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मोबाइल फोन, एक मैसेज और कोड की पहेली... पुलिस ने ऐसे बेनकाब की ये मर्डर मिस्ट्री, लोग रह गए हैरान

सर्च ऑपरेशन में जुटे तमाम लोगों को यही पता नहीं था कि ये कोड यानी L01-501 है क्या चीज़? किसके लिए ये कोड था? इस कोड से जुड़ी क्या चीज़ हो सकती थी? इसका जवाब किसी के पास नहीं था. फिर ठीक एक हफ़्ते बाद 16 जनवरी को अचानक कोड की पहेली सुलझ गई.

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पुलिस ने एक कोड की मदद से इस मामले का खुलासा किया है
पुलिस ने एक कोड की मदद से इस मामले का खुलासा किया है

महाराष्ट्र के नवी मुंबई में रहने वाली एक छात्रा अचानक गायब हो जाती है. पुलिस उसे तलाश करने की तमाम कोशिशें करती है, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिलता. लड़की की गुमशुदगी के करीब 3 हफ्ते बाद पुलिस को एक मोबाइल फोन मिलता है. उस मोबाइल में एक मैसेज था. और उस मैसेज में था एक कोड. जो पुलिस के लिए एक पहेली था. असल में उसी कोड में उस लड़की की गुमशुदगी का राज छुपा था. कोड जैसे ही डिकोड हुआ तो एक सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ. जिसने सबको हैरान कर दिया.

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जंगल में सर्च ऑपरेशन
नवी मुंबई में मौजूद खारघर इलाके में एक घना जंगल है. उस जंगल में एक सर्च ऑपरेशन चलाया गया. जिसमें नवी मुंबई पुलिस, फायर ब्रिगेड, सिडको, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट और सामाजिक कार्यकर्ताओं की टीम एक खास कोड की तलाश कर रही थी. एक ऐसा कोड, जिसमें एक लाश का पता छुपा था. एक ऐसी लाश, जो महीने भर से गायब थी. उस लाश को ढूंढने का बस एक ही सुराग था और वो था वो कोड. इस कोड का नाम था L01-501.

नहीं सुलझ रही थी पहेली
8 जनवरी से ये सर्च ऑपरेशन या यूं कहें कि उस कोड की तलाश शुरू हुई थी. हर रोज़ पुलिस समेत तमाम डिपार्टमेंट के लोग सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक उस कोड की तलाश में जंगल की खाक छान रहे थे. 14 जनवरी तक अलग-अलग विभाग के दर्जनों लोग रोज़ाना 12 घंटे जंगल में आते और उस कोड को ढूंढते और फिर लौट जाते. पर कोड की पहेली नहीं सुलझती. 

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16 जनवरी को हुआ कोड का खुलासा
दरअसल, तब तक सर्च ऑपरेशन में जुटे तमाम लोगों को यही पता नहीं था कि ये कोड यानी L01-501 है क्या चीज़? किसके लिए ये कोड था? इस कोड से जुड़ी क्या चीज़ हो सकती थी? इसका जवाब किसी के पास नहीं था. फिर ठीक एक हफ़्ते बाद 16 जनवरी को अचानक कोड की पहेली सुलझ गई. इधर पहेली सुलझी और उधर, एक लाश सामने आ गई.

क्यों रची गई कोड की पहेली?
पर सवाल ये था कि एक कोड में एक लाश का पता कैसे छुपा था? लाश गायब थी, तो कोड कहां से मिला? इस कोड को लिखने वाला कौन था? कोड से बरामद वो लाश किसकी थी? कोड लिखने वाला और लाश के बीच में क्या रिश्ता था? और आखिर कोड लिखने वाले ने ऐसा अजीब कोड क्यों लिखा था? इस कोड में आखिर ऐसी कौन सी पहेली छुपी थी? 

12 दिसंबर को लापता हो गई थी वैष्णवी
तो इन सारे सवालों के जवाब जानने के लिए एक महीने पहले यानी पिछले साल 12 दिसंबर की तारीख में लौटना होगा. नवी मुंबई के कलंबोली इलाके में रहने वाली 19 साल की वैष्णवी मनोहर बाबर सुबह दस बजे कॉलेज जाने के लिए घर से निकली थी. वैष्णवी सायन में एसआईईएस कॉलेज से कॉमर्स में ग्रैजुएशन कर रही थी. वो फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट थी. लेकिन कॉलेज जाने के बाद जब वो देर शाम तक घर नहीं लौटी, तो घर वालों को फिक्र हुई. कॉलेज के उसके दोस्तों और बाकी लोगों से पूछताछ करने के बाद घरवालों ने कलंबोली पुलिस स्टेशन में वैष्णवी की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखा दी. पुलिस ने वैष्णवी की तलाश शुरू कर दी, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला.

