ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया, जाने क्यों आज तेरे नाम पे रोना आया; यूं तो हर शाम उम्मीदों में गुजर जाती थी, आज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया... मशहूर शायर और गीतकार शकील बदायूंनी द्वारा लिखी गई ये पंक्तियां उन तमाम प्रेमियों पर सटीक बैठती हैं, जिनकी मोहब्बत मुकम्मल नहीं हो पाती. इश्क की राह पर तो बहुत चले हैं, लेकिन मंजिल हर किसी को नहीं मिल पाती. कई बार जमाना दुश्मन हो जाता है, तो कई बार प्रेमी या प्रेमिका रास्ते में लगने वाली ठोकर से गिर जाते हैं. कुछ फिसल जाते हैं, तो कुछ बदल जाते हैं. ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के इदौंर में सामने आया है. यहां अभिषेक और स्नेहा की प्रेम कहानी दिल झकझोर देने वाली है, जिसमें बेवफाई विलन की भूमिका में है, जो एक सुखद प्यार के दुखद अंत की वजह बनती है.
गुरुवार, 2 अप्रैल दोपहर 1.30 बजे. मध्य प्रदेश के इदौंर शहर के भंवरकुआं थाना इलाके में मौजूद स्वामी नारायण मंदिर में दोपहर को तीन नौजवान दर्शन के लिए पहुंचे थे. जूनी इंदौर की रहने वाली स्टूडेंट स्नेहा जाट अपने कजन दीपक जाट के साथ यहां आई थी, जबकि उसका एक दोस्त अभिषेक यादव यहां दोनों से कुछ बातें करने पहुंचा था. मंदिर में दर्शन करने के बाद तीनों ने वहीं बैठ कर एक दूसरे से देर तक बातें की, लेकिन अचानक ताबड़तोड़ चली गोलियों ने लोगों को सन्नाटे में डाल दिया. किसी के कुछ समझने से पहले ही मौके पर तीन लाशें पड़ी थी.
चश्मदीदों की मानें तो अभिषेक ने पहले अपनी गर्लफ्रेंड स्नेहा, उसके कजन को गोली मारी और फिर भागता हुआ मंदिर से निकल कर पास के अरिहंत कॉलेज में पहुंच गया. वहां पहुंचते ही उसने कॉलेज के सिक्योरिटी गार्ड से पानी मांगा. गार्ड ने उसे प्याऊ का रास्ता भी बताया, लेकिन अचानक उसने पानी पीने का इरादा बदल लिया और खुद को गोली मार कर वहीं ढेर हो गया. इस मामले की जांच कर रही पुलिस ने अपनी शुरुआती तफ्तीश में इसे 'लव रिजेक्शन' यानी प्यार में ठुकराए जाने का मामला बताया है. इसी आधार पर पुलिस इस मामले की जांच भी कर रही है.
इंदौर पुलिस की मानें तो हमालवर अभिषेक, स्नेहा से प्यार करता था, लेकिन स्नेहा ने इससे इनकार कर दिया था. उसका ये इनकार ही तीन मौतों की वजह बन गया. वैसे तो पुलिस की तफ्तीश अपनी जगह है. लेकिन हमलावर अभिषेक का अपने और स्नेहा के रिलेशनशिप को लेकर जो बातें लिखी हैं, अपने आप में वो काफी कुछ कहती हैं. अभिषेक ने अपने इश्क की दास्तान में उन हर बातों को जिक्र किया है, जो उसके साथ हुई हैं. कैसे प्यार हुआ, कैसे प्यार परवान चढ़ा और कैसे उनका इश्क खूनी अंजाम तक पहुंचा. सब कुछ मतलब सब कुछ, उसने पूरी कहानी कह डाली है.
अभिषेक और स्नेहा की दिल झकझोर देने वाली दास्तान...
