अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला, कपिल सांगवान, हिमांशु भाऊ, रोहित गोदारा, गोल्डी बराड़, लकी पटियाल, लखबीर सिंह लांडा, राशिद केबलवाला, दीपक पाकसमा और दानिश कुरैशी...ये वो 10 नाम हैं, जो इस वक्त भारतीय खुफिया एजेंसियों के लिए सिरदर्द बने हैं. वजह ये किन ये सारे के सारे नाम इस वक्त भारत में नहीं बल्कि भारत से सैकड़ों मील दूर विदेशों छुपे बैठे हैं. वहीं से बैठे-बैठे ये अपने गुर्गों के सहारे जब चाहे जिसे चाहें भारत में लोगों को टार्गेट करते हैं. लेकिन अब इस कहानी में हद ये है कि ये सारे के सारे गैंगस्टर अब विदेशी ताकतों के हाथों में मोहरों की तरह खेलने लगे हैं. इनमें से कई भारत में ही आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रच रहे हैं.
भारत ने गैंगस्टर लखबीर सिंह लांडा के बाद जिस तरह से गोल्डी बराड़ को एक आतंकवादी करार दिया है, उसके क्या मायने हैं? आखिर इससे क्या बदलने वाला है? इसका जवाब है कि इससे कनाडा सरकार पर सीधा दबाव बनेगा कि वो भारत में गड़बड़ी फैलाने वाले आतंकियों को अपने यहां शरण देकर ठीक नहीं कर रहा है. उसे या तो इन आतंकियों को भारत के हवाले करना चाहिए या फिर इन आतंकियों को वो शरण देने से ही मना कर दे. कनाडा में रहने वाले लखबीर सिंह लांडा पर भी इसी तरह के कामों के चलते यूपीए लगाया जा चुका है. केंद्र ने लखबीर लांडा पर भी नोटिफिकेशन निकाला है. इसके अनुसार वो हथियार और विस्फोटक तस्करी के जरिए भारत पहुंचाता है.
लखबीर सिंह लांडा हिंदुस्तान में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देता है. ये भी कनाडा में रह रहा है. इसी तरह गुरपतवंत सिंह पन्नू का नाम भी इस लिस्ट में है, लेकिन वो कनाडा नहीं बल्कि अमेरिका में संरक्षण लिए हुए है. उसके पास अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता है. असल में किसी को आतंकवादी करार देने पर उसे शहरण देने वाले तो उस देश पर दबाव रहता है कि वो उस शरणार्थी को वापस लौटा दे. मसलन गोल्डी बराड़ को आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद इंटरपोल-ओटावा फ्यूजिटिव एप्रिहेंशन सपोर्ट टीम ने उसकी खोजबीन शुरू कर दी है. वो फिलहाल कनाडा के 25 सबसे मोस्ट वॉन्टेड शरणार्थियों में से एक है. रॉयल कनाडियन पुलिस उसके बारे में तहकीकात कर ही है.
मुंबई अंडरवर्ल्ड जैसी है इन गैंगस्टर्स की मॉडस ऑपरेंडी
भारतीय एजेंसियों की मानें तो सभी गैंगस्टर मुंबई अंडरवर्ल्ड की मॉडस ऑपरेंडी के तर्ज पर काम करने लगे हैं. इसके तहत उनका टार्गेट और ऑपरेशन एरिया बेशक भारत में हो, लेकिन वो खुद विदेशों में छुपे रहते हैं. कनाडा में रहने वाले एक आतंकवादी अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला को लीजिए. उसने पिछले साल उत्तर पूर्वी दिल्ली में एक शख्स की आतंकी संगठनों की तर्ज पर गला रेत कर हत्या करा दी थी, ताकि भारत में सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काया जा सके. असल में कनाडा में मारे गए खालिस्तानी आतंकी हरजीत सिंह निज्जर भी इस टार्गेट किलिंग में शामिल था, जिसमें उसने एक ऐसे हिंदुवादी नेता को टार्गेट किया था, जिससे लोगों में रोष पैदा हो जाए और दंगे हो सके.
