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ओडिशा के मंत्री नब किशोर दास की हत्या का राज गहराता जा रहा है. जिस पुलिसवाले ने मंत्री का सरेआम कत्ल किया, उसने अब एक सनसनीखेज खुलासा किया है. आरोपी का कहना है कि मंत्री को मारने के बाद उसे उम्मीद नहीं थी कि वो जिंदा बच पाएगा. इसलिए उसने कत्ल की वजह एक कागज़ पर लिखकर अपने पास रख ली थी. ताकि उसके मारे जाने के बाद सच जमाने के सामने आ सके. लेकिन इस हत्याकांड को अंजाम देने के बाद भी वो जिंदा बच गया और उसने वो कागज का टुकड़ा कुछ ऐसे गायब किया कि अब उसे तलाश करने में पुलिस के पसीने छूट रहे हैं.
सेप्टिक टैंक में छानबीन!
वो क़त्ल, जो दिन दहाड़े सैकड़ों लोगों की आंखों के सामने हुआ. वो क़त्ल, जिसका मुल्जिम रंगे हाथों मौका-ए-वारदात से पकड़ लिया गया. वो क़त्ल, जिसने सिर्फ ओडिशा ही नहीं बल्कि पूरे देश को दहला कर रख दिया. पुलिस अब उसी ओपन एंड शट केस के सबूत एक टॉयलेट के पीछे बने सेप्टिक टैंक के अंदर ढूंढ रही है. जी हां, रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक ओडिशा पुलिस की क्राइम ब्रांच और सफाईकर्मियों की टीम सेप्टिक टैंक के अंदर मैराथन सर्च ऑपरेशन चला रही है. टॉर्च की रौशनी में कभी खुरपी से तो कभी जाली से टैंक का कोना-कोना छान रही है.
इतने पापड़ क्यों बेल रही पुलिस?
आपने बिल्कुल ठीक समझा ओडिशा पुलिस कुछ इसी तरह मंत्री नब किशोर दास के कत्ल का राज जानने की कोशिश कर रही है. इसके पीछे की साजिश का पता लगा रही है. अब आप पूछेंगे कि भला जिस मामले में मुल्जिम हाथों-हाथ गिरफ्तार कर लिया गया हो, जिसकी जांच ओडिशा पुलिस की क्राइम ब्रांच के टॉप अफसरों की टीम कर रही हो और जिस मामले की तफ्तीश का सुपरविजन खुद सूबे के एडीजी कर रहे हों, उस मामले की तह तक पहुंचने के लिए आखिर पुलिस को इतने पापड़ क्यों बेलने पड़ रहे हैं? और सबसे अहम तो यही है कि आखिर ऐसे किसी मामले के सबूत सेप्टिक टैंक के अंदर कैसे पहुंच सकते हैं?
29 जनवरी 2023, रविवार
तो इसके लिए आपका चार रोज़ पीछे यानी रविवार 29 जनवरी के दिन लौटना जरूरी है. जब ओडिशा पुलिस ने नब किशोर दास को गोली मारने के फौरन बाद अपने ही महकमे के मेंबर एएसआई गोपाल कृष्ण दास को गिरफ्तार कर लिया था. दरअसल, उस रोज़ गोपाल कृष्ण दास को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उसकी सुरक्षा के मद्देनजर उसे शहर की भीड़-भाड़ से दूर झारसुगुड़ा एयरपोर्ट के पुलिस स्टेशन में शिफ्ट कर दिया था और यहीं उससे क़रीब साढे चार घंटे तक पूछताछ भी हुई थी.
