दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 की रात एक बस की पिछली सीट पर जो कुछ हुआ था. उसने पहली बार बलात्कार जैसे संगीन मुद्दे पर देश को झकझोरा था. ये ऐसा दर्दनाक केस था जब जनता, सरकार और कानून बनाने वाले सभी रो पड़े थे. उसके बाद दावों और वादों का एक लंबा सिलसिला शुरू हुआ. कानून का खौफ बढ़ाकर सूरत बदलने का भरोसा तक दिलाया गया. मगर अफसोस उसके बाद बस वक्त ही बीता है बाकी कुछ भी नहीं. वर्ना 16 दिसंबर जैसी वारदात पंजाब के मोगा में फिर सामने न आती.
तारीख अलग, जगह अलग, चेहरे अलग पर हैवानियत भरी वारदात का किस्सा करीब करीब वही. यानी दिल्ली का 16 दिसंबर पंजाब के मोगा में दोहराया तो गया लेकिन सूरत और किरदार दोनों बदल गए. अंधेरा 16 दिसंबर को भी था और अंधेरा 29 अप्रैल की वारदात के वक्त भी छा चुका था. 16 दिसंबर की वारदात में बस दिल्ली में घूम रही थी और बस पर सवार हैवान दरिंदगी की इंतेहा कर रहे थे. जबकि 29 अप्रैल की वारदात में बस एक शहर से दूसरे शहर के रास्ते पर थी दरिंदे इस बस पर भी सवार थे.
16 दिसंबर की कहानी सुन कर उस वक्त देश उबल पड़ा था और 29 अप्रैल की इस हैवानियत की ये ऐसी कहानी है जिसे सुनाकर रौंगटे खड़े हो जाएंगे. ये कहानी भी उससे ज्यादा जुदा नहीं है. लेकिन 16 दिसंबर और 29 अप्रैल की वारदात में बस गौर करने वाला फर्क उसी बस का है जिस पर हैवानियत सवार थी. मुसाफिर की शक्ल में कुछ दरिंदे मौजूद थे बाकी बस खाली थी.
16 दिसंबर वाली बस तो एक मामूली ट्रांसपोर्टर की थी लेकिन मोगा वाली बस का रिश्ता सीधा उन लोगों से जाकर जुड़ जाता है जिनके हाथों में पूरे पंजाब की सरकार को चलाने की स्टियरिंग है. इस बस में सवार हुई मां बेटी और बेटे के साथ चलती हुई बस में हैवानियत का खेल खेलने की कोशिश की जाती है लेकिन जब दरिंदों के मंसूबे पूरे नहीं हो पाते तो फिर वो जिस दरिंदगी पर उतारू होते हैं उसे सुन कर आप एक बार फिर सिहर उठेंगे.
मुश्किल हो जाएगा आपके लिए इस बात पर यकीन करना कि इस दुनिया में ऐसे भी लोग हैं, जो अपनी मौज मस्ती की खातिर कब इंसान से जानवर बन जाते हैं, अंदाजा भी नहीं मिल पाता और वो लोग मिलकर ऐसी किसी की भी इज्जत पर हाथ डालने को तैयार हो जाते हैं. फिर चाहे वो बच्ची ही क्यों न हो. सच कहें तो पूरा किस्सा ऐसे सुनाना मुश्किल हो जाता है. शब्द गूंगे हो जाते हैं आंखों में गुस्से के आंसू आ जाते हैं. सोचिए उन्होंने तो किया है.
कहने को तो इस वारदात की शुरुआत पंजाब के मोगा इलाके से हुई, जहां बुधवार की शाम एक लड़की अपनी मां और भाई के साथ इसी बस पर सवार होती है. बस पर पहले से ही सवार कुछ लड़के उसके साथ छेड़खानी करने पर उतारू हो जाते हैं. और जब लड़की और उसकी मां उन शैतानों का विरोध करती है तो बस के वो वहशी 13 साल की उस लड़की और उसकी मां को चलती हुई बस से नीचे फेंक देते हैं. बस से गिरते ही लड़की की तो मौके पर मौत हो जाती है जबकि लड़की की मां बेहद नाजुक हालत में जिंदगी और मौत के बीच पहुंच जाती हैं.
ये है पूरा घटनाक्रम-
29 अप्रैल 2015
शाम करीब पांच बजे
मोगा भटिंडा रोड- पंजाब
मोगा भटिंडा के बीच चलने वाली ऑर्बिट बस सर्विस की बस मोगा से भटिंडा की तरफ जा रही थी. कोट कपूरा बाइपास के पास तीन सवारियां बस का इंतजार कर रही थीं. करीब 38 साल की एक महिला अपनी 13 साल की बेटी और 14 साल के बेटे के साथ गुरूसर कोठे तक जाने के लिए इसी बस पर सवार हो जाते हैं. शाम के पांच बज चुके थे और बस में सवारियां भी काफी कम थीं. लिहाजा तीनों लोग बस में आराम से बैठ जाते हैं और बस भटिंडा की तरफ आगे बढ़ जाती है. बस जैसे ही शहर की हद पार करके हाइवे पर आकर फर्राटा भरना शुरू करती है. अचानक बस में सवार दो लड़के अजीब सी हरकत करते हैं जिसे देखकर मां बेटी समेत तीनों बुरी तरह सहम जाते हैं. उन्हें कुछ समझ ही नहीं आता कि आखिर ये हो क्या रहा है? वो चारों बदमाश लड़की के साथ छेड़खानी शुरू कर देते हैं और साथ ही बस में बैठी दूसरी सवारियों को धमकाने भी लगते हैं. इसी बीच बस टोल नाके के नजदीक पहुंचती है. मां बेटी मदद के लिए जोर जोर से चीखना चिल्लाना शुरू कर देती हैं. लेकिन बस का कंडक्टर और उसके साथी दोनों का सिर नीचे की तरफ झुका देते हैं. ताकि उनकी आवाज घुट जाए. टोल के बाद करीब पांच किलोमीटर तक ड्राइवर बस को भगाता रहा और पीछे बैठे दरिंदे, नाबालिग लड़की और उसकी मां के साथ बदसलूकी करते रहे. चार राक्षसों के बीच बुरी तरह फंसी वो लड़की हाथ जोड़ कर रहम की भीख मांगती है, लेकिन वो लड़के नहीं सुनते लड़की हर चोट और हर घिनौनी हरकत के साथ तड़प उठती है लेकिन उनमें से किसी का भी दिल नहीं पसीजा. छेड़छाड़ और चीख पुकार का ये सिलसिला थोड़ी देर तक तो यूं ही चलता रहा और आखिर अचानक एक मोड़ पर ड्राइवर ने हाइड्रोलिक डिवाइस से खुलने वाले बस के दरवाजे को खोला और तब उन दरिंदों ने 13 साल की उस मासूम बच्ची को बस से नीचे धकेल दिया. लड़की को बस से फेंकने के बाद उन शैतानों ने लड़की की मां को भी बस से फेंक दिया और फिर थोड़ी ही दूर जाकर लड़की के भाई को बस से उतार दिया. बस से गिरते ही लड़की की मौत हो गई. जबकि उसकी मां बुरी तरह जख्मी हो गई. डरा सहमा लड़की का भाई जैसे तैसे अपनी मां और बहन के करीब पहुंचता है. राह चलते किसी शख्स से मदद लेकर उसके मोबाइल से पहले अपने घरवालों को और फिर पुलिस को वारदात की इत्तेला देता है.