निर्भया के दोषियों को कभी भी फांसी के फंदे पर लटकाया जा सकता है. फांसी की प्रकिया क्या होती है, फांसी से बचने के दोषी के क्या अधिकार होते हैं, इन अधिकारों के खत्म होने के बाद क्या होता है, फांसी देने से पहले जेल प्रसाशन क्या तैयारियां करता है, जैसे सवाल काफी अहम हैं जिनके बारे में लोग जानना चाहते हैं. इसके अलावा जेल में किस तरीके से दोषियों को फांसी दी जाएगी, जेल मेन्युअल में क्या लिखा है, फांसी घर कैसा होता है, जैसे सवाल भी दिलो-दिमाग पर घूमते हैं.
दोषी को मिलते हैं कई अधिकार
सबके मन में सवाल हैं कि इतने जघन्य अपराध के बावजूद फांसी देने में इतना लंबा (7 साल) समय क्यों लग रहा है? इस पर तिहाड़ के पूर्व डीजी अजय कश्यप का कहना है कि मौत की सजा एक ऐसी सजा है जिसके बाद इसमें कोई वापसी की गुंजाइश नहीं होती. ऐसे में दोषी को उसका एक-एक अधिकार इस्तेमाल करने दिया जाता है. हालांकि इसे और लंबा खींचने के लिए दोषी और उसके वकील कई चाल चलते हैं. ऐसा ही इस केस में भी हुआ. हाईकोर्ट से फांसी की सजा का फैसला बरकरार होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल करने की बात हो या फैसले को चुनौती देने की बात, उसमें दोषी एक साथ याचिका नहीं डालते. बल्कि एक-एक कर याचिका डालते हैं जिसमें काफी समय लगता है.
ब्लैक वारंट के इंतजार में जेल
सारे विकल्प खत्म होने के बाद तिहाड़ प्रसाशन दोषियों को फांसी से पहले राष्ट्रपति के सामने क्षमा याचिका लिखने के लिए समय देता है. निर्भया केस में भी तिहाड़ ने सभी दोषी विनय, अक्षय, मुकेश, पवन सभी को क्षमा याचिका लगाने के लिए 7 दिन का समय दिया. हालांकि सिर्फ विनय शर्मा ने यह याचिका लगाई जिसको दिल्ली सरकार ने खारिज करने की सिफारिश करते हुए एलजी अनिल बैजल, एलजी ने गृह मंत्रालय और अब गृह मंत्रालय ने इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया है. अब राष्ट्रपति अपना फैसला तिहाड़ को भेजेंगे.
अगर राष्ट्रपति इस याचिका को खारिज करते हैं तो तिहाड़ प्रशासन कोर्ट जाएगा और दोषी के खिलाफ डेथ वारंट (ब्लैक वारंट भी कहते हैं) जारी कराएगा. इसके बाद कोर्ट फांसी की तारीख और समय तय करेगा. ब्लैक वारंट जारी कराने के दिन से फांसी के दिन में 15 दिन का समय होता है. ये 15 दिन कैदी की कई तरह की जांच के लिए, फांसी के इंतजाम के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. इसमें परिवार के लोगों को आखिरी बार कैदी से मिलवाया जाता है.
कोर्ट चाहे तो विनय शर्मा की क्षमा याचिका खारिज होने के बाद सभी दोषियों का ब्लैक वारंट जारी कर सकता है. क्योंकि समय दिए जाने के बाद मुकेश, पवन, अक्षय ने याचिका नहीं लगाई लेकिन कोर्ट इन्हें इसका मौका दे सकता है.
बक्सर से आएगी फांसी की रस्सी
जल्लाद के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में तिहाड़ जेल के पूर्व डीजी अजय कश्यप ने कहा, जहां तक जल्लाद के होने न होने की बात है, तो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता. फांसी रेयर केस में दी जाती है. अब से पहले आखिरी फांसी 2013 में अफजल गुरु को दी गई थी. इसलिए जल्लाद की परमानेंट जरूरत नहीं है. डेथ वारंट जारी होने के बाद फांसी की रस्सी बक्सर से मंगाई जाएगी. तिहाड़ जेल नंबर 3 में एक ही फांसी घर है. इसके बारे में तिहाड़ के पूर्व पीआरओ सुनील गुप्ता ने कहा कि जेल में दोषियों को एक-एक कर फांसी दी जा सकती है. या सबको एक साथ भी लटकाया जा सकता है. जेल में इतनी जगह होती है कि दोषियों को एक साथ भी लटका दिया जाए.
सुबह-सुबह दी जाती है फांसी
फांसी गर्मी में सुबह 6 बजे और सर्दी में सुबह 7 बजे दी जाती है. फांसी वाले दिन सुबह दोषी को चाय दी जाती है. वो नाश्ता करना चाहे तो दिया जाता है. फिर उसे नहाने देते हैं. फिर उसे काले कपड़े पहनाते हैं. फांसी रूम में ले जाते वक्त चेहरे पर काला थैला लटका देते हैं. पैरों में रस्सी बांध दी जाती है. हाथों में हथकड़ी लगाते हैं.
2 घंटे तक लटकता है शरीर
फांसी रूम में सिर्फ एसडीएम, सुप्रीटेंडेंट और जल्लाद होते हैं. एसडीएम दोषी से उसकी इच्छा के बारे में पूछते हैं. अपनी प्रॉपर्टी अगर है तो किसे देनी है. उसके बाद सुप्रीटेंडेंट के इशारे पर जल्लाद लीवर खींचता है और दोषी लटक जाता है. नीचे करीब 12 फीट की जगह होती है. करीब 2 घंटे लटके रहने देते हैं. फिर डॉक्टर चेक करता है और मृत घोषित करता है. सरकार चाहे तो शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिवार को दिया जाता है, न चाहे तो नहीं देते.