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अस्पताल के नीचे हिज्बुल्लाह ने इसलिए बनाया था बंकर, खजाने की बरामदगी के बाद हुआ बड़ा खुलासा

बेरूत के दाहिया इलाके में इजरायल ने बम बरसाए थे और वहीं बंकर में छुपे हसन नसरल्लाह की मौत हुई थी. दरअसल, दाहिया का ये एक रिहायशी इलाका है. इस इलाके में एक अस्पताल है. इस अस्पताल का नाम है अल-सहल अस्पताल. इस अस्पताल के एक हिस्से के नीचे ही एक बंकर बनाया गया था.

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 लेबनान के इसी अस्पताल के नीचे एक बंकर मिला है
लेबनान के इसी अस्पताल के नीचे एक बंकर मिला है

पिछले महीने यानी सितंबर में लेबनान की राजधानी बेरूत में हिज्बुल्लाह के चीफ हसन नसरल्लाह की मौत हो गई. हसन नसरल्लाह जिस बंकर में पनाह लिए हुए था, उस बंकर पर इजरायली फाइटर जेट ने बमबारी की थी. अब हसन की मौत के करीब तीन हफ्ते बाद इजरायली एयर फोर्स ने एक वीडियो जारी किया है. इस वीडियों में हसन नसरल्लाह के बंकर के बराबर में एक अस्पताल के ठीक नीचे जमीन में एक ऐसे खजाने को दिखाया गया है, जिसे देखकर पूरी दुनिया दंग है. और इस खजाने को लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है. क्या है इस खजाने की हकीकत? चलिए जान लेते हैं.   
  
28 सितंबर 2024, दोपहर 1.30 बजे, देहिय - लेबनान
यही वो तारीख और वक्त था जब इजरायली एयरफोर्स ने अपने फाइटर जेट से लेबनान की राजधानी बेरूत की दाहिया इलाके की एक खास बिल्डिंग और बिल्डिंग के नीचे बने बंकर पर बम बरसाया था. इजरायली एयरफोर्स को अब तक यही खबर थी कि इस बिल्डिंग और बंकर के नीचे हिज्बुल्लाह के कुछ लोग मौजूद हैं. लेकिन इसके बाद बंकर के अंदर से जो खबर बाहर आई उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया था. दरअसल, इस हवाई हमले में हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह की भी मौत हो गई थी.

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18 वर्षों में कभी सामने नहीं आया था हसन नसरल्लाह 
हसन नसरल्लाह की मौत खुद इजरायल के लिए भी हैरान करने वाली थी. वजह ये थी कि पिछले 18 सालों से नसरल्लाह कभी दुनिया के सामने आया ही नहीं था. सार्वजनिक तौर पर नसरल्लाह को आखिरी बार 18 साल पहले देखा गया था. ये वो नसरल्लाह था, जिसने इन 18 सालों में कभी भी एक रात किसी एक जगह पर नही गुजारी थी. ऐसे में हसन नसरल्लाह के इस खुफिया ठिकाने की जानकारी इजरायल को कैसे लगी? अगर खबरों की माने तो शायद नसरल्लाह के ठिकाने की जानकारी किसी और ने नही बल्कि खुद ईरानी कुर्द फोर्स के चीफ इस्माइल कानी ने दी थी. और कानी के बारे में खबर यही है कि वो पिछले करीब 3 हफ्तों से तेहरान में ही नजरबंद हैं.

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अस्पताल के नीचे बना रखे थे बंकर
बेरूत के दाहिया इलाके में इजरायल ने बम बरसाए थे और वहीं बंकर में छुपे हसन नसरल्लाह की मौत हुई थी. दरअसल, दाहिया का ये एक रिहायशी इलाका है. इस इलाके में एक अस्पताल है. इस अस्पताल का नाम है अल-सहल अस्पताल. इस अस्पताल के एक हिस्से के नीचे ही एक बंकर बनाया गया था. लेकिन इस बंकर का रास्ता अस्पताल से होकर नही जाता. अस्पताल के इर्द गिर्द बहुत सारे घर हैं. इन्ही के बीच 6 घरों को मिलाकर एक बड़ा सा रिहायशी कपांउड है. उसी कंपाउड के नीचे हिज्बुल्लाह चीफ ने कुछ बंकर बना रखे थे. जिनमें वो छुपा करता था. ऐसा ही एक बंकर जमीन के अंदर अंदर ठीक अस्पताल के नीचे भी बनाया गया था. लेकिन अस्पताल के नीचे बने इस बंकर में हसन नसरल्लाह या उसके बाकी कमांडर छुपते नहीं थे. बल्कि इस बंकर का इस्तेमाल वो उन पैसों को रखने के लिए किया करते थे, जिन्हें इजरायल के खिलाफ ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जाना था.

