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Kolkata Trainee Doctor Murder Rape Case: एक शोर उठता है, फिर खामोशी छा जाती है. फिर खामोशी टूटती है और शोर उठता है. इस बार ये खामोशी कोलकाता में टूटी, शोर उठा. निर्भया से पहले और निर्भया के बाद यही तो होता रहा है. कोलकाता के एक सरकारी अस्पताल में एक जूनियर डॉक्टर को मार दिया जाता है. लेकिन बताने वाले अब तक यह नहीं बता पाए हैं कि डॉक्टर को मारने से पहले उसका जिस्म नोचा गया था या फिर मारने के बाद उसके साथ दरिंदगी की गई? सवाल बड़ा है और जवाब बहुत अहम.
8 अगस्त 2024, रात 12 बजे
इस रात ओलंपिक से भारत की सबसे बड़ी उम्मीद जुड़ी थी. क्योंकि इसी रात भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा का फाइनल मुकाबला था. और खेलों को लेकर अक्सर उत्साह से भरे रहने वाले पश्चिम बंगाल और खास कर कोलकाता के लिए ये एक बड़ी बात थी. यही वजह थी कि ड्यूटी पर मौजूद कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज के कुछ डॉक्टरों ने इस रात इकट्ठे डिनर करने के साथ-साथ नीरज चोपड़ा का मुकाबला साथ मिल कर लाइव देखने का फैसला किया.
सेमिनार हॉल में डिनर
इन्हीं में से एक थी वो ट्रेनी डॉक्टर, जिसे गुरुवार की रात को अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी के लिए बुलाया गया था. उसने रात को अपनी ड्यूटी पूरी की और अपने चार कलीग्स के साथ अस्पताल के सेमिनार हॉल में डिनर के लिए चली गई. डिनर के साथ-साथ उन्होंने इकट्ठे नीरज चोपड़ा का मुकाबला भी देखा. जिसके बाद उसके दोस्त तो वहां से निकल गए, लेकिन उस ट्रेनी डॉक्टर ने वहीं रुक कर थोड़ा सो लेने या फिर यूं कहें कि रात काट लेने का फैसला किया.
सेमिनार हॉल में ही सो रही थी डॉक्टर
असल में अस्पताल के इस सेमिनार हॉल का इस्तेमाल किसी सेमिनार या मीटिंग जैसी एक्टिविटीज के लिए कभी-कभार ही होता है. ऐसे में आम तौर पर अस्पताल के स्टाफ और डॉक्टर्स इस सेमिनार हॉल में अक्सर काम दौरान सुस्ताने, चेंज करने या फिर नाइट ड्यूटी में झपकी लेने जाते हैं. गुरुवार की रात को भी 31 साल की वो डॉक्टर उस सेमिनार हॉल में डिनर के बाद आराम कर रही थी और रात करीब तीन बजे तक उसे वहां सोते हुए देखा भी गया था.
9 अगस्त 2024, सुबह 6 बजे
अगले दिन यानी शुक्रवार की सुबह करीब छह बजे इस सेमिनार हॉल में अस्पताल के स्टाफ को जो कुछ दिखा, उसके बाद तो सिर्फ अस्पताल ही नहीं बल्कि पूरे कोलकाता में बवाल मच गया. सेमिनार हॉल में उसी ट्रेनी डॉक्टर की खून के सनी अर्धनग्न लाश पड़ी थी और लाश पर अनगिनत चोट के निशान थे. लाश को देख कर लगता था कि शायद उस ट्रेनी डॉक्टर के साथ चंद घंटे पहले ही ज्यादती की कोशिश हुई और इसी कोशिश में उसका क़त्ल भी कर दिया गया. ये यकीनन एक बड़ी बात थी. क्योंकि अस्पताल जैसी सुरक्षित जगह पर इमरजेंसी बिल्डिंग के अंदर सेमिनार हॉल में एक ट्रेनी डॉक्टर का क़त्ल हो गया और इस वारदात की कोई चीख या शोर तब तक किसी को सुनाई नहीं दी, जब तक अगली रोज़ सुबह उसकी लाश पर किसी की नज़र नहीं पड़ी.
डॉक्टर का कातिल कौन?
अब सवाल ये था कि आखिर ये कैसे हो सकता था? इस क़त्ल के पीछे कौन था? अस्पताल का ही कोई स्टाफ़, किसी मरीज़ का कोई तीमारदार, कोई बाहरी व्यक्ति या फिर कोई और? देखते ही देखते अस्पताल में अब इस क़त्ल को लेकर लोगों का गुस्सा भड़कने लगा. खास कर अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टर्स, ट्रेनी और मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स इस वारदात से खासे नाराज़ थे. ऐसे में खबर मिलने पर आनन-फानन में कोलकाता पुलिस मौका-ए-वारदात पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी गई. शुरुआत में सिवाय ट्रेनी डॉक्टर की खून से सनी लाश के अलावा पुलिस के पास इस केस का कोई और सुराग नहीं था.