गोगमेड़ी हत्याकांड के बाद चर्चा में आया रोहित गोदारा
इसी तरह यूके में छुपे गैंगस्टर कपिल सांगवान ने दिल्ली में ही सुरेंद्र मटियाला नाम के एक बीजेपी नेता की अप्रैल 2023 में हत्या करा दी थी. ये सारे के सारे गैंगस्टर और आतंकी फिलहाल भारतीय एजेंसियों के मोस्ट वॉन्टेड हैं. लेकिन राजस्थान में हुए करणी सेना प्रमुख सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या के बाद गैंगस्टर रोहित गोदारा अचानक से चर्चा में आ गया है. असल में राजपूत नेता गोगामेड़ी की हत्या की साजिश ना सिर्फ गोदारा ने रची, बल्कि उसने सोशल मीडिया पर अपने आका गोल्डी बराड़ के साथ मिलकर उसकी हत्या करवाने का दम भी भरा. वो गोदारा पुर्तगाल या अजरबैजान जैसे किसी देश में छुपा बैठा है. दूसरे गैंगस्टरों की तरह ये भी फर्जी पासपोर्ट के जरिए भागने में कामयाब हो गया था.
मूसेवाला हत्याकांड में सामने आया गोल्डी बराड़ का नाम
बंबिहा गैंग से जुड़े लकी पटियाल के बारे में कहा जाता है कि वो पहले कनाडा में छुपा था, लेकिन जब गोल्डी बराड़ ने वहां अपना एक छत्र राज कायम करना शुरू किया, तो भाग कर अमेरिका चला गया. असल में पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के कत्ल के बाद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से इस वारदात का बदला लेने की बात कह कर लकी पटियाल सुर्खियों में आ गया था. दूसरे गैंगस्टर की तरह लकी पर भी दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में एक्सटॉर्शन रैकेट चलाने का आरोप है. पिछले साल मई के महीने में तिहाड़ जेल में गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी गई थी. दिल्ली में कई ऐसे गैंग सक्रिय हैं, जो एक साथ मिलकर काम करते हैं. इनके कई गठजोड़ बन चुके हैं, जो दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में ऑपरेट करते हैं. इनके सरगना विदेश में बैठे हुए या जेल में रहते हुए भी अपना क्राइम सिंडिकेट चलाते हैं. आपराधिक वारदातों को अंजाम देते हैं.
भारतीय एजेंसियों के लिए सिरदर्द बने ये 10 गैंगस्टर...
1. अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला
2. कपिल सांगवान
3. हिमांशु भाऊ
4. रोहित गोदारा
5. गोल्डी बराड़
6. लकी पटियाल
7. लखबीर सिंह लांडा
9. दीपक पाकसमा
10. दानिश कुरैशी
700 शूटर्स, 5 लाख इनाम, देश के दुश्मनों का जिगरी दोस्त, जानिए कौन है खूंखार गैंगस्टर अर्श डल्ला?
पाकिस्तानी और खालिस्तानी आतंकवादियों के साथ देश के दुश्मनों की एक नई फौज तैयार हो रही है. आतंकियों की ये फौज सात समंदर पार कनाडा में बैठकर हिंदुस्तान में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रही है. इनकी वजह से अंडरवर्ल्ड के बाद अब एक नए तरह का संगठित अपराध तेजी से अपने पैर पसार रहा है. हालांकि, देश की सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस इन पर लगाम लगाने की पूरी कोशिश कर रही हैं. इनके खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई भी करती हैं. ताजा मामला, कनाडा में बैठे खालिस्तानी आतंकी अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला से जुड़ा है. उसके दो खतरनाक शार्प शूटर्स को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया है.
