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कहानी एक गुमनाम 'निर्भया' की

कहानी ऐसी ही एक गुमनाम 'निर्भया' की, जो 'निर्भया' से ठीक दस महीने पहले दरिंदों का शिकार बन कर खामोशी से मौत के मुंह में समा गई और तो और इस निर्भया के साथ हुई ज़्यादती की कहानी ने उसे जानने वाले हर किसी को अंदर से हिला दिया, लेकिन उसके लिए ना तो वैसा कैंडल मार्च हुआ और ना ही सत्ता की दीवारें हिलीं.

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दरिंदगी की शिकार हुई एक और निर्भया
दरिंदगी की शिकार हुई एक और निर्भया

कहानी ऐसी ही एक गुमनाम 'निर्भया' की, जो 'निर्भया' से ठीक दस महीने पहले दरिंदों का शिकार बन कर खामोशी से मौत के मुंह में समा गई और तो और इस निर्भया के साथ हुई ज़्यादती की कहानी ने उसे जानने वाले हर किसी को अंदर से हिला दिया, लेकिन उसके लिए ना तो वैसा कैंडल मार्च हुआ और ना ही सत्ता की दीवारें हिलीं.

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दरअसल बात 16 दिसंबर 2012 को हुए दिल्ली गैंग रेप से करीब दस महीने पहले की है, जिसमें ठीक निर्भया की तरह ही एक और मासूम लड़की दरिंदों का शिकार बन कर इस दुनिया से चली गई. इत्तेफ़ाक से ये वारदात भी दिल्ली में ही हुई थी लेकिन इसे हालात का फ़र्क कहें या फिर सबकुछ देख कर भी अंजान बन रहने की हमारी आदत, तब इस वारदात पर देश वैसे नहीं जागा, जैसे निर्भया के वक़्त जागा था. तब लोग वैसे नहीं हिले, जैसे निर्भया ने उन्हें हिलाया था. गरज ये कि निर्भया से बहुत पहले एक और लड़की इसी दिल्ली में निर्भया की मौत मर चुकी थी लेकिन ज़्यादातर लोग उस निर्भया से अंजान ही बने रहे.

शायद ये मौत-मौत का फ़र्क था. लेकिन कहते हैं क़ानून ना तो इंसान-इंसान में फ़र्क करता है और ना ही मौत-मौत में, तभी निर्भया के जाने और उसके गुनाहगारों के अंजाम तक पहुंचने के पांच महीने बाद अब इस गुमनाम निर्भया के गुनाहगारों की बारी आई है. अदालत दिल्ली के छावला इलाके से एक लड़की को अगवा कर उसे मौत के घाट उतारनेवाले तीनों गुनहगारों को पहले ही मुजरिम करार दे चुकी है यानी दुनिया के साथ-साथ अब वो तीनों अदालत और क़ानून की निगाहों में भी गुनाहगार साबित हो चुके हैं. ऐसे में अब कुछ बचा है, तो वो है उन्हें उनके आख़िरी अंजाम तक पहुंचाना.

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द्वारका की अदालत ने इस अहम फ़ैसले पर सोमवार को दोनों पक्षों को तफ्सील से सुना और फिर इन क़ातिलों के तक़दीर का फ़ैसला लिखने के लिए 19 फरवरी की तारीख़ मुहैया कर दी. अदालत ने राहुल, रवि और विनोद नाम के इन तीनों को फिलहाल आईपीसी की धारा 302 यानी क़त्ल, 376जी यानी गैंगरेप, 201 यानी सुबूत मिटाने, 363 यानी अपहरण, 34 यानी जुर्म के लिए एक राय होने के तहत गुनहगार माना है और इनमें गुनाह-ए-अज़ीम यानी क़त्ल के लिए इन क़ातिलों को उम्र क़ैद से फांसी तक की सज़ा हो सकती है.