सात-आठ लोगों से पूछताछ
बहरहाल, मामले की जांच के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गईं और हर टीम ने अपने तौर पर इनवेस्टिगेशन शुरू कर दिया. किसी टीम ने टेक्नीकल इनवेस्टिगेशन पर फोकस किया, किसी ने लोकल सोर्सेज़ के हवाले से उस अस्पताल अस्पताल आने जाने वाले संदिग्ध लोगों की पहचान शुरू की, तो किसी को मोबाइल फ़ोन से जुड़ी जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई. तफ्तीश में सबसे सेमिनार हॉल के इर्द गिर्द लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज ही थी. चूंकि क़त्ल का संभावित वक्त भी पुलिस को पता था, तो पुलिस ने इसी टाइम फ्रेम की सीसीटीवी फुटेज की जांच चालू की. और इस सिलसिले में पुलिस की रडार में कुल सात से आठ लोग आए, जिनसे पूछताछ चालू कर दी गई.
इनवेस्टिगेशन का शिकंजा
अस्पताल में पुलिस ने इन सभी के सभी लोगों से पूछताछ कर ये जानने समझने की कोशिश कर रही थी कि आखिर उस रात वो इमरेंजी बिल्डिंग में और खास कर सेमिनार हॉल के आस-पास क्या कर रहे थे? इनमें जिसका का भी जवाब संतोषजनक मिला, पुलिस उसे जांच के दायरे से बाहर करती गई, जबकि जिसका जवाब संदिग्ध लगा, उस पर इनवेस्टिगेशन का शिकंजा और कसता गया.
पुलिस के रडार पर आया संजय रॉय
इसी सिलसिले में 33 साल के संजय रॉय नाम के एक सिविक वॉलेंटियर का चेहरा भी पुलिस के सामने आया, जो अक्सर उस अस्पताल में आता-जाता था. इत्तेफाक से संजय भी उस रात सीसीटीवी कैमरे में अस्पताल में सेमिनार हॉल की तरफ जाता हुआ दिखा था. रॉय को पहले रात 11 बजे के आस-पास अस्पताल में देखा गया था, जिसके बाद वो बाहर निकल गया था. लेकिन इसके बाद उसे फिर से अलसुबह करीब 4 बजे अस्पताल के इमरजेंसी बिल्डिंग की तरफ जाता हुआ दिखा और करीब 40 मिनट बाद वहां से फिर बाहर निकल गया. पुलिस सूत्रों की मानें तो सीसीटीवी की उसकी तस्वीरों को देख कर ऐसा लग रहा था कि शायद वो शराब के नशे में है. वैसे भी जब संजय रॉय के बारे में पुलिस ने जानकारी जुटाने की शुरुआत की तो पता चला कि वो नशे आदी है और रोज़ाना शराब पीने की उसकी आदत रही है.
पुलिस को ऐसे मिला एक अहम सुराग
लेकिन इसी बीच तफ्तीश में लगी पुलिस के हाथ एक ऐसा सुराग़ लगा, जिसके बाद ये साफ हो गया कि एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ ज्यादती और कत्ल का मुल्जिम कोई और नहीं बल्कि संजय रॉय ही है, जिस पर शक की सुई घूम रही है. असल में पुलिस को मौका-ए-वारदात की छानबीन के दौरान एक टूटा हुआ नेकबैंड ब्लूटूथ ईयरफोन मिला था. शक था कि ये ईयरफोन इस वारदात में शामिल किसी आरोपी का हो सकता है. क्योंकि छानबीन में ये बात साफ हो चुकी थी कि वो ईयरफोन कम से कम पीड़ित लड़की का तो नहीं था, ऊपर से जिस तरह से वो ईयरफोन टूटा हुआ था, उसे देख कर लगता था कि शायद ट्रेनी डॉक्टर के साथ ज्यादती के दौरान ही वो टूट गया होगा.
नेकबैंड ब्लूटूथ ईयरफोन ने खोला राज
अब पुलिस ने इस पहलू को वेरीफाई करने के लिए एक बार फिर से सीसीटीवी फुटेज की जांच करने का फैसला किया. और इस बार पुलिस इस बात पर गौर करके हैरान रह गई कि सुबह 4 बजे जब संजय रॉय इमरजेंसी बिल्डिंग की तरफ जा रहा था, तब तो उसके गले में एक नेकबैंड ब्लूटूथ ईयरफोन मौजूद था, लेकिन जब 40 मिनट बाद वो बाहर निकला, तो वो ब्लूटूथ ईयरफोन उसके गले में नहीं था. यानी ये शक तकरीबन पुख्ता हो चला था कि वो ईयरफोन संजय का ही था, जो ज्यादती और क़त्ल के दौरान सेमिनार हॉल में ही गिर गया था.