बंकर में मिले 50 करोड़ डॉलर और खजाना
इजरायली डिफेंस फोर्स यानि आईडीएफ के प्रवक्ता रियर एडमिरल डेनियल हगारी ने मीडिया से बात करते हुए एक सनसनीखेज खुलासा किया. ना सिर्फ खुलासा किया है बल्कि एक वीडियो और कुछ ग्राफिक्स भी जारी किए. हगारी के मुताबिक हिज्बुल्लाह ने ठीक उस अस्पताल के नीचे बने बंकर में लगभग 50 करोड़ डॉलर यानि अगर भारतीय करेंसी में देखें तो करीब 42 अरब और 4 करोड़ रुपये का सोना और कई मिलियन डॉलर कैश रखे हुए थे.

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बंकर में था हिज्बुल्लाह का फाइनेंशियल हेडक्वार्टर!
इजरायली डिफेंस फोर्स की तरफ से जारी तस्वीरों के मुताबिक बीच में अल-सहल हॉस्पिटल है. इस हॉस्पिटल के दो एंट्री और एग्जिट पॉइंट हैं. हॉस्पिटल के आगे और पीछे दो बिल्डिंग हैं. एक है अल-अहमदी बिल्डिंग और दूसरी तरफ है सेंटर अल-सहल बिल्डिंग. इन्हीं दो बिल्डिंगो के नीचे बंकर बनाए गए थे और उस बंकर का एक हिस्सा ठीक उस अस्पताल के नीचे था. अस्पताल के नीचे के उसी बंकर का इस्तेमाल हिज्बुल्लाह अपनी दौलत रखने के लिए किया करता था. यानि एक तरह से ये हिज्बुल्लाह का फाइनेंशियल हेडक्वार्टर था.

बंकर के आधे हिस्से में मौजूद थे डॉलर और सोना
इस बंकर के अंदर कई कमरे बने थे. कमरों में बिस्तर भी थे. यानि यहां किसी के लंबे वक्त तक ठहरने का पूरा इंतजाम था. इतना ही नहीं इस बंकर में वो सारे हथियार भी थे जिससे हिज्बुल्लाह अपने दुश्मनों से मुकाबला कर सकता था. या उन पर पलटवार कर सकता था. इसी बंकर के अंदर एक हिस्से में करीब आधे अरब से ज्यादा के कीमत के गोल्ड और डॉलर रखे थे. जिस जगह सोना और पैसे रखे गए थे, वो जगह अस्पताल के ठीक नीचे है. यानि इस जगह को सोच समझ कर बनाया गया था. हिज्बुल्लाह को यकीन था की इजरायल कभी अस्पताल पर बम नही बरसाएगा. इसलिए ये बंकर और बंकर में रखे पैसे हमेशा महफूज़ रहेंगे.

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हिज्बुल्लाह को ऐसे मिलती थी आर्थिक मदद
सवाल ये है कि हिज्बुल्लाह के पास इतने पैसे कहा से आए? तो इजरायली डिफेंस फोर्स के मुताबिक हिज्बुल्लाह के फाइनेंस के दो तरीके हैं. पहला लेबनान के अंदर अल कादिल हसन एसोसिएशन लेबनानी लोगों से चंदा लेकर या नौकरी पेशा लोगों से कुछ हिस्सा लेकर हिज्बुल्लाह की मदद करता है. दूसरा आर्थिक तौर पर हिज्बुल्लाह की सबसे ज्यादा मदद ईरान करता है. आईडीएफ के मुताबिक बेरूत में मौजूद ईरानी दूतावास में ईरानी कुर्द फोर्स बैग भर भर कर पैसे और सोना पहुंचाते हैं. विमान के जरिए बेरूत पहुंचने वाले ये पैसे हिज्बुल्लाह को दिए जाते हैं.

फैक्ट्रियां भी चलाते थे हिज्बुल्लाह के लोग
आईडीएफ के मुताबिक इन दो जरियों के अलावा हिज्बुल्लाह के कमाई का एक और भी स्रोत है. हिज्बुल्लाह ने लेबनान, यमन, सीरिया और टर्की में कई फैक्ट्रियां लगा रखी हैं. इनकी आमदनी का हिस्सा भी हिज्बुल्लाह के खाते में जाता है. हिज्बुल्लाह की यूनिट 4004 इन तमाम फैक्ट्रियों का हिसाब किताब रखती है.