हमलावर गोपाल कृष्ण दास का चौंकानेवाला खुलासा
लेकिन इसके बाद जब उसे आगे की पूछताछ के लिए एक दूसरे ठिकाने पर ले जाया गया. जहां आरोपी दास ने जो खुलासा किया, उसे सुन कर पुलिस भी हक्की-बक्की रह गई. सूत्रों की मानें तो दास ने पूछताछ करनेवाले अफसरों से कहा, "मुझे डर था कि मंत्री को गोली मारने के बाद उसके समर्थक या पुलिस मौके पर ही मेरी जान ले लेगी. मुझ पर हमला होगा. इसलिए मैं पूरी तैयारी से नब किशोर दास का कत्ल करना चाहता था और कुछ इसी इरादे से मेरे मन में चल रही सारी बातों को और मंत्री को मारने की वजह को मैंने एक नोट में लिख रखा था. ताकि अगर मैं मंत्री को गोली मारने के तुरंत बाद मारा जाऊं, तो मेरी जेब से वो नोट बरामद हो और सारा सच दुनिया के सामने आ जाए. लेकिन अब जबकि पुलिस ने मुझे मौका-ए-वारदात से जिंदा और सही-सलामत गिरफ्तार कर लिया है, तो मैंने अपने हाथों से लिखे उस नोट को थाने के वॉशरूम में ही फ्लश कर दिया है. ताकि अब वो राज़ कभी भी बाहर ना आ सके."
एयरपोर्ट पुलिस थाने के टॉयलेट में छुपा सबूत
मंत्री के कत्ल के आरोपी एएसआई गोपाल कृष्ण दास के इस खुलासे के साथ ही क्राइम ब्रांच की अफ़सरों के होश उड़ गए. कुछ देर के लिए उन्हें समझ में नहीं आया कि आखिर ऐसा कैसे हो गया? लेकिन जब पुलिसवालों ने ये याद किया एयरपोर्ट थाने में लाए जाने के फौरन बाद ही वो कुछ देर के लिए वॉशरूम गया था, तो पुलिस को पूरी बात समझने में देर नहीं लगी. अब क्राइम ब्रांच की एक टीम फौरन उल्टे पांव एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन पहुंची, जहां उसने टॉयलेट के फ्लश से लेकर उसके पीछे बने सेप्टिक टैंक में सर्च आपरेशन चलाना शुरू किया और आपको जानकर हैरानी होगी कि घंटों चले इस तलाशी अभियान के बाद पुलिस ने टुकडों में तब्दील एक कागज के हिस्से बरामद किए.
मंत्री और आरोपी के बीच क्या था राज
यानी अब तक की तफ्तीश से ऐसा लगता है कि आरोपी गोपाल कृष्ण दास और नब किशोर दास के बीच कुछ तो ऐसा जरूर था, जो शायद इन दोनों को ही पता था. गोपाल कृष्ण अपनी मौत के बाद तो वो वजह दुनिया को बताना चाहता था, लेकिन अब जीते जी वो इस राज़ को शायद हमेशा-हमेशा के लिए राज ही रहने देना चाहता है. सवाल ये है कि आखिर वो बात क्या है?
क्राइम ब्रांच के लिए नई चुनौती
अब चुनौती ये है कि घंटों तक पानी में पड़े होने की वजह से कागज के ज्यादातर टुकड़े या तो गल चुके हैं या फिर गलने लगे हैं. ऐसे में उन टुकडों को सही-सलामत बरामद करना और उनमें लिखे अल्फाज को पढ़ कर साजिश का पता लगाना क्राइम ब्रांच के लिए भी एक नई चुनौती बन गया है. टुकड़ों को आपस में जोड़ना, सही सिक्वेंस तैयार करना जितनी बड़ी चुनौती है, उससे बड़ी चुनौती पेपर से मिट चुके अक्षरों को पढ पाने की है. जानकारों की मानें तो अगर आरोपी ने वो नोट किसी डॉट पेन से लिखा है, फिर तो उससे कुछ तथ्यों के हासिल होने की उम्मीद बनती है, लेकिन अगर ये सबकुछ उसने इंक पेन या फिर जेल पेन से लिखा है, तो फिर उन कागज के टुकड़ों से सच पता लगाना भूसे के ढेर से सुई ढूंढने जैसा साबित हो सकता है.
आरोपी से सच क्यों नहीं उगलवाती पुलिस?
अब आप पूछेंगे जो शख्स पहले ही पुलिस की गिरफ्त में हो, पुलिस आखिर उससे कत्ल का राज क्यों नहीं उगलवा पा रही है? सच्चाई जानने के लिए आखिर उसे सेप्टिक टैंक में फेंके गए कागज के इन टुकड़ों की ऐसी क्या जरूरत है? तो इसके दो जवाब सामने आते हैं. अव्वल तो आरोपी चूंकि खुद ही एक पुलिसवाला है, उसे इंटेरोगशन से बचने का तौर तरीका भी खूब पता है और वो अपने साथी पुलिसवालों को पूरी तरह से छकाने और बरगलाने में लगा है.