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रेलवे ट्रैक पर मिली थी लड़के की लाश
उधर, ठीक 12 दिसंबर की शाम को ही जुई नगर रेलवे स्टेशन के करीब लगभग 24-25 साल के एक लड़के की रेलवे ट्रैक पर लाश मिलती है. रेलवे पुलिस मामला दर्ज कर लाश को मुर्दा घर भेज देती है. फिर बाद में परिवार का पता कर परिवार को लाश सौंप दिया जाता है. रेलवे पुलिस के मुताबिक मामला खुदकुशी का था. लाश के साथ रेलवे पुलिस को एक मोबाइल भी मिला था. वो मोबाइल रेलवे पुलिस ने केस प्रॉपर्टी मानते हुए मालखाने में रख दिया था. क्योंकि मामला खुदकुशी का था.

जांच के लिए स्पेशल टीम बनाने का ऐलान 
इधर, दिन पर दिन बीतते जा रहे थे पर वैष्णवी का कोई सुराग़ नहीं मिल रहा था. परिवार वाले पुलिस से भी खफा थे. उन्हें लगता था कि पुलिस ढंग से केस की तफ्तीश नहीं कर रही. गुजरते दिनों के साथ नवी मुंबई पुलिस पर वैष्णवी को तलाशने का दबाव बढ़ता जा रहा था. आखिरकार 6 जनवरी को नवी मुंबई के पुलिस कमिश्नर मिलिंद भ्रांबे ने वैष्णवी को ढूंढने के लिए एक स्पेशल टीम बनाने का ऐलान किया. 

खारघर में ट्रैन से उतरी थी वैष्णवी
नवी मुंबई क्राइम ब्रांच के डीसीपी अमित काले को इसकी कमान सौंपी गई. इस टीम के साथ एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को भी वैष्णवी की तलाश की मुहिम में शामिल कर लिया गया. कायदे से वैष्णवी की गुमशुदगी के करीब 3 हफ्ते बाद अब पहली बार पुलिस पूरी गंभीरता से उसे तलाश रही थी. टीम ने सबसे पहले तमाम सीसीटीवी फुटेज खंगाले. साथ ही वैष्णवी के कॉल डिटेल में भी अपने झांकने का फैसला किया. 12 दिसंबर की एक सीसीटीवी कैमरे में वैष्णवी कॉलेज से घर लौटने के लिए जीटीबी नगर रेलवे स्टेशन से एक ट्रेन में चढ़ती नजर आई थी. बाद में एक दूसरे कैमरे ने ये दिखाया कि वो ट्रेन से खारघर उतर गई थी.

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दूसरी CCTV फुटेज में एक लड़के साथ थी वैष्णवी
खारघर के बाद एक और कैमरे में भी वैष्णवी नजर आई. पर इस बारे उसके साथ एक लड़का था. दोनों खारघर के ओ कैंप जंगल की तरफ जाते हुए दिखे. पुलिस को हैरत तब हुई, जब उसी कैमरे ने कुछ देर बाद ओ कैंप से उस लड़के को लौटते हुए तो दिखाया, लेकिन वैष्णवी उसके साथ नहीं थी. अब यहीं से पहली बार पुलिस को उस लड़के पर शक हुआ. सबसे पहले पुलिस ने अब वैष्णवी के मोबाइल के 12 दिसंबर के कॉल डेटा को देखना शुरू किया. खास कर शाम में उस वक्त के जब वो जंगल की तरफ उस लड़के के साथ जा रही थी. कॉलेज से जंगल जाते वक्त वैष्णवी के मोबाइल पर सिर्फ एक कॉल आई थी. 

CDR से खुला वैभव का राज, केस उलझा
अब उस कॉल को जब पुलिस ने खंगालना शुरू किया, तो पता चला कि इस नंबर से वैष्णवी को पहले भी बहुत कॉल किए गए थे. सीडीआर से पता चला कि आखिरी वक्त में जो लड़का वैष्णवी के साथ था, उसका नाम वैभव बुरुंगले है. मोबाइल नंबर के जरिए अब पुलिस की टीम वैभव के घर का पता निकालती है और सीधे उसके घर पर पहुंच जाती है. लेकिन घर पहुंचते ही केस सुलझने की बजाय और उलझ जाता है. वैभव के घरवाले बताते हैं कि 12 दिसंबर को ही उसकी मौत हो चुकी है. उन लोगों ने अपने हाथों से उसका अंतिम संस्कार किया है. वो ये भी बताते हैं कि वैभल ने जुई नगर रेलवे स्टेशन के करीब ट्रेन के आगे कूद कर खुदकुशी की थी.

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वैष्णवी के घर पहुंची थी पुलिस
अब इस नए खुलासे के साथ पुलिस की स्पेशल टीम वैष्णवी के घर पहुंचती है. वहां घरवालों से वैभव के बारे में पूछताछ करती है. तब एक और कहानी सामने आती है. घरवालों के मुताबिक कुछ वक्त पहले तक वैष्णवी और वैभव एक दूसरे से प्यार करते थे. इन दोनों के अफेयर की खबर वैष्णवी के घरवालों को लग गई. वैष्णवी ग्रैजुएशन कर रही थी. जबकि वैभव 12वीं करने के बाद जॉब कर रहा था. दोनों की कास्ट भी अलग-अलग थे. ऐसे में शादी हो नहीं सकती थी. 

