हाथरस कांड में पुलिस प्रशासन की भारी लापरवाही सामने आई है. इस मामले में पुलिस परिवार से अलग कहानी बयां कर रही है. जिस पर किसी को यकीन नहीं है. इस मामले में कई अलग-अलग पहलू सामने आ रहे हैं. लेकिन पुलिस ने जो कहानी गढ़ी है, उसका पीड़िता के परिवार की आपबीती से कोई मेल नहीं है. हम आपको बताते हैं कि इस मामले में कौन क्या कह रहा है.
भाई की तहरीर पर पहली एफआईआर
पीड़िता के भाई ने सबसे पहले दर्ज कराई गई एफआईआर में बताया कि आरोपी संदीप खेत में उसकी बहन का गला घोंटने की कोशिश कर रहा था. उसकी चीख-पुकार सुनकर जब मां वहां पहुंची तो आरोपी वहां से फरार हो गया. पहली शिकायत में पीड़िता के भाई ने सिर्फ एक आरोपी संदीप का नाम लिखवाया था. अपनी शिकायत में उन्होंने वारदात का वक्त 9.30 बजे का लिखवाया था. उसके बाद एससी / एसटी अधिनियम और आईपीसी की धारा 307 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. पुलिस के अनुसार, एफआईआर को दर्ज करने से पहले पीड़िता के भाई को तहरीर पढ़वाई गई और उसकी सहमति के बाद मुकदमा लिखा गया.
पहली एफआईआर में मां का बयान
जब मैंने अपनी बेटी को वहां देखा, तो वह नग्न अवस्था में पड़ी हुई थी और उसके शरीर से बहुत ही खून बह रहा था. मैंने उसे अपने दुपट्टे और उसके खून से लथपथ कपड़ों से ढंक दिया. हम बेहद असमंजस में थे और एकदम सदमे की हालत में थे. हमारी बेटी बेहोश थी. जाहिर है, हम हाथरस के चंदपा पुलिस थाने में पुलिस को बलात्कार या सामूहिक बलात्कार का बयान नहीं दे सकते थे, जहां पहली प्राथमिकी दर्ज की गई थी. क्योंकि तब तक हमें नहीं पता था कि बेटी के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था. हमारी बेटी ने अपने भाइयों के कान में एक आरोपी संदीप का नाम लिया और बेहोश हो गई. तो हमने सोचा कि गांव में रहने वाले संदीप नाम के लड़के ने उसकी पिटाई की है. यही सब पहली एफआईआर में भी दर्ज है.
पीड़िता के भाई का बयान
पहली एफआईआर मेरे और मेरी मां के बयान के आधार पर दर्ज की गई थी. मेरी बहन बयान देने की हालत में नहीं थी. वह बेहोश थी. तब तक हमें यह भी नहीं पता था कि उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ है. तो जाहिर है कि हमने अपने बयान में ऐसा कुछ नहीं कहा. हमारे गांव के एक लड़के पर हमें शक था, हमने शिकायत में उसका नाम लिया. उसका नाम संदीप है. हमने पुलिस से शारीरिक हमले की धाराएं लगाने को कहा. क्योंकि हम नहीं जानते थे कि मेरी बहन के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था. अलीगढ़ के JNMC अस्पताल के ICU के अंदर 15 तारीख को उसे होश आया, लेकिन वह किसी भी हाल में अपना बयान देने की हालत में नहीं थी.
पीड़िता के भाई के अनुसार पुलिस 20 तारीख को अस्पताल आई लेकिन बहन उस दिन भी अपना बयान नहीं दे सकी. उसकी हालत खराब थी. मेरी बहन ने 22 तारीख को अपना बयान दिया. इसके बाद दूसरी एफआईआर दर्ज की गई. और सामूहिक बलात्कार और हत्या की कोशिश की धाराएं जोड़ी गईं. मैंने अपनी बहन को देखा. मैंने उसकी हालत देखी. उसकी गर्दन टूट गई थी. उसकी जीभ कट गई थी. पूरी तरह से नहीं बल्कि कटी हुई थी. उसने मुझे बताया कि उसकी जीभ दांतों के बीच आकर कट गई.
लड़की के बयान से आई गैंगरेप की थ्योरी
परिवार और पुलिस के अनुसार बीती 22 सितंबर को पहली बार पीड़ित लड़की ने गैंगरेप के बारे में उल्लेख किया और अन्य तीन अभियुक्तों के नाम भी बताए. इसके बाद एफआईआर में धारा बदली गई और फिर 23, 25 और 26 सितंबर को तीनों नामजद अभियुक्त गिरफ्तार कर लिए गए.
