राजनीति और अपराध एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं. तभी तो चुनाव में बाहुबलियों और दबंगों की ओट में नेता वोट से अपनी झोली भर लेते हैं. जिसके पास जितना बड़ा बाहुबल होता, वो चुनाव में उतना ही सफल माना जाता है. वैसे बिहार में तो बाहुबलियों का शुरू से ही बोलबाला रहा है. चाहे सीवान के शहाबुद्दीन हो या मोकामा के अनंत सिंह. इनके जुर्म की कहानियां पूरे देश में कुख्यात हैं. aajtak.in बाहुबलियों पर एक सीरीज पेश कर रहा है. इस कड़ी में आज पेश है जन अधिकार पार्टी के मुखिया और सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की कहानी.
बात 1986-87 की है. उन दिनों लालू यादव अपने राजनीतिक जीवन के चढ़ाव पर थे. वह बिहार में विरोधी दल के नेता बनाना चाहते थे. उस समय उनके मकसद को कामयाब करने में एक शख्स ने उनकी सबसे ज्यादा मदद की थी. जी हां, उस शख्स का नाम पप्पू यादव है. बिहार में राजनीति और अपराध के बीच पनपे इस शख्स को बाहुबली के रूप में जाना जाता है. हालांकि वह अपनी इस छवि के लिए सीधे लालू को दोषी ठहराते हैं.
एक दैनिक अखबार को दिए इंटरव्यू में पप्पू कहते हैं, 'मैं तो एक सीधा-सादा छात्र था. लालू का प्रशंसक था. उनको अपना आदर्श मानता था, लेकिन लालू मेरे साथ बार-बार छल करते गए. मुझे बिना अपराध किए ही कुर्सी का नाजायज फायदा उठाते हुए कुख्यात और बाहुबली बना दिया. जब लालू विरोधी दल का नेता बनना चाहते थे, उस समय इस दौड़ में अनूप लाल यादव, मुंशी लाल और सूर्य नारायण भी शामिल थे. मैं अनूप लाल यादव के घर में ही रहता था.
वह बताते हैं, 'इसके बावजूद मैं लालू का समर्थन कर रहा था. मैंने नवल किशोर से बात कर लालू के लिए जमीन तैयार किया. लालू के नेता विरोधी दल बनने के अगले ही दिन पटना के सभी अखबारों में एक खबर प्रकाशित हुई कि कांग्रेस नेता शिवचंद्र झा की हत्या करने के लिए पूर्णिया से एक कुख्यात अपराधी पप्पू यादव पटना पहुंचा है. मैं इन सब से बेखबर था. मेरे एक मित्र नवल किशोर मुझे पटना विश्वविद्यालय के पीजी हॉस्टल ले गए.'
पप्पू कहते हैं कि वहां जाकर उनको पता चला कि वह एक कुख्यात अपराधी बन चुके हैं. वह आगे बताते हैं, 'मैं एक ऐसा कुख्यात अपराधी था, जिसके खिलाफ तब तक किसी थाने में कोई केस तक नहीं दर्ज था. मैं तीन दिनों तक अपने एक मित्र गोपाल के कमरे में रहा. वहां से कोलकता गया. पुलिस मेरे पीछे पड़ गई. मेरे घर की कुर्की हो गई. मां-बाप को सड़क पर रात गुजारनी पड़ी. मेरे पिता लालू से मिले, लेकिन उन्होंने मदद से इनकार कर दिया.'
अजित सरकार हत्याकांड में मिली थी उम्रकैद
बताते चलें कि माकपा के पूर्व विधायक अजित सरकार की 14 जून, 1998 को पूर्णिया में अज्ञात लोगों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी. इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई. अजित और पप्पू के बीच किसानों के मुद्दे पर मतभेद था. सीबीआई की विशेष अदालत ने 2008 में इस हत्याकांड में पप्पू यादव, राजन तिवारी और अनिल यादव को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. बाद में पटना हाईकोर्ट ने 2008 में पप्पू को रिहा कर दिया था.
फिल्मी है पप्पू और रंजीत की प्रेम कहानी
पप्पू यादव और उनकी पत्नी रंजीत की प्रेम कहानी पूरी फिल्मी है. पटना की बांकीपुर जेल में बंद वह अक्सर जेल अधीक्षक के आवास से लगे मैदान में लड़कों को खेलते देखा करते थे. इन लड़कों में रंजीत के छोटे भाई विक्की भी थे. इसी दौरान विक्की से पप्पू की दोस्ती हो गई. एक दिन विक्की ने उनको अपनी फैमिली एलबम दिखाई. उसमें उनकी बहन रंजीत की टेनिस खेलती एक तस्वीर थी.
फोटो देखकर रंजीत पर हुए फिदा
अपनी बायोग्राफी 'द्रोहकाल का पथिक' में पप्पू यादव ने अपने प्रेम कहानी का विस्तार से वर्णन किया है. वह लिखते हैं कि एलबम में रंजीत की फोटो देखकर उन पर फिदा हो गए. जेल से छूटने के बाद रंजीत से मिलने के लिए अक्सर टेनिस क्लब में पहुंच जाते थे. रंजीत को उनका आना अच्छा नहीं लगता था. उन्होंने पप्पू को कई बार मना किया, लेकिन वह वहां डटे रहे. इस बीच रंजीत की बेरूखी जारी रही.
प्यार में नाकामी पर खुदकुशी की कोशिश
पप्पू यादव ने अपनी बायोग्राफी में लिखा है कि प्रेम में असफलता मिलती देख एक दिन परेशान होकर उन्होंने खुदकुशी करने की कोशिश की थी. इसके लिए उन्होंने ढेर सारी नींद की गोलियां खा ली. गंभीर हालत में उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया. काफी दिनों बाद उनकी सेहत में सुधार हुआ. इस बीच रंजीत को उनके प्यार का अहसास हुआ और वह उनको चाहने लगी. लेकिन अब इस प्यार के बीच परिवार आड़े आ गया.
प्यार में बनी बात तो परिवार आया आड़े
बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में पप्पू यादव ने बताया था कि रंजीत के पिता ग्रंथी थे. वह शुरू से ही उनकी शादी के खिलाफ थे. लेकिन पप्पू यादव के आनंद मार्गी पिता चंद्र नारायण प्रसाद और माता शांति प्रिया की ओर से कोई समस्या नहीं थी. वे दोनों इस शादी के पक्ष में थे. कांग्रेसी नेता एसएस अाहलूवालिया की मदद से पप्पू यादव रंजीत के परिवार को मनाने में सफल रहे. पूर्णिया के गुरुद्वारे में दोनों की धूमधाम से शादी हुई.
बहन डॉक्टर, बेटा क्रिकेटर
पप्पू यादव के परिवार में उनके माता-पिता के अलावा एक छोटी बहन हैं, जो डॉक्टर हैं. उनके बहनोई फर्रुखाबाद में कई मेडिकल कॉलेज चलाते हैं. पप्पू का एक बेटा और एक बेटी है. बेटे सार्थक रंजन दिल्ली अंडर-19 क्रिकेट टीम के उप कप्तान हैं, जबकि उनकी बेटी दिल्ली में पढ़ती है. पप्पू को भरोसा है कि उनका बेटा एक दिन इंडिया के लिए जरूर खेलेगा. वह ऑलराउंडर है.
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