मौके से मिला ईयरफोन
अब पुलिस ने संजय के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज से शॉर्ट लिस्ट किए गए तमाम लोगों के मोबाइल फोन के साथ उस ब्लूटूथ ईयरफोन की पेयरिंग यानी कनेक्शन चेक करने की कोशिश की. और ये देख कर चौंक गई कि वो ईयरफोन संजय के मोबाइल फोन के साथ ही पेयर्ड यानी कनेक्टेड मिला. यानी ये बात तकरीबन साफ हो गई कि वो ईयरफोन किसी और का नहीं बल्कि संजय रॉय का ही था.
संजय के फोन में अनगिनत पोर्न वीडियोज़
ये तो तफ्तीश का सिर्फ पहला मुकाम था, जब पुलिस ने संजय के मोबाइल फोन की जांच की, तो उसमें पुलिस को ऐसी-ऐसी चीज़ें नजर आईं कि खुद पुलिस वालों को भी शुरू में अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ. संजय का मोबाइल फोन अनगिनत पोर्न वीडियोज़ से भरा हुआ था. और पोर्न वीडियोज भी ऐसे-वैसे नहीं, बल्कि बेहद हिंसक और इंसानियत की तमाम हदों से परे..
संजय रॉय के बारे में चौंकानेवाला खुलासा
पुलिस सूत्रों की मानें तो ये इस बात का सबूत था कि संजय रॉय दिमागी तौर पर एक विकृत किस्म का शख्स था, जिसकी इस सच्चाई के बारे में कम ही लोगों को पता था. अब पुलिस ने संजय को हिरासत में लेने के साथ-साथ उसके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाने की शुरुआत कर दी. पता चला कि वो अक्सर रात को शराब पीकर पोर्न वीडियोज देखा करता है और अस्पताल में और उसके इर्द गिर्द मंडराता रहता है. छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि संजय रॉय की चार शादियां हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद वो अकेला ही रहता है. उसका मकान अस्पताल के पास ही है. असल में ऐसी ही अजीब और हिंसक मानसिकता के चलते उसकी तीन बीवियां उसे छोड़ कर जा चुकी हैं, जबकि चौथी बीवी की पिछले साल कैंसर के चलते मौत हो चुकी है.
नशे की हालत में ही पकड़ा गया संजय रॉय
संजय रॉय से जु़ड़ी इन जानकारियों के सामने आने और खास कर मोबाइल फोन का मौके पर मिले ब्लूटूथ डिवाइस से पेयर हो जाने पर पुलिस उसे हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की. सूत्रों की मानें तो शुक्रवार को जब पुलिस ने उसे पकड़ा तब भी वो नशे की हालत में ही था. शुरू में तो उसने पुलिस को बरगलाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सीसीटीवी फुटेज, ब्लूटूथ और उसके पास से मिले दूसरे कई सबूतों के चलते आखिरकार उसने इस वारदात को अंजाम देने की बात कबूल कर ली. पुलिस सूत्रों की मानें तो गुरुवार शुक्रवार की दरम्यानी रात को भोर में करीब 4 बजे उसने उस ट्रेनी डॉक्टर पर तब हमला किया, जब वो सेमिनार हॉल में सो रही थी. पहले उसके साथ ज्यादती करने की कोशिश की और फिर विरोध करने पर गला घोंट कर उसकी जान ले ली.
सबूत मिटाने की कोशिश
पुलिस सूत्रों की मानें तो संजय ने इस वारदात के बाद मौका-ए-वारदात पर बिखरे खून के धब्बों को धोने की भी कोशिश की. वारदात के बाद वो घर गया उसने अपने कपड़े भी धो दिए. लेकिन उसके साथ एक चीज ऐसी थी, जिससे वो खून के धब्बे साफ कर भूल गया और वो थे उसके जूते. पुलिस ने जब उसे गिरफ्तार किया, तो उसके गीले कपड़ों के साथ-साथ खून से सने जूते भी बरामद कर लिए.