आरोपी का लिखा नोट भी पुलिस के लिए ज़रूरी
ऊपर से जिस आदमी को किसी का कत्ल करने के बाद अंजाम के तौर पर अपनी मौत भी कबूल हो, उस आदमी से सच उगलवा पाना इतना आसान नहीं होता. क्योंकि उसकी करतूत ही बताती है कि उसकी मानसिकता सिर पर कफन बांध कर चलनेवाली है. इसके अलावा कत्ल का राज मुल्जिम के मुंह से सुनना पुलिस के लिए जितना ज्यादा जरूरी है, उसे मुल्जिम के हाथों से लिखे से नोट की सूरत में बरामद करना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि ये नोट अदालत में मुल्जिम के खिलाफ एक अहम सबूत साबित हो सकता है.
नोट में लिखे सच की पहेली
फिलहाल पुलिस ने सेप्टिक टैंक से कागज के कई टुकड़े बरामद कर लिए हैं, जो इस बात की तस्दीक करते हैं कि आरोपी गोपाल कृष्ण दास कम से कम इतनी बात तो सच-सच बता रहा है कि उसने थाने के टॉयलेट में एक नोट जरूर फ्लश किया है. लेकिन नोट में राज लिखने की बात कितनी सच है और कितनी झूठ इसका पता, नोट में लिखी बातों के पढ़े जाने के बाद ही सामने आ सकेगा.
फॉरेंसिक साइकोलॉजिकल असेसमेंट की तैयारी
थाने के सेप्टिक टैंक से बरामद हो रहे कागज के टुकड़ों में लिखे अल्फाज का पता लगाने के लिए इन टुकड़ों की फॉरेंसिक जांच होगी. पुलिस 53 साल के आरोपी एएसआई गोपाल कृष्ण दास का फॉरेंसिक साइकोलॉजिकल असेसमेंट और लेयर्ड वॉयस एनालिसिस भी करवाने की तैयारी कर रह रही है. पुलिस ने इसके लिए सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबरोटरी को भी खत लिखा है. फॉरेंसिक साइकोलॉजिकल असेसमेंट के जरिए किसी भी इंसान के व्यवहार, व्यक्तित्व और पूरी मानसिकता का पता लगाया जा सकता है और इस टेस्ट से ये अंदाजा लग सकता है कि आखिर वो इंसान कितना सच बोल रहा है और कितना झूठ.
आरोपी का लेयर्ड वॉयस एनालिसिस
ठीक इसी तरह लेयर्ड वॉयस एनालिसिस में किसी इंसान की मानसिक स्थिति और उसके इमोशनल स्टेट यानी भावनाओं के बारे में जानकारी मिलती है. किसी दिए हुए वक्त पर वो जो बातें कह रहा है, उसमें भावनाओं का स्तर क्या है, ये भी साफ होता है. जाहिर है, इन तकनीक से पुलिस को इस मामले की और गहराई तक जाने में मदद मिल सकती है.
मंत्री के सिर में गोली मारना चाहता था आरोपी
सूत्रों की मानें तो आरोपी से हुई शुरुआती पूछताछ में उसने पुलिस को और भी कई चौंकानेवाली बातें कही हैं. गोपाल कृष्ण दास ने कहा है कि वो काफी दिनों से नब किशोर दास को मारने की तैयारी कर रहा था. कई बार झारसुगुडा में उसके होने के दौरान उसकी रेकी कर चुका था. लेकिन चूंकि मंत्री कड़े सुरक्षा घेरे में होते थे, इसलिए मंत्री को टार्गेट करना उसके लिए मुश्किल हो रहा था. आरोपी ने पुलिस से कहा है कि वो नब किशोर दास को बिल्कुल करीब से उसके सिर में गोली मारना चाहता था, लेकिन वो एकाएक गाड़ी से निकल कर खड़ा हो गया, जिससे गोली उसके सिर की जगह सीने में लग गई.
क्या सच में बाइपोलर डिसऑर्डर का शिकार है आरोपी?