खालिस्तानी आतंकवादियों की गैंग में शामिल हो चुका गैंगस्टर अर्श डल्ला राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए, दिल्ली पुलिस और पंजाब पुलिस की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में है. उसके 700 से ज्यादा शूटर्स हिंदुस्तान में सक्रिय हैं. उसके एक इशारे पर किसी की भी जान ले सकते हैं. उसका गैंग एक्सटॉर्शन, टेरर फंडिंग, फाइनेंसिंग, टारगेट किलिंग, ड्रग्स स्मगलिंग के साथ पंजाब में नफरत और दहशत फैलाने का काम करता है. इसी बीच दिल्ली पुलिस को सूचना मिली कि उसके दो शार्प शूटर्स एक पंजाबी सिंगर एली मंगत पर हमले की साजिश रच रहे हैं. इसके लिए दिल्ली आने वाले हैं. पुलिस ने जाल बिछाया और उन्हें मयूर विहार के पास घेर लिया.
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एक वक्त था जब पंजाब उपजाऊ खेत और लहलहाती फसल के लिए जाना जाता था. देश में होने वाले अनाज का एक बड़ा हिस्सा यहीं से पैदा किया जाता था. यहां के लोग मेहनती होने के साथ ही जीवन को आनंद से जीने के लिए जाने जाते थे. लेकिन वक्त बदला, तो लोगों में भी बदलाव आना शुरू हो गया. नई पीढ़ी नशे के जाल में इस कदर जकड़ गई कि जरायम की दुनिया में उनके कदम कब बढ़ गए पता ही नहीं चला. छोटे-मोटे अपराध को अंजाम देते-देते संगठित अपराध करने लगे. धीरे-धीरे कई गैंग बन गए. इनका मुख्य काम रंगदारी वसूलना, हथियारों और ड्रग्स की तस्करी करना बन गया. जब पुलिस का दबाव बना तो इन गैंग के सरगना देश के दुश्मनों के सहयोग से कनाडा और अमेरिका में पहुंच गए.
लॉरेंस बिश्नोई से लेकर बब्बर खालसा तक कई गैंग और आतंकी संगठन विदेशों में बैठकर संचालित किए जा रहे हैं. इनके टारगेट पर ज्यादातर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के नाबालिग बच्चे होते हैं. इनसे ऐप और सोशल मीडिया के जरिए संपर्क किया जाता है. उनको पैसों का लालच देकर बड़ी वारदातों को अंजाम दिलवाया जाता है. कुछ इसी तरह पंजाब के तरनतारन जिले का रहने वाला लखबीर सिंह एक गैंग के संपर्क में आया था. उनके इशारे पर हथियारों को एक-जगह से दूसरे जगह पर ले जाने का काम करता था. चूंकि नया लकड़ा था, कोई हिस्ट्रीशीट नहीं थी, इसलिए पुलिस को भी उस पर शक नहीं होता था. लेकिन साल 2011 में पहली बार उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया.
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कनाडा में रहते हुए भारत में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने वाले गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के खिलाफ केंद्र सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. उसको गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवादी घोषित किया गया है. कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के राइट हैंड कहे जाने वाले गोल्डी को पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला मर्डर केस का मास्टरमाइंड माना जाता है. उसके इशारे पर ही बिश्नोई गैंग के गुर्गों ने सिंगर की हत्या की थी. गैंगस्टर गोल्डी बराड़ का असली नाम सतिंदर सिंह उर्फ सतिंदर सिंहजीत सिंह है.
वो साल 2021 में भारत से कनाडा भाग गया था. उसके बाद से ही कभी कनाडा तो कभी अमेरिका में रहकर आपराधिक और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है. वहां से एक मॉड्यूल के जरिए पंजाब सहित कई राज्यों में वारदातें करवाता है. गृह मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन में उसे आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से संबद्ध बताया गया है. बताते चलें कि जांच एजेंसियों को गोल्डी बराड़ की लास्ट लोकेशन अमेरिका में ही मिली थी. जानकारी के मुताबिक गोल्डी अमेरिका में ही फर्जी नाम से रह रहा है.
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