हाथरस के पुलिस अधीक्षक विक्रांत वीर का बयान
एसपी विक्रांत वीर के अनुसार हाथरस या अलीगढ़ के किसी भी डॉक्टर द्वारा लड़की का यौन उत्पीड़न किए जाने की पुष्टि नहीं की गई है. इसलिए, इस मामले की जांच डॉक्टर फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से करेंगे. एसपी के मुताबिक लड़की के प्राइवेट पार्ट पर घर्षण के कोई संकेत या निशान नहीं हैं. एसपी का दावा है कि जीभ काटने की खबर पूरी तरह से गलत है, हमने पीड़ित का बयान दर्ज किया था. इसके अलावा, कुछ ऐसी खबरें आई हैं कि उसकी रीढ़ टूट गई है, यह गलत है, उसकी गला घोंटकर हत्या की कोशिश की गई और गर्दन की हड्डी पर चोटें आईं. जिससे मामला जटिल हो गया.
जेएनएमसीएच, एएमयू, अलीगढ़ का बयान
अस्पताल प्रशासन के अनुसार पीड़िता को 14 सितंबर 2020 की शाम 4 बजकर 10 मिनट पर भर्ती कराया गया था. अस्पताल में भर्ती के समय मरीज के यौन उत्पीड़न का कोई इतिहास नहीं दिया गया था. उसने 22 सितंबर 2020 को पहली बार घटना के बारे में बताया. इसके बाद 22 सितंबर, 2020 की दोपहर 12.30 बजे उसका चिकित्सा परीक्षण शुरू हुआ. अपनी मेडिकल रिपोर्ट में डॉक्टरों ने कहा कि उसके साथ जबरदस्ती और बल प्रयोग के संकेत मिले हैं, हालांकि संभोग के संबंध में एफएसएल रिपोर्ट अभी लंबित है. उनकी रिपोर्ट में, यह भी उल्लेख किया गया कि दुपट्टे से पीड़िता का गला घोंट दिया गया था. किसी भी हथियार का उपयोग नहीं किया गया था. उसे मारा गया. उसे मारने की धमकी भी दी गई थी. इसके बाद पीड़िता भी होश खो बैठी.
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ एमएफ हुदा का बयान
जेएनसी मेडिकल कॉलेज के न्यूरोसर्जरी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ एमएफ हुदा ने बताया कि 14 सितंबर की रात को लड़की को हमारे अस्पताल में लाया गया था. उसके शरीर पर बड़ी चोट थी. उसकी रीढ़ टूट गई थी. रीढ़ की हड्डी में चोट की वजह से उसके पूरे शरीर को लकवा मार गया था. किसी अन्य हमले का कोई सुराग नहीं था. कोई बाहरी रक्तस्राव नहीं था. लेकिन हां, लड़की बेहोश थी. जांच में फोरेंसिक टीम भी शामिल थी. वो इस बात को ज्यादा बेहतर तरीके से समझ सकेंगे कि लड़की के शरीर में ऐसे कौन से सबूत पाए गए जो बलात्कार साबित करते हैं.
डॉ हुदा के मुताबिक पीड़िता की जीभ नहीं काटी गई थी, लेकिन उसकी जीभ पर एक अल्सर था. यह कोई पुरानी चोट भी हो सकती है. जरूरी नहीं कि घटना के दौरान ये हुआ हो. उसकी जीभ पर कोई अन्य चोट नहीं थी. वह बोलने में सक्षम थी. लड़की केवल 22 सितंबर को थोड़ी बेहतर हालत में थी, तो उस दिन मजिस्ट्रेट आए और लड़की ने अपना बयान दिया.
मौत का संभावित कारण
डॉक्टर हुदा के अनुसार मौत की वजह फाइनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद सामने आएगी. लेकिन जिस तरह उसकी रीढ़ की हड्डी को नुकसान हुआ, वह किसी इंसान को मारने के लिए काफी था. हालांकि पीएम रिपोर्ट अभी भी प्रतीक्षित है, जो वास्तव में मौत का असली कारण उजागर करेगी.
सफदरजंग अस्पताल की प्रवक्ता का बयान
सफदरजंग अस्पताल की प्रवक्ता का कहना है कि पीड़ित लड़की को सर्वाइकल, स्पाइन में चोट थी. उसे क्वाड्रीप्लेजिया और सेप्टीसीमिया था. लड़की को 28 सितंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया. और मंगलवार की सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर उसकी मृत्यु हो गई. उसके शव का परीक्षण डॉक्टरों के एक पैनल ने किया. जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में यूपी पुलिस को भेजा जाएगा.