ओडिशा पुलिस फिलहाल इस मामले की कई पहलुओं से जांच कर रही है. क्राइम ब्रांच की एक टीम डीएसपी स्तर के एक अफसर की अगुवाई में आरोपी गोपाल कृष्ण दास की मानसिक बीमारी और उसके इलाज के बारे में पता लगाने में जुटी है. असल में मंत्री के कत्ल के फौरन बाद दास का इलाज कर चुके एक डॉक्टर और उसके घरवालों ने उसे बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी मानसिक बीमारी का मरीज होने की बात कही थी. लेकिन इन बातों में कितनी सच्चाई है और कितनी नहीं, पुलिस को इसका भी पता लगाना है.
आरोपी की दिमागी बीमारी से विभाग क्यों नहीं वाकिफ
जांच अभी शुरुआती दौर में है और पुलिस को ये भी जानना है कि कहीं इस कत्ल के पीछे गोपाल कृष्ण दास की बीमार दिमागी हालत ही तो वजह नहीं है. सवाल ये भी है कि आखिर उसकी दिमागी बीमारी के बारे में महकमे को कोई जानकारी क्यों नहीं थी और अगर उसकी बीमारी के बारे में सबको पता था तो फिर उसे पुलिस महकमे की ओर से सर्विस रिवॉल्वर कैसे दी गई? ठीक इसी तरह पुलिस की एक टीम आरोपी एएसआई की आर्थिक स्थिति के बारे में भी पता लगाने में जुटी है. मौका-ए-वारदात से लेकर एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन और उसके आस-पास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है.
ऐसे हुआ था मंत्री नब किशोर दास का मर्डर
बीजू जनता दल यानी बीजेडी से जुडे सूबे के सबसे अमीर नेताओं में से एक और ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री नब किशोर दास उस दिन एक प्रोग्राम में भाग लेने अपने चुनाव छेत्र झारसुगुडा पहुंचे थे. प्रोग्राम शहर के ब्रजराजनगर इलाके के गांधीनगर में था. अपने समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों से घिरे दास जैसे ही कार से नीचे उतरे, अचानक भीड़ को चीरता हुआ एक पुलिसकर्मी उनके पास पहुंचा और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, पुलिसकर्मी ने अपने सर्विस रिवॉल्वर से बिल्कुल प्वाइंट ब्लैंक रेंज से दास को गोली मार दी. गोली मंत्री जी के सीने में बांयी तरफ लगी और वो तुरंत ही बेहोश होकर नीचे गिरने लगे. हालांकि आस-पास मौजूद लोगों ने उन्हें संभाल लिया और उन्हीं की कार में झाड़सुगुडा के जिला अस्पताल लेकर गए.
आरोपी ने भीड़ पर भी किए थे फायर
उधर, गांधीनगर में मंत्री को निशाना बनाए जाने से की इस भयानक वारदात के चलते मौके पर अफरातफरी के हालात पैदा हो गए थे. कुछ देर के लिए लोगों को समझ ही नहीं आया कि गोली चलानेवाला वाकई कोई पुलिसकर्मी था या फिर खाकी वर्दी में कोई और हमलावर? हालांकि आनन-फानन में लोगों ने मंत्री पर गोली चलानेवाले पुलिसकर्मी को दबोचने की कोशिश की और पकड़े जाने से बचने के लिए तब उस शख्स ने भी एक-एक कर दो और गोलियां चलाईं थीं. दोबारा हुई इस फायरिंग से एक और जीवनलाल नायक नाम के शख्स को गोली लगी और लोगों ने उसे भी इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया.
भीड़ के बीच कत्ल की इकलौती वारदात
देखते ही देखते इस वारदात ने सिर्फ झाड़सुगुड़ा और ओडिशा ही नहीं पूरे देश को सकते में डाल दिया. किसी मंत्री को इस तरह 'पब्लिक व्यूह' के बीच गोली का निशाना बनाए जाने की ये हाल के सालों की इकलौती वारदात थी. हमले के बाद पहले नब किशोर दास को झाड़सुगुड़ा के सरकारी अस्पताल में ले जाया गया था, लेकिन उनकी हालत को देखते हुए उन्हें कुछ ही देर बाद एयरलिफ्ट कर राजधानी भुवनेश्वर के अपोलो अस्पताल में ले जाया गया. जहां एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की हरमुमकिन कोशिश, लेकिन शाम होते-होते उनकी जान चली गई. उनका इलाज करनेवाले डॉक्टरों का कहना था कि उन्हें सीने में एक गोली लगी थी, जो उनके दिल और फेफडे को जख्मी करती हुई बाहर निकल गई. फौरन ऑपरेशन के जरिए उनके जख्मी अंगों को ठीक करने की कोशिश हुई, उन्हें आईसीयू केयर में भी रखा गया, लेकिन तेजी से खून बहने की वजह से उन्हें बचाया नहीं जा सका.
