नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने फिल्म प्रोड्यूसर जफर सादिक को गिरफ्तार कर लिया है. वो 2000 करोड़ रुपए के इंटरनेशनल ड्रग्स सिंडिकेट का संचालन करता रहा है. भारत, ऑस्ट्रेलिया से लेकर न्यूजीलैंड तक उसका काला कारोबार फैला हुआ है. पिछले महीने उसके सिडिंकेट के तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद उसके नाम खुलासा हुआ था. उसके बाद दक्षिण भारत के प्रमुख राजनीतिक दल द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम यानी डीएमके ने उसे अपनी पार्टी से बाहर कर दिया. वो पिछले तीन साल से इस राजनीतिक दल के साथ जुड़ा था.
एनसीबी द्वारा पूछताछ में खुलासा हुआ है कि जफर सादिक ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन को सात लाख रुपए दिए थे. इनमें पांच लाख रुपए बाढ़ के वक्त रिलीफ फंड में दिए गए, जबकि दो लाख पार्टी फंड में दिए थे. उसने लाखों रुपए किस सोर्स से अर्जित करके उसने दान किए थे, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम इसकी भी जांच कर रही है. एनसीबी मनी लांड्रिंग की जांच के लिए ईडी को भी खत लिख रही है. जांच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में पूछताछ के लिए उदयनिधि स्टालिन को भी बुलाया जा सकता है.
सूत्रों के हवाले से यह भी पता चला है कि जफर सादिक तमिलनाडु के खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन के साथ राज्यसभा सांसद एमएम अब्दुल्ला और चेन्नई पश्चिम के पार्टी सचिव एन चित्ररासु के साथ कई डीएमके नेताओं के काफी करीबी है. इस ड्रग्स रैकेट के खुलासे के बाद बीजेपी ने सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ हमला बोल दिया है. तमिलनाडु बीजेपी प्रमुख के अन्नामलाई ने कहा, ''इंटरनेशनल ड्रग लॉर्ड जफर सादिक को गिरफ्तार कर लिया गया है. पिछले तीन वर्षों में कई डीएमके नेताओं के करीब रहा सादिक कैसे मनी लॉन्ड्रिंग काम करता था, ये समझना जरूरी है.''
के अन्नामलाई ने कहा कि तमिलनाडु बीजेपी ईडी से इस केस की गहराई से जांच करने और यह सुनिश्चित करने का अनुरोध करती है कि जफर सादिक के नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए. डीएमके शासन में तमिलनाडु में ड्रग्स के मुक्त प्रवाह को रोका जाए. एनसीबी के उप महानिदेशक ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा कि सादिक के तमिल और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में गहरे संबंध मिले हैं. कई हाई प्रोफाइल लोगों के साथ संबंध के अलावा पॉलिटिकल फंडिंग के कुछ मामले भी एजेंसी की जांच के दायरे में हैं. इस मामले संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए समन भेजा जाएगा.
ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा, "एनसीबी निष्पक्ष और वैध जांच करने में विश्वास करती है. एक अपराधी की कोई जाति, धर्म या राजनीतिक पार्टी नहीं होती है. जो कोई भी एनडीपीएस कानून का उल्लंघन करता है वो अपराधी है. हम ऐसी किसी भी मामले की जांच करेंगे." उनसे जब पूछा गया कि क्या कोई राजनीतिक व्यक्ति भी एजेंसी की जांच के दायरे में है तो उन्होंने कहा, ''हम इस मामले में ड्रग मनी ट्रेल की गहनता से जांच करेंगे.'' उन्होंने कहा कि सादिक का असली नाम जफर सादिक अब्दुल रहमान है. फरवरी में एनसीबी के दिल्ली में छापे के तुरंत बाद वो फरार हो गया था.
एनसीबी द्वारा पकड़े जाने से पहले वो चेन्नई से तिरुवनंतपुरम, मुंबई, पुणे, अहमदाबाद और जयपुर लगातार यात्रा कर रहा था. लेकिन खुफिया जानकारी के आधार पर उसे दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया गया. वो भारत से ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और मलेशिया में फैले एक इंटरनेशनल ड्रग्स रैकेट का "मास्टरमाइंड और किंगपिन" है. पूछताछ के दौरान सादिक ने एनसीबी को बताया कि वो डीएमके की एनआरआई शाखा का चेन्नई पश्चिम उप आयोजक था. पिछले महीने ड्रग्स रैकेट में उसका नाम आने के बाद सत्तारूढ़ द्रमुक ने उसे अपनी पार्टी से निष्कासित कर दिया था.
पिछले महीने एनसीबी ने कहा इस ड्रग्स सिंडिकेट से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जो तमिलनाडु के रहने वाले थे. दिल्ली के बसई दारापुर इलाके में सादिक की कंपनी एवेंटा के एक गोदाम में छापेमारी के दौरान 50 किलोग्राम नशीले पदार्थ बनाने वाला रसायन स्यूडोएफ़ेड्रिन जब्त किया था. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के साथ एनसीबी की ये छापेमापी ऑस्ट्रेलियाई और न्यूजीलैंड के अधिकारियों से मिली गुप्त सूचना के आधार पर हुई थी. इसमें कहा गया था कि भारत से नारियल पाउडर और मिश्रित खाद्य पाउडर में बड़ी मात्रा में स्यूडोएफ़ेड्रिन छुपाकर भेजी जा रही है.
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एनसीबी ने बताया कि यूएस डीईए (ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन) के एक अतिरिक्त इनपुट से संकेत मिला कि ड्रग्स की इन खेपों का स्रोत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में था. जफर सादिक ने ड्रग्स के काले कारोबार से अर्जित धन को फिल्म निर्माण, रियल एस्टेट और कई व्यवसायों में निवेश किया है. इन पैसों से उसने तमिल फिल्म "मंगई" का निर्माण किया है, जिसका ट्रेलर रिलीज किया जा चुका है. फिल्म रिलीज होने वाली है. उसने चेन्नई में एक होटल भी बनाया है. इतना ही नहीं जफर नशीले पदार्थों की तस्करी में प्रति किलोग्राम एक लाख रुपए "कट" (कमीशन) लेता था.
इस मामले के खुलासे के बाद तमिलनाडु में राजनीति भी शुरू हो गई. बीजेपी के साथ अन्नाद्रमुक ने भी डीएमके पर आरोप लगाया है कि उसने सूबे को ड्रग्स का अड्डा बना दिया है. अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को लोगों को स्पष्टीकरण देना चाहिए कि जफर सादिक ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तक अपनी पहुंच कैसे बनाई. उन्होंने कहा, "जफर द्रमुक नेतृत्व का करीबी बन गया और यहां तक कि उसने एक डीजीपी से उपहार भी प्राप्त किया. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है. इसकी कड़ी से कड़ी निंदा की जानी चाहिए."