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हाथरस कांडः छोटे शहर की बड़ी वारदात, पुलिस-प्रशासन पर सवालिया निशान!

हाथरस कांड की खौफनाक दास्तान किसी इंसान का भी दिल चीरने करने के लिए काफी है. हाथरस की एक बेटी पहले दरिंदगी की शिकार होती है और अस्पताल में जब दर्दनाक मौत होती है, तो परिवार को अपनी लाडली का अंतिम संस्कार करने से भी जबरन महरुम कर दिया जाता है.

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पुलिस ने जबरन हाथरस की निर्भया का शव आधी रात को जला दिया
पुलिस ने जबरन हाथरस की निर्भया का शव आधी रात को जला दिया
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हाथरस में पुलिस-प्रशासन पर गुंडई का आरोप
  • घरवालों को कमरे में बंदकर खुद जला दिया शव
  • पुलिस की कार्रवाई से परिजनों में आक्रोश

हाथरस यूपी का एक छोटा सा जिला है लेकिन वहां हुई घटना इतनी बड़ी और भयावह है कि हर कोई सुनकर सहम उठेगा. 14 सितंबर को 19 साल की बेटी के साथ हैवानियत होती है और 15 दिनों तक तड़पने के बाद पीड़िता दम तोड़ देती है. यही नहीं उसके परिवार को पुलिस-प्रशासन की ज्यादती का शिकार भी होना पड़ता है. आखिर क्या हुआ था 14 सितंबर को और कैसे अपनी मौत से पहले तक हाथरस की बेटी जिंदगी के लिए लड़ती रही. आइए आपको बताते हैं.

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हाथरस कांड की खौफनाक दास्तान किसी इंसान का भी दिल चीरने करने के लिए काफी है. हाथरस की एक बेटी पहले दरिंदगी की शिकार होती है और अस्पताल में जब दर्दनाक मौत होती है, तो परिवार को अपनी लाडली का अंतिम संस्कार करने से भी जबरन महरुम कर दिया जाता है. एक 19 साल की बेटी के मां-बाप के लिए इससे बड़ी त्रासदी और कुछ नहीं हो सकती.

इस वक्त पूरा देश जानना चाहता है कि आखिर हाथरस कांड में हुआ क्या था. कैसे तिल-तिलकर हिंदुस्तान की एक बेटी की सांसे उसका साथ छोड़ती गई. और कहां-कहां सिस्टम और पुलिस-प्रशासन ने इस बिटिया के साथ दगाबाजी की.

दलित लड़की से 14 सितंबर को दरिंदगी. गंभीर तौर से जख्मी हुई पीड़िता. जी हां, वो 14 सितंबर को हाथरस जिले के चंदपा क्षेत्र में 19 साल की लड़की के साथ चार आरोपियों ने ना सिर्फ गैंगरेप किया बल्कि इंसानियत की हर हद को पार कर गए. लड़की को मौत के मुहाने तक पहुंचा कर वारदात को अंजाम देकर चारों फरार हो गए. 

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14 सितंबर को ही देर रात गंभीर रुप से जख्मी पीड़िता को अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया. रीढ़ की हड्डी टूट चुकी थी, पीड़िता का पूरा शरीर लकवे का शिकार हो चुका था. जान बचाने के लिए लड़की को वेंटिलेटर पर रखा गया. फिर 22 सितंबर को अलीगढ़ में इलाज से थोड़ी बरकत हुई तो पीड़िता ने थोड़ी हिम्मत दिखाई. मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में अपना बयान दर्ज कराया.

2 सप्ताह तक अलीगढ़ के अस्पताल में उसका इलाज चलता रहा. लेकिन हैवानों ने उसके शरीर पर इतनी क्रूरता बरती थी कि हालत बद से बदतर होती गई. लड़की की सांसों की डोर जब बेहद कमजोर हुई तो उसे अलीगढ़ से 28 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया.

28 सितंबर से पीड़िता का इलाज दिल्ली के मशहूर सफदरजंग अस्पताल में शुरू हुआ लेकिन शरीर और मन के हर हिस्से पर दरिंदगी का घाव इतना गहरा था कि हाथरस की बेटी को 15 दिन में ही इस दुनिया को अलविदा कहना पड़ा. 4 शैतानों की हैवानियत और प्रशासन की लाचारगी के सामने जिंदगी हार गई.

एक ओर परिवार की हिम्मत इस सदमे से तार-तार हो रही थी तो दूसरी ओर 29-30 सितंबर की देर रात जैसे ही हाथरस की निर्भया का शव हाथरस पहुंचा. पुलिस ने जबरन पीड़िता के मृत शरीर का अंतिम संस्कार कर दिया. इस दौरान उसके घरवालों को कथित रूप से कमरे में बंद कर दिया गया.

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हाथरस के इस शर्मनाक कांड में शामिल सभी चारों दरिंदे गिरफ्तार हो चुके हैं. वो जेल में हैं. शहर-शहर इंसाफ के लिए विरोध प्रदर्शन की बयार है लेकिन क्या इससे परिवार की बेटी वापस लौट आएगी. क्या एक मां-बाप अपनी लाडली के लिए सालों से संजोए सपने को परवान चढ़ा पाएंगे. क्या पुलिस की लापरवाही और संवेदनहीनता को सजा मिलेगी? ये सवाल हर किसी के जेहन में उठ रहा है. 

 

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