ट्रैफिक क्लीयरेंस में थी आरोपी की ड्यूटी
इस मामले की शुरुआती जांच में ही ये साफ हो गया था कि हमलावर एक पुलिसकर्मी ही था, जिसकी ड्यूटी ब्रजराजनगर के गांधीनगर पुलिस पोस्ट पर ही थी. उसकी पहचान असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर गोपाल कृष्ण दास के तौर पर हुई थी. मौके पर ही मंत्री के आगमन के मदेदनजर गोपाल दास की ड्यूटी ट्रैफिक क्लीयरेंस की थी. आनन-फानन में पूरे मामले की जांच के लिए डीजीपी ने सात मेंबर की क्राइम ब्रांच की एक एसआईडी का गठन किया और एडीजी अरुण बोथरा खुद तफ्तीश का सुपरविजन के लिए झाड़सुगुड़ा पहुंचे. पुलिस ने मौके से पकड़े गए पुलिसकर्मी गोपाल दास को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की. बाद में उसे ओडिशा पुलिस से बर्खास्त कर दिया गया.
वारदात के पीछे हैं कई सवाल
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर एक पुलिसकर्मी ने इतनी बड़ी वारदात को क्यों अंजाम दिया? क्यों एक एएसआई ने सूबे के एक मंत्री की गोली मार कर जान ले ली? क्या इसके पीछे कोई निजी दुश्मनी थी? मंत्री नब किशोर दास और हमलावर गोपाल दास का कोई वैचारिक मतभेद? एएसआई की जिंदगी में चल रही कोई निजी परेशानी? किसी पारिवारिक कलह का नतीजा? छुट्टियों का कोई मसला? या फि कुछ और?
मंत्री का PSO भी रहा चुका है आरोपी
फिलहाल, इस मामले की जांच में पुलिस तमाम पहलुओं को ध्यान में रख कर चल रही है, लेकिन क़त्ल का मकसद अब तक साफ नहीं है. हां, कुछ सूत्रों का ये जरूर कहना था कि हमलावर पुलिसकर्मी गोपाल दास पहले झाड़सुगुड़ा से ही विधायक रहे नब किशोर दास का पर्सनल सिक्योरिटी ऑफ़िसर यानी पीएसओ रह चुका है और गोपाल को पिछले 7-8 सालों से बाइपोलर डिसऑर्डर नाम की मानसिक बीमारी भी रही है. लेकिन फिर सवाल वही है कि क्या इस हमले और कत्ल के पीछे गोपाल दास की मंत्री से उनके पीएसओ रहने के दौरान की कोई पुरानी खुन्नस है या फिर बाइपोलर डिसऑर्डर का नतीजा?
आरोपी को है बाइपोलर डिसऑर्डर
हमलावर पुलिसकर्मी गोपाल दास का इलाज करनेवाले डॉक्टर ने उसे बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी मानसिक बीमारी होने की खबर की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि पिछले 7-8 साल पहले उन्होंने इस बीमारी के चलते गोपाल दास का इलाज किया था और तब नियमित रूप से दवाएं लेने की वजह से उसकी तबीयत काफी हद तक ठीक हो गई थी. तब गोपाल का इलाज बरहामपुर के एमकेसीजी अस्पताल में चल रहा था. डॉक्टर का कहना है कि नियमित रूप से दवाएं लेने से ही वो ठीक रह सकता था. लेकिन इन दिनों वो अपनी दवाएं नियमित रूप से खा रहा था या नहीं, ये तभी साफ हो सकेगा ये झाड़सुगुडा में उसके साथ रहनेवाला कोई शख्स ही बता सकता है.