निर्भया कांड से तुलना
कोलकाता पुलिस ने अंदेशा जताया है कि इस वारदात में संजय रॉय के साथ कोई और भी शामिल हो सकता है. पुलिस उस एंगल से भी मामले की छानबीन कर रही है. असल में सेमिनार हॉल से बरामद ट्रेनी डॉक्टर की लाश पर मौजूद बर्बरता के निशान देख कर पुलिस वालों को भी जोर का झटका लगा था. लाश की हालत ऐसी थी, जिसे देख कर लोग इसकी तुलना दिल्ली के निर्भया कांड से करने लगे.
जख्मों से भरा था डॉक्टर का जिस्म
वैसे तो ट्रेनी डॉक्टर की हत्या गला घोंट कर ही की गई थी, लेकिन उसके पूरे शरीर पर चोट के अनगिनत निशान थे. खास कर चेहरे पर कई चोट थे और आंखों से खून आ रहा था. पूरे शरीर पर नोचने खसोटने के निशान थे और प्राइवेट पार्ट भी बुरी तरह जख्मी था. इसके अलावा होठों पर, पेट के निचले हिस्से और दांये हाथ पर भी चोट के निशान थे, ऊंगलियां टूटी हुई थी और एक कॉलर बोन यानी कंधे की हड्डी में भी फ्रैक्चर था. पुलिस ने शुक्रवार को ही लाश बरामद करने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था.
खुद को फांसी पर लटका दिए जाने की मांग
पोस्टमार्टम की रिपोर्ट अब सामने आ गई है. रिपोर्ट में क़त्ल से पहले लड़की के साथ यौन उत्पीड़न किए जाने के सबूत मिले हैं. इसके अलावा उसके जिस्म पर मौजूद चोट भी एंटी मॉर्टम किस्म के हैं, यानी क़त्ल से पहले उस पर अत्याचार किए जाने की बात भी साफ हुई है. मौत का तरीका गला घोंटने और सांस रोकने को बताया गया है. पुलिस की मानें तो शुरुआती छानबीन में आरोपी ने जुर्म की बात कबूल कर ली है. और पूछताछ में पुलिस से कई बार ये कहा है कि वो अपने किए की सज़ा चाहता है, उसे फांसी पर लटका दिया जाए.
DNA और फोरेंसिक जांच
फिलहाल पुलिस छानबीन कर ये भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं ट्रेनी डॉक्टर के साथ ज्यादती करने में अकेला संजय रॉय नाम कि सिविक वॉलेंटियर ही शामिल था या फिर क़त्ल में कोई और भी उसके साथ था. फिलहाल फॉरेंसिक एक्सपर्टस इस बात की तह तक जाने के लिए डीएनए एग्जामिनेशन का सहारा लेने वाले हैं. वो डीएनए के ज़रिए ये पता लगाने की कोशिश करेंगे कि लाश पर सिर्फ किसी एक ही व्यक्ति का सीमेन मौजूद है या फिर एक से ज्यादा का? और सबसे अहम ये कि वो सीमेन आरोपी संजय रॉय का ही है या फिर किसी और का? पुलिस ने आरोपी के कपड़े, जूते, मोबाइल फोन वगैरह को भी फॉरेंसिक जांच के लिए भिजवाया है. ताकि कपड़े और जूतों से मिले खून के धब्बों की जांच की जा सके और उसकी भी डीएनए जांच हो, जबकि मोबाइल फोन से पुलिस उसकी लोकेशन के साथ-साथ उसमें स्टोर डेटा का डिटेल भी निकवालने की कोशिश कर रही है.
परिवार की इकलौती संतान थी मृतका
इस वारदात का शिकार बनी लड़की एक सामान्य परिवार से आती है. उसका घर उत्तर चौबीस परगना जिले में है. उसके पिता स्कूल ड्रेस का छोटा-मोटा बिजनेस करते हैं. कभी वो स्कूल ड्रेस की सप्लाई का काम करते थे और तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी को मेडिकल की पढ़ाई करवाई. लेकिन अब इस वारदात ने उन्हें तोड़ कर रख दिया है. पीड़ित लड़की अपने परिवार की इकलौती संतान थी.
शराब और पोर्न देखने की खतरनाक लत
उधर, मामले का आरोपी सिविक वॉलेंटियर पुलिस के लिए काम करता था. चूंकि उसकी पोस्टिंग पास की चौकी में ही थी, इसलिए वो अस्पताल में बेधड़क आता जाता था और अस्पताल में होने के चलते वो एक बिचौलिये के तौर पर लोगों को वहां इलाज में मदद पहुंचा कर बदले में कमाई करता था. लेकिन उसे शराब और पोर्न देखने की खतरनाक लत थी.
(नॉर्थ 24 परगना से दीपक देबनाथ और कोलकाता से सूर्यग्नि रॉय और ऋत्तिक मंडल के साथ राजेश साहा का इनपुट)