अभियोजन पक्ष ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ़ द रेयर क़रार देते हुए जहां इन दरिंदों को फांसी की सज़ा देने की मांग की, वहीं दूसरी तरफ़ ये भी कहा है कि अगर ऐसे लोगों को ज़िंदा रहने दिया गया, तो समाज में संदेश ग़लत जाएगा. उधऱ, बचाव पक्ष ने सुधार की गुंजाइश बाकी होने की बात कहते हुए जान बख्श देने की गुहार लगाई. ऐसे में अब तमाम लोगों की निगाह 19 फरवरी पर टिकी है, जब अदालत इस गुमनाम निर्भया के गुनाहगारों की तक़दीर पर अपना आख़िरी फ़ैसला सुनाएगी. उन गुनाहगारों की तक़दीर पर, जिन्होंने फ़क़त चंद मिनटों के मज़े के लिए एक बेगुनाह लड़की के जिस्म को ही नहीं, बल्कि रूह को भी रौंद डाला था.

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क्या था पूरा मामला

निर्भया से महीनों पहले निर्भया की तरह इस दुनिया से जानेवाली इस लड़की की कहानी भी कम अफ़सोसनाक नहीं है. ये गुमनाम निर्भया अपने किसी दोस्त के साथ आउटिंग के लिए तो नहीं गई, लेकिन उसे उसके घर के रास्ते में ही कुछ दरिंदों ने तब अगवा कर लिया था, जब वो दफ़्तर से लौट रही थी मगर, इसके बाद जो कुछ हुआ वो 16 दिसंबर की निर्भया के साथ गुज़री वारदात से कई मायनों में मेल खाती है.

जगह- छावला, दिल्ली

तारीख़- 9 फ़रवरी 2012

वक़्त- 7 बजकर 30 मिनट

यही वो घड़ी थी, जब एक हंसती-खेलती लड़की की ज़िंदगी ना सिर्फ़ तबाह हो गई बल्कि अगले चंद घंटों में जो दुनिया से ही रुखसत कर दी गई. बलात्कार और क़त्ल की वारदात तो इससे पहले भी हुई थी और बाद में भी हुई. लेकिन इस मामले में जिस वहशियाना तरीके से दरिंदों ने इस लड़की के साथ ज़्यादती कर उसकी जान ली, वो कई मायनों में 16 दिसंबर की निर्भया से भी कहीं ज़्यादा अफ़सोसनाक थी.

निर्भया को तो उसके गुनाहगारों ने बुरी तरह ज़ख्मी हालत में मरने के लिए बस से नीचे फेंक दिया था लेकिन इस गुमनाम निर्भया की मौत की तसल्ली के लिए उसके गुनहगार घंटों तक उसकी जिस्म पर वार करते रहे. ये देखते रहे कि कहीं उसमें अब भी जान तो नहीं बची और जब लड़की की मौत के साथ ही वो अपने बच निकलने को लेकर मुतमइन हो गए, उन्होंने लाश को ठिकाने लगा दिया.

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वहशत और ज़्यादती के इस सिलसिले शुरुआत तब हुई, जब छावला की रहनेवाली एक लड़की अपनी कुछ दोस्तों के साथ गुड़गांव से घर लौट रही थी. काम से लौटती लड़कियों को अंधेरे का फ़ायदा उठा कर रास्ते में तीन बदमाशों ने रोका और एक लड़की को जबरन अपने साथ उठा ले गए. जब लड़की की दोस्तों ने उन्हें ऐसा करने से रोकने की कोशिश की तो लड़कों ने उनके साथ भी मारपीट की लेकिन सरेशाम हुई इस वारदात के बाद उसके घरवालों को तब पहला झटका लगा, जब तकरीबन एक घंटे देर से पहुंची पुलिस ने घरवालों की तमाम गुज़ारिश के बावजूद फुर्ती से बदमाशों की तलाश करने से खुद को मजबूर बता दिया. वजह ये कि राजधानी की पुलिस के पास बदमाशों को ढूंढ़ने निकलने के लिए एक अदद गाड़ी तक नहीं थी.