वैष्णवी की बेरुखी से परेशान था वैभव
लिहाजा, वैष्णवी के घरवालों ने वैभव से दूरी बनाने को कहा. इसी के बाद वैष्णवी ने अपनी जिंदगी के साथ-साथ सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर भी वैभव को ब्लॉक कर दिया. वैष्णवी की इस बेरुखी से अब वैभव परेशान हो गया. उसे शक हुआ कि वैष्णवी उसे छोड़ कर अब किसी और लड़के को डेट कर रही है. हालांकि उसे सच्चाई पता नहीं थी. इन दोनों के अफयेर की कहानी सुनने के बाद अब पुलिस को रेलवे पुलिस की याद आती है. वैभव की मौत की कहानी जानने के लिए अब नवी मुंबई की स्पेशल पुलिस टीम जीआरपी यानी रेलवे पुलिस के पास पहुंचती है.

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मोबाइल से मिला था मैसेज और कोड
रेलवे पुलिस में दर्ज रिपोर्ट में यही लिखा था कि वैभव ने 12 दिसंबर की शाम एक ट्रेन से आगे कूद कर खुदकुशी कर ली है. नवी मुंबई पुलिस वैष्णवी के केस की जानकारी देते हुए रेलवे पुलिस से वैभव के जब्त सामान को अपने कब्जे में ले लेती है. इसमें वैभव का एक मोबाइल भी था. अब पुलिस एक्सपर्ट के जरिए मोबाइल को ऑनलॉक करती है. मोबाइल ऑनलॉक होते ही जिस पहले मैसेज पर पुलिस की नजर पड़ती है, वो ये था- मैंने वैष्णवी की हत्या कर दी है. उसकी लाश खारघर के ओ कैंप के पास पड़ी है. कोड है -- L01-501

कोड को डि-कोड नहीं कर पाए थे एक्सपर्ट
मैसेज पढ़ते ही नवी मुंबई पुलिस को लगा कि केस पूरी तरह सुलझ गया. खारघर के जंगल से अब वो लाश भी ढूंढ लेंगे. फौरन कुछ टीमें जंगल भेजी गई. लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद लाश नहीं मिली. अब जंगल में यूं ही भटकने की बजाय पुलिस ने ये सोचना शुरू किया कि आखिर लाश के पते के साथ ये कोड क्या हो सकता है? शुरुआत में गूगल और बाकी एक्सपर्ट्स के जरिए पुलिस ने इस कोड को डि-कोड करने की पूरी कोशिश की. लेकिन पहेली सुलझ ही नहीं पाई. 

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पुलिस ने ली फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की मदद
15 जनवरी तक बिना इस पहेली को सुलझाए सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक अलग-अलग विभाग की तमाम टीमें जंगल की खाक छानती रही. पूरा हफ्ता बीत जाने पर भी जब कोई कामयाबी नहीं मिली, जब कहीं से कोड डि-कोड नहीं हो पाया. तब 16 जनवरी को नवी मुंबई की स्पेशल टीम ने खारघर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से इस कोड को शेयर किया. और पूछा कि ये क्या हो सकता है? 

वन विभाग ने किया कोड का खुलासा
फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने जैसे ही कोड सुना, पहेली सुलझ गई. अब फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की अगुवाई में पुलिस की टीम फिर से जंगल में पहुंची. और फिर वन विभाग के एक कर्मचारी के इशारे पर एक पेड़ के पास रुक गई. आस-पास की अब तलाशी ली गई. महीने भर से गायब वैष्णवी की लाश उसी पेड़ के करीब से बरामद हो गई. केस अब सुलझ चुका था.

जंगल में लगे पेड़ का कोड था L01-501
अब आप कहेंगे कि तमाम जहीन दिमाग जिस L01-501 कोड को नहीं सुलझा पाई, उसे फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने चुटकी में कैसे सुलझा दिया? दरअसल ये कोड खारघर के जंगलों में एक पेड़ का नंबर था. वन विभाग हर जंगल में पेड़ों की गिनती करने के लिए उन्हें एक नंबर देता है. ये नंबर भी एक पेड़ का था और इसी पेड़ के पास वैभव ने वैष्णवी की लाश फेंकी थी. 12 दिसंबर को जंगल में लाने के बाद उसने वैष्णवी की गला घोंट कर हत्या की थी. क्योंकि उसे शक था कि वैष्णवी अब किसी और लड़के से प्यार करती है. जबकि वो वैष्णवी से शादी करना चाहता था.

सुसाइड से पहले वैभव ने लिखा था मैसेज
वैष्णवी का कत्ल करने के बाद वैभव जंगल से निकल कर सीधे जुई नगर रेलवे स्टेशन के करीब गया था और सामने से आ रही एक ट्रेन के आगे कूद गया था. उसने ट्रेन के आगे कूदने से पहले अपने मोबाइल फोन पर एक मैसेज और एक कोड टाइप करके छोड़ा था.

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