दिवंगत फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमयी मौत के बाद सामने आए मायानगरी के स्याह सच ने सबको हैरान कर दिया था. पूरी फिल्म इंडस्ट्री ड्रग्स के जाल में उलझी हुई नजर आई थी. फिल्म एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर, सारा अली खान से लेकर कॉमेडियन भारती सिंह तक के नाम इसमें सामने आए थे. एनसीबी ने बड़ी संख्या में ड्रग्स स्मगलर और पैडलर को गिरफ्तार किया था. अब बॉलीवुड के बाद टॉलीवुड ड्रग्स के घिनौने कारोबार की वजह से इस वक्त चर्चा में है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने एक तमिल फिल्म प्रोड्यूसर जफर सादिक को गिरफ्तार किया है, जो 2000 करोड़ रुपए के इंटरनेशनल ड्रग्स सिंडिकेट का संचालन करता था. उसकी पहुंच सिनेमा से लेकर सियासत तक के दिग्गजों के बीच रही है.
जफर सादिक कहने को तो एक फिल्म प्रोड्यूसर है, लेकिन उसका असली धंधा ड्रग्स की तस्करी है. एक, दो नहीं बल्कि तीन मुल्कों में उसका काला कारोबार चल रहा है. नशे का ये सौदागर ड्रग्स सिंडिकेट से कमाए पैसों को फिल्म, रियल स्टेट और कंस्ट्रक्शन के बिजनेस में लगाया करता था. उसकी राजनीति में भी खासी दिलचस्पी रही है. दक्षिण के एक प्रमुख राजनीतिक दल द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम यानी डीएमके का सदस्य रह चुका है. एनसीबी द्वारा पूछताछ में खुलासा हुआ है कि जफर ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन को सात लाख रुपए दिए थे. इनमें पांच लाख रुपए बाढ़ के वक्त रिलीफ फंड में दिए गए, जबकि दो लाख पार्टी फंड में दिए थे. ये पैसा किस सोर्स से कमाकर दिय़ा गया था, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम इसकी भी जांच कर रही है.
एनसीबी मनी लांड्रिंग की जांच के लिए ईडी को भी खत लिख रही है. इस मामले में पूछताछ के लिए उदयनिधि स्टालिन को भी बुलाया जा सकता है. इसके साथ ही एनसीबी बॉलीवुड के कुछ बड़े फिल्म फाइनेंसरों को भी समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाने वाली है. जफर ने 'मंगई' नामक एक तमिल फिल्म को ड्रग्स के पैसे से बनाया है. उससे पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि इसके तार भारत, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ड्रग कार्टेल से जुड़े रहे हैं. उसने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को 2000 करोड़ रुपए की ड्रग्स स्मगलिंग की है. विदेशों में कुल 45 बार में 3500 किलो स्यूडोफेड्रिन बेच चुका है. अब श्रीलंका में ड्रग्स बेचने की तैयारी कर रहा था. लेकिन उससे पहले एनसीबी और दिल्ली पुलिस ने जाल बिछाकर उसे धर दबोचा है. उससे पूछताछ में कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता है.
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पिछले महीने इस ड्रग्स सिंडिकेट से जुड़े तीन आरोपी पकड़े गए थे. इनसे पूछताछ में जफर सादिक के बारे में पता चला था. वो 15 फरवरी से फरार था. इस दौरान त्रिवेन्द्रम, मुम्बई, पुणे, हैदराबाद और जयपुर होते हुए लगातार भाग रहा था. लेकिन मदुरै और चेन्नई से 180 करोड़ रुपए की मेथामफेटामाइन जब्त करने के एक हफ्ते बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया. उसके पास से 50 किलोग्राम सुडोअफेड्रिल बरामद की गई है. स्यूडोएफेड्रिन को ड्राई फ्रूट की आड़ में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया भेजा था. अभी तक जफर ने 45 पार्सल भेजे हैं. इस ड्रग को सप्लाई करने के लिए वो प्रतिकिलो एक लाख रुपए लेता था. इस तरह उसने 4 हजार करोड़ रुपए की सप्लाई कर चुका है. अमेरिका की फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन भी इस ड्रग्स जांच में भारतीय एजेंसी का सहयोग कर रही है.
बताते चलें कि स्यूडोएफेड्रिन का इस्तेमाल मेथामफेटामाइन बनाने के लिए किया जाता है. ये दुनिया भर में सबसे ज्यादा डिमांड वाला नशीला पदार्थ है. इसे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में करीब 1.5 करोड़ रुपए प्रति किलो बेचा जाता है. इस सिंडिकेट को तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और एनसीबी की एक ज्वाइंट टीम बनाई गई थी. पहले 50 किलो स्यूडोएफेड्रिन बरामद की गई थी. इसके चार महीने की जांच के बाद पता चला कि ये सिंडिकेट ऑस्ट्रेलिया में नया खेप भेजने की कोशिश कर रहा है. इसके बाद 15 फरवरी को दिल्ली के बसई दारापुर में एक गोदाम में छापा मारा गया. उस वक्त आरोपी स्यूडोएफेड्रिन को मल्टीग्रेन खाद्य मिक्चर की एक कवर खेप में पैक करने की कोशिश कर रहे थे. इस दौरान 50 किलो नशीला पदार्थ बरामद किया गया था.