इधर, जितना वक़्त गुज़र रहा था. उधर, अगवा की गई लड़की के साथ ज़्यादती उतनी ही बढ़ती जा रही थी. लड़की को उठाने के बाद बदमाश उसे कार में लेकर अंदरुनी रास्तों से होते हुए दिल्ली से हरियाणा जा पहुंचे. चूंकि ये सारे के सारे लड़के वहीं के रहनेवाले और पेशे से ड्राइवर थे, इन्हें पुलिस से बचने के लिए कई दूसरे रास्तों का पता था. एक तरफ़ अगवा की गई लड़की अपनी अस्मत और जान की भीख मांग रही थी, दूसरी तरफ़ उसकी तमाम चीख़ों और तकलीफ़ों से बेअसर इन लड़कों ने पहले तो एक ठेके से रूक कर शऱाब खरीदी और फिर उसे सुनसान जगह पर ले जाकर शऱाब पीते हुए उसके साथ ज़्यादती की.

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लेकिन इतनी ज़्यादती से भी मानों इन दरिंदों का जी नहीं भरा. तीन-तीन लड़कों का शिकार बनने के बाद जब इस निर्भया ने पीने के लिए पानी मांगा, तो इन सिरफिरों का एक और ही चेहरा सामने आ गया. पहले तो तीनों उसे लेकर पानी की तलाश में निकले और एक जगह रखे घड़े से पानी भी पिलाया लेकिन इसके बाद इन तीनों में से एक लड़के के दिमाग़ में जो बात आई, उसने अब तक बलात्कारी बन चुके इन लड़कों को क़ातिल भी बना दिया.

एक मासूम की अस्मत तार-तार करने के बाद पहले तो इन लड़कों ने उसे पानी पिलाया और इसी बीच जब एक ने उसे मार डालने का आइडिया दिया, तो तीनों की हैवानियत फिर से जाग उठी. इन लड़कों ने उसे जिस घड़े से पानी पिलाया था, सबसे पहले वही घड़ा उठा कर उसके सिर पर दे मारा और इसके बाद तीनों ने लड़की के साथ जो कुछ किया, उसे सुनते ही किसी को भी उसकी दर्द की शिद्दत का अहसास होने लगेगा.

लड़की अब भी अपने पैरों पर खड़ी उनसे रहम की भीख मांग रही थी. लेकिन उसका ज़िंदा रहना ही अब इन दरिंदों को ज़्यादा ही खल रहा था. लिहाज़ा, तीनों में से एक मुड़ा और गाड़ी से लोहे का पाना और जैक निकाल लाया और इन्हीं औजारों से उन्होंने लड़की के सिर पर कई ज़ोरदार वार किए. लड़की पहली ही वार से लड़की ज़मीन पर गिर कर तड़पने लगी लेकिन लड़कों को उस पर रहम नहीं आई. इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक उस पर ना सिर्फ़ कई वार किए, बल्कि उसकी लाश को जला कर बदशक्ल करने के लिए गाड़ी के साइलेंसर से औजारों को गर्म कर उसे जगह-जगह दागा.

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लेकिन वहशत की इंतेहा अभी बाकी थी. इसके बाद लड़कों ने बीयर की बोतल फोड़ी और उससे लड़की के पूरी जिस्म को तब तक काटते रहे, जब तक वो बेजान नहीं हो गई. पुलिस के सामने खुद लड़कों का कुबूलनाम ये कहता है कि उन्होंने तसल्ली के लिए कई वार तो उसकी मौत के बाद भी किए और फिर लाश को मौके पर ही छोड़ कर भाग निकले. लेकिन आख़िरकार, पुलिस को उनकी कार की मेक और मोबाइल फ़ोन की लोकेशंस की बदौलत पहले सुराग़ मिले और फिर सुबूत भी.

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