लेबनान के काम आएगा ये खजाना
अब सवाल ये है कि अल-सहल अस्पताल के नीचे बने इस बंकर के अंदर करीब आधे अरब का जो सोना और कैश है क्या वो इजरायली डिफेंस फोर्स अपने साथ ले गई. तो आईडीएफ के मुताबिक ऐसा नहीं है. ये सारा पैसा अब भी उसी अस्पताल के नीचे उस बंकर में मौजूद है. आईडीएफ ने कहा है कि खस्ता माली हालत से जूझ रहे लेबनान की सरकार इन पैसों का लोगों की भलाई के लिए इस्तेमाल कर सकती है. आईडीएफ ने ये भी कहा है कि वो अल-सहल अस्पताल को अपना निशाना नहीं बनाएगी. हालाकि आईडीएफ ने ये भी साफ किया कि इस अस्पताल पर सैटेलाइट के जरिए लगातार उसकी नजर बनी हुई है. इतना ही नहीं सबूत के तौर पर आईडीएफ ने सैटेलाइट से मॉनिटर किए जाने वाले अस्पताल की तमाम गतिविधियों की तस्वीरें भी पेश की.

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लेबनान के नागरिकों से नहीं इजरायल की लड़ाई 
हालाकि इसके साथ ही आईडीएफ ने लेबनान समेत इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन को ये धमकी भी दी है कि इन पैसों का इस्तेमाल हरगिज हिज्बुल्लहा को करने ना दिया जाए. क्योंकि उनकी नजर हर वक्त अस्पताल के बिल्डिंग पर है. आईडीएफ प्रवक्ता ने ये भी कहा की इजरायल की लड़ाई लेबनान के नागरिकों से नहीं बल्कि हिज्बुल्लाह से है. हालाकि इजरायली डिफेंस फोर्स की इस धमकी के बावजूद अस्पताल के बंकर के नीचे रखी दौलत का इस्तेमाल लेबनान सरकार कर पाएगी इसकी उम्मीद कम है. 

लेबनान में दो-दो सरकारें!
इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि दक्षिणी बेरुत के जिस दाहिया इलाके में ये अस्पताल है ये पूरा इलाका हिज्बुल्लाह के कब्जे वाला है. असल में लेबनान की राजधानी बेरूत में एक साथ दो-दो सरकारें चलती हैं. इनमें से एक लेबनान की चुनी हुई सरकार है. जिसकी अगुवाई प्रधानमंत्री नजीब मिकाती कर रहे हैं. जबकि दूसरी तऱफ दाहिया का ये इलाका पूरी तरह से हिज्बुल्लाह के कब्जे में है. यहां लेबनानी सरकार, पुलिस या फौज किसी की नहीं चलती.

मरुन अल-रस में हिज्बुल्लाह का कब्जा
लेबनान में आखिरी बार मई 2022 में चुनाव हुआ था. लेबनान संसद में कुल 128 सीटें हैं. लेकिन किसी को भी बहुमत नहीं मिला. लेबनान के राष्ट्रपति का पद 2022 से खाली है. वहां के प्रधानमंत्री भी केयरटेकर हैं. लेबनान की राजधानी बेरूत के जो दो टुकड़े हुए उनमें से ही एक है मरुन अल-रस. बेरूत का ये वो इलाक़ा है जहां पर लेबनान सरकार का नहीं बल्कि हिज्बुल्लाह का कब्जा है. और बेरूत के अपने इसी कब्जे वाले इलाके में हिज्बुल्लाह का हेडक्वार्टर भी है. 

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इजरायली हमले पर अरब देश खामोश
हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह की जिस बंकर में मौत हुई थी, वो पूरा इलाक़ा भी हिज्बुल्लाह के कब्जे में है. लेबनान के जिस इलाके में इजरायली सेना इस वक्त जमीनी जंग लड़ रही है, वो इलाका भी हिज्बुल्लाह के कब्जे वाला इलाका है. बस यही वजह है कि लेबनान पर इजरायली हमले को लेकर अरब देश खुल कर नहीं बोल रहे. क्योंकि उनकी नजर में इजरायल का ये हमला लेबनान या लेबनान के लोगों पर नहीं बल्कि हिज्बुल्लाह के कब्जे वाले लेबनान पर है.

(साथ में मनीषा झा का इनपुट)

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