हमले से पहले बेटी से की थी वीडियो कॉल पर बात
हालांकि हमलावर गोपाल कृष्ण के घरवालों से हुई बातचीत के बाद भी ये कहानी पूरी तरह साफ नहीं हो सकी. गोपाल का परिवार झाड़सुगुडा से दूर गंजाम इलाके में रहता है. घर में और लोगों के साथ-साथ उसकी बीवी और बेटी भी है. 29 जनवरी यानी हमलेवाले रोज़ गोपाल ने सुबह वीडियो कॉल कर अपनी बेटी से बात की थी. लेकिन इससे पहले कि उसकी अपनी बीवी से बात हो पाती, फोन डिस्कनेक्ट हो गया. पूछताछ के दौरान गोपाल की बीवी ने बताया है कि वो अपनी दवाएं झाड़सुगुडा में नियमित रूप से ले रहे थे या नहीं, इसके बारे में वो पक्के तौर पर नहीं बता सकती. क्योंकि वो परिवार से दूर काम के लिए वहां अलग रहते हैं. गोपाल की पत्नी जयंती दास की मानें तो गोपाल करीब 5-6 महीने पहले छुट्टियों पर घर आए थे.
आरोपी पुलिसकर्मी की तैनाती पर भी सवाल?
वैसे अब हमलावर गोपाल दास को मानसिक बीमारी होने की बात सामने आने के बाद एक बड़ा सवाल ये भी खड़ा हो गया है कि आखिर ऐसे किसी पुलिसकर्मी की इतने संवेदनशील जगह पर तैनाती क्यों और किसके ईशारे पर हुई? और उससे भी अहम ये कि मानसिक बीमारी के शिकार पुलिसकर्मी को सर्विस रिवाल्वर रखने की इजाजत क्यों दी गई? जाहिर है एक पुलिसकर्मी के हमले से सूबे के मंत्री की मौत के बाद ये सवाल भी फिजाओं में तैरने लगा है.
उड़ीसा के सबसे अमीर मंत्री थे नब किशोर दास
हमले में मारे गए मंत्री नब किशोर दास की गिनती ओडिशा के सबसे अमीर और ताकतवर मंत्रियों में होती थी. खुद सूबे के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के साथ उनके बेहद नजदीकी रिश्ते थे. वो कोयले की खुदाई, ट्रांसपोर्ट और हॉस्पिटैलिटी के कारोबार से जुड़े थे और ओडिशा कैबिनेट के सबसे अमीर मंत्री थे. उन्होंने साल 2022 में अपनी संपत्ति 34 करोड़ रुपये की बताई थी और ये भी बताया था कि उनके पास 80 गाड़ियां हैं. दास के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा एक बेटा और एक बेटी है. नब किशोर दास की पत्नी के पास भी 30 करोड़ रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी होने की बात कही गई है. हाल ही में वो महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर में एक किलो सात सौ ग्राम वजन का सोने का कलश चढ़ा कर चर्चे में आ गए थे. इसके अलावा उन्होंने मंदिर में 5 किलोग्राम चांदी से बने कलश भी दान में दिए थे.
तीन बार से लगातार विधायक थे नब किशोर दास
नब किशोर दास की गिनती झारसुगुड़ा के प्रभावशाली नेताओं में होती थी. वो पहले कांग्रेस पार्टी में थे लेकिन बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़ कर बीजू जनता दल का दामन थाम लिया था. चूंकि वो सीएम नवीन पटनायक की गुड बुक में थे, मुख्यमंत्री ने भी उन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण जैसा अहम मंत्रालय दे रखा था. दास ने पहली बार साल 2004 में झारसुगुड़ा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद कांग्रेस के टिकट पर ही वो 2009 में दोबारा चुनाव लड़े और जीत गए. 2014 में भी कांग्रेस के टिकट पर उनकी जीत हुई. लेकिन इसके बाद 2019 में उन्होंने बीजू जनता दल में शामिल होने का फैसला किया और लगातार तीसरी बार इस सीट से चुनाव जीत कर विधायक चुने गए. तभी सीएम नवीन पटनायक ने उन्हें अपनी कैबिनेट में शामिल कर लिया था.
(भुवनेश्वर से ऋत्तिक मंडल का इनपुट)