अभिषेक ने लिखा है, ''आप सबको अपने बारे में बताने जा रहा हूं. आप मैसेज को ध्यान से पढ़ना. जो भी बोलूंगा, आपको उसका स्क्रीनशॉट का प्रूफ भी दूंगा. वो और मैं दिसंबर 2019 में करीब आए. मैंने कहा था कि शादी नहीं करूंगा. रिलेशनशिप में रह सकते हैं तो ठीक. वर्ना कोई बात नहीं. उसने मुझसे कहा कि यदि शादी करोगे तो ही रिलेशनशिप में रहूंगी. वरना नहीं रहूंगी. इसके बाद कुछ दिन के लिए हमारी बात बंद हो गई. कुछ दिनों बाद उसने कहा कि ठीक है शादी नही करेंगे. रिलेशनशिप को ही आगे बढ़ाते हैं. मैंने कहा फिर ठीक है. उस टाइम हमारी ज्यादा बात नहीं हुआ करती थी. उसके बाद लॉकडाउन आ गया. तब मोबाइल पर हमारी ज्यादा बातें होने लगी और प्यार बढ़ता चला गया. अटैचमेंट हो गया. लॉकडाउन खुला तो मिलने-जुलने लगे. शुरुआत में हम रीजनल पार्क या कैफे में मिला करते थे. वह हमेशा मेरे लिए गिफ्ट लाती थी. मुझसे गिफ्ट नहीं लेती थी और कहती थी कि घर नहीं ले जा सकती. हम कई बार अलग-अलग जगह भी मिलते रहे. हमारा प्यार आगे तक बढ़ता चला गया. इसके बाद वह मुझ पर शादी करने का दवाब बनाने लगी. कहने लगी कि अब मेरे साथ शादी नहीं की तो मर जाऊंगी. ऐसा कर लूंगी, वैसा कर लूंगी. मैंने कहा कि अपनी कास्ट अलग है. शादी नहीं हो पाएगी. घर वाले नहीं मानेंगे. लेकिन वो जिद पर अड़ गई. कहने लगी कि ऐसे तो आप मुझे छोड़ दोगे. इसलिए मुझे शादी करनी है चलो मंदिर में. नहीं तो आप मेरा मरा हुआ मुंह देखोगे. मुझे छोड़ दिया तो आपके घर आ जाऊंगी. यह सुनकर डर गया और तब हमने मंदिर में जाकर शादी कर ली थी.''
अभिषेक आगे लिखता है...''शादी के बाद वो मुझे हसबैंड की तरह बातें करने लगी. हबी लिखकर रोज मैसेज भेजती थी. उसकी केयरिंग देखकर मुझे भी उसके लिए फिलिंग्स आने लगी. इसके बाद हम कई बार मिलते और इंदौर के आसपास घूमने जाया करते. एक दिन हम लोग देवास दर्शन करने गए तो वहां उसने कहा कि माताजी के सामने ही मेरी मांग में सिन्दूर भरो. मैंने कहा कि एक बार मंदिर में शादी कर ली, फिर अब क्यों. कहने लगी कि यहां की बात अलग है. मांग में सिंदूर भरो, वरना कुछ कर लूंगी. तब मैंने सिंदूर मांग में लगाया. ऐसा करके हमारी दो बार शादी हो गई. वह मेरे लिए उपवास करने लगी. सावन सोमवार भी करती थी. करवा चौथ के व्रत भी रख लिए. हमारा रिश्ता मजबूत हो गया था. हंसी-खुशी जी रहे थे. एक दिन उसने कहा कि कोर्ट मैरिज कर लेते हैं. मैंने मना किया तो बोली कि कर लेते हैं कोर्ट मैरिज. कभी घर वाले नहीं माने तो बता देंगे कि कोर्ट मैरिज कर ली है. मान गए तो नहीं बताएंगे. इस पर भी मैंने जैसे-तैसे उसको समझाया. हम दोनों की बॉन्डिंग बहुत ज्यादा अच्छी हो गई. इसके बाद हम लगभग रोजाना मिलने लगे. रोज जब भी बात होती तो शादी की बात किया करती थी कि शादी के बाद ऐसा करेंगे. वैसा करेंगे. वहां घूमने जाएंगे. शादी के बाद के सपने दिखाने लगी थी. मैं भी उसको अपनी वाइफ मानने लगा था. सोचने लगा कि वह कहती है तो ऐसा ही करेंगे. वह कहती थी कि कभी तुमने अब मुझे छोड़ दिया तो उसी दिन मर जाऊंगी. मैंने कहा था कि मैं तो नहीं छोडूंगा, तेरा पता नहीं. सब कुछ अच्छा चल रहा था. मैंने एक पर्सनल रूम रेंट से लिया था और वहां भी मिलते रहे. वो हमेशा अपने घर के बारे में बात किया करती थी. सब कुछ बताया करती थी. हमारा रिलेशन बहुत अच्छा चल रहा था. सब ठीक था. हंसी-खुशी रहते. घूमते थे. 12-13 बार उज्जैन भी गए. देवास-महेश्वर के वॉटरफाल देखे. ऐसी कोई जगह नहीं, जहां हम इंदौर में नहीं गए. फिर हम दोनों के बीच कोई तीसरा इंसान आ जाता है.''
जाहिर है इस डबल मर्डर और सुसाइड की कहानी को बेशक लोग अलग-अलग चश्मे से देख रहे हों, लेकिन अगर अभिषेक की लिखी इन पंक्तियों को यकीन करें, तो ये मामला कम से कम इकतरफा प्यार का तो बिल्कुल भी नहीं था. लड़का और लड़की दोनों एक-दूसरे से बेहद प्यार करते थे. इतना प्यार कि उन्होंने शादी तक कर डाली थी. वो एक बार नहीं तीन बार. दो बार मंदिर में ईश्वर को साक्षी मानकर शादी किया, तो तीसरी बार कोर्ट में अपनी विवाह को कानूनी रूप दे दिया. लेकिन तीसरे इंसान के आ जाने के बाद उनका प्यार नफरत में बदल गया है, जिसका अंजाम सबके सामने है.