से थोड़ी ही देर में उसकी जान चली गई.
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यहां तक तो मामला पुलिस की ज़्यादती का लग रहा था. घरवालों को उम्मीद थी कि गुनहगार पुलिसवाले ज़रूर पकड़े जाएंगे और बिल्कुल ठंडे दिमाग़ से किए गए इस क़त्ल की सज़ा उन्हें ज़रूर मिलेगी. लेकिन कहानी में तब एक ग़ज़ब का ट्विस्ट आ गया, जब आमता पुलिस ने कहा कि उन्हें तो पता ही नहीं कि उनके घर में कौन घुसा था और किसने अनीस ख़ान को छत से धक्का देकर नीचे गिरा दिया. कहने का मतलब ये कि घरवाले जिन्हें पुलिसवाले मान कर चल रहे थे, पुलिस ने उन्हें पुलिसवाले मानने से ही इनकार कर दिया और इसी के साथ घरवालों के इंसाफ़ की लड़ाई मानों अंधेरे में गुम हो गई.
अब सवाल ये है कि अगर अनीस ख़ान की जान लेनेवाले लोग पुलिस से नहीं थे तो वो कौन थे? आख़िर 18 और 19 फरवरी की दरम्यानी रात को उसके घर में घुसनेवाले लोगों की पहचान क्या है? क्या उनकी अनीस ख़ान से कोई पुरानी दुश्मनी थी? अगर हां तो क्या और कैसी दुश्मनी? अगर ये लोग पुलिस से नहीं थे तो उनमें से एक ने पुलिस की वर्दी कैसे पहन रखी थी? उसके पास गन कहां से आई?
क्या ये सबकुछ नक़ली था? ताकि वो घर में घुस कर अनीस का क़त्ल कर दें और किसी को पता भी ना चले? और सबसे अहम ये कि ये गुनहगार चाहे जो भी हों आख़िर आमता पुलिस अब तक उनके बारे में कुछ भी पता क्यों नहीं लगा सकी?
ज़ाहिर है अनीस की मौत का मौत का मामला जितना सीधा दिख रहा है, उतना है नहीं. और इसी वजह से सिर्फ़ हावड़ा या राजधानी कोलकाता ही नहीं बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल में अनीस ख़ान को इंसाफ़ दिलाने के लिए विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत हो गई है.
27 साल के अनीस ख़ान के पिता सालेम खान बताते हैं कि शुक्रवार की रात को जब वो लोग उनके घर पहुंचे थे, तो उन्हें पता ही नहीं था कि उनका बेटा घर पर है. वो बीमार थे और सो रहे थे. लेकिन अजनबियों के शोर शराबे से उनकी नींद खुली और उन्होंने घर में घुस आए लोगों रोकने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे. लेकिन हद तो तब हो गई, जब उन्होंने इस वारदात के बाद आमता पुलिस को फ़ोन किया और पुलिसवालों ने बड़े ही नाटकीय तरीक़े से इस वारदात पर अपनी प्रतिक्रिया दी. आमता पुलिस ने कुछ ही देर में मौक़ा-ए-वारदात पर पहुंचने की बात भी कही, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि पुलिस अगले रोज़ सुबह क़रीब साढ़े नौ बजे उनके घर पहुंची.
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एक नौजवान की इस रहस्यमयी मौत से जुड़े सवालों को आगे और टटोलेंगे, लेकिन आइए उससे पहले अनीस ख़ान के बारे में आपको थोड़ी जानकारी दिए देते हैं. अनीस पिछले 137 दिनों से आलिया विश्वविद्यालय में छात्रों की मांगों के लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ़ आंदोलन कर रहे थे, धरना दे रहे थे. असल में यूनिवर्सिटी के छात्रों ने यूनिवर्सिटी को मिलनेवाले ग्रांट को लेकर मुहिम छेड़ रखी थी. इल्ज़ाम है कि यूनिवर्सिटी की लगभग 130 करोड़ की ग्रांट अब भी लंबित है और राज्य सरकार की ओर से यूनिवर्सिटी को अब तक सिर्फ़ 13 करोड़ रुपये मिले हैं.
ऐसे में सवाल ये है कि क्या अनीस की मौत का उसके आंदोलन से कोई लेना-देना है? आख़िर वो कौन लोग थे? जिन्हें अनीस के विरोध प्रदर्शन से परेशानी हो रही थी? फिलहाल हावड़ा रुरल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि उन्होंने किसी भी टीम को 18-19 की रात को अनीस के घर नहीं भेजा था. शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अनीस की मौत की वजह उसे लगी चोटों को ही बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक उसके सिर के पिछले हिस्से में गंभीर घाव था, जबकि दायें पांव में भी चोट थी.
फिलहाल, अनीस की मौत पर पूरा बंगाल सुलग उठा है. अनीस की मौत पर आंदोलन के साथ-साथ इसकी जांच सीबीआई के करवाने की मांग ज़ोर पकड़ने लगी है. सीपीआई से लेकर तमाम वामपंथी दल इस रहस्यमयी मौत के लिए पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हुए उसे कटघरे में खड़ा करने में लगे हैं. लेकिन इन तमाम सवालों के बीच सबसे बड़ा सवाल उन चार रहस्यमयी लोगों को लेकर है, जिन्होंने घर में घुस कर ऊंचाई से फेंक कर अनीस की जान ले ली. अगर ये पुलिसवाले थे, तो फिर किनके इशारे पर उसके घर पहुंचे थे और अगर पुलिसवाले नहीं थे तो फिर कौन थे? ज़ाहिर है, जवाब पश्चिम बंगाल की पुलिस को ही देना है.
(कोलकाता से ऋत्विक मंडल का इनपुट)