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रेप, हत्या और साजिशः सबसे बड़ा सवाल- हाथरस की बेटी का गुनहगार कौन?

पीड़िता के बयान वाला वीडियो वायरल हुआ. जिसमें वो आपबीती सुना रही है. हाथरस की पीड़ित बेटी का बयान ठीक उसी दिन का है, जिस दिन उसको इस बेरहमी से पीटा गया कि 15 दिन में उसकी जान चली गई. आखिर क्या हुआ था 14 सितंबर को?

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हाथरस कांड के बाद पीड़ित परिवार कई परेशानियों से जूझ रहा है
हाथरस कांड के बाद पीड़ित परिवार कई परेशानियों से जूझ रहा है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हाथरस कांड के बाद पीड़ित का परिवार परेशान
  • पीड़ित परिवार की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम
  • एसआईटी कर रही है 40 लोगों से पूछताछ

हाथरस कांड को लेकर लगातार इंसाफ की आवाज उठ रही है. पीड़िता ने मरने से पहले अपने बयान में कहा कि उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ. घटना के दिन का एक वीडियो भी सामने आया. पीड़िता का बयान है. पीड़िता का परिवार भी कह रहा है कि किसने मारा. लेकिन आरोपियों के घरवाले कह रहे हैं कि वो बेकसूर हैं. तो फिर सबसे बड़ा सवाल है कि हाथरस की बेटी को किसने मारा?

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पीड़िता के बयान वाला वीडियो वायरल हुआ. जिसमें वो आपबीती सुना रही है. हाथरस की पीड़ित बेटी का बयान ठीक उसी दिन का है, जिस दिन उसको इस बेरहमी से पीटा गया कि 15 दिन में उसकी जान चली गई. आखिर क्या हुआ था 14 सितंबर को? हाथरस के उस खेत में पीड़िता कैसे लहूलुहान हुई? पीड़िता को बेरहमी से किसने मारा? उस दिन मौका-ए-वारदात पर क्या क्या हुआ था?

इन सवालों का जवाब फंसा हुआ है और ये भी सवाल फंसा हुआ है कि हाथरस की पीड़िता को किसने मारा? ऐसे में 14 सितंबर का वो वीडियो सामने आया, जिसमें वो घटना स्थल दिख रहा है, जहां ये सनसनीखेज वारदात हुई थी. वारदात के बाद जब शिकायत मिली थी तो पुलिसवाले जांच के लिए क्राइम सीन पर पहुंचे थे. उस वक्त क्राइम सीन का क्या हाल था, वो वीडियो उसी की गवाही दे रहा है. 

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उस वक्त मौका-ए-वारदात पर चार- चार हंसिया पड़े थे. कपड़े में काटी गई घास पड़ी है. वीडियो में एक चप्पल भी पड़ी हुई दिख रही है. वो वीडियो खुद जांच टीम में शामिल पुलिस वालों ने ही रिकॉर्ड किया था. घटना स्थल पर चार चार हंसिया पड़े हुए हैं. इसका मतलब ये हुआ कि वहां कम से कम चार लोग घास काट रहे होंगे. तो सवाल है कि पीड़िता और उसकी मां के अलावा बाकी दो लोग कौन थे?

सबसे बड़ी बात ये है कि पीड़िता और पीड़िता के मां के बीच 9 कदम की दूरी थी. यानी सिर्फ 3 मीटर की. पुलिस अधिकारी ने खुद चलकर इस दूरी को अपने कदमों से नापा था. तो सवाल है कि सिर्फ 9 कदम की दूरी पर पीड़िता पर हमले की चीख उसकी मां की कानों तक क्यों नहीं पहुंची. आखिर 14 सितंबर की सुबह पीड़िता के साथ हुआ क्या था? उसको मारा किसने?

पीड़िता के परिवार में कुल 8 लोग थे. पीड़िता के माता-पिता, बड़ा भाई और भाभी, एक और बड़ा भाई और दो बड़ी बहनें. इनमें से दोनों बहनों की शादी हो चुकी है और एक भाई दिल्ली के पास कहीं काम करता है. आजतक की टीम उस जगह पर पहुंची, जहां वो काम करता था. उस दुर्भाग्य भरे दिन वो अपनी ड्यूटी पर था. जगह थी गाजियाबाद. विक्टिम का छोटा भाई उस दिन काम कर रहा था. रजिस्टर देखा है. छोटा भाई वहीं काम कर रहा था.

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पुलिस के मुताबिक वो तब गांव गया था, जब उसे खबर मिली कि उसकी बहन के साथ ये सब हुआ. चारों तरफ से घूमकर बात उसी प्वाइंट पर आ जाती है कि हर कोई निर्दोष ही है तो फिर पीड़िता को मारा किसने. जिस तरह घटना वाले दिन अपनी सफाई लेकर चारों आरोपी और उनके घर वाले सामने आ गए, उसके बाद पीड़िता के परिवार वाले बेहद खिन्न हो गए हैं.

परजिनों का कहना है, 'क्या हम पागल हैं कि हम अपनी बेटियों को पालते हैं कि मार देंगे. हर सवाल का एक जवाब है कि क्यों बॉडी जलाई. यहां केवल ठाकुर रहेंगे. एक काम करो कि हम लोगों के लिए जहर लाकर खाने में मिला दो. हम लोग मर जाएंगे तो पता चलेगा.'

एसआईटी की जांच 16 अक्टूबर तक के लिए बढ़ चुकी है. इस बीच उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती 14 सितंबर का सारा सच बेनकाब करना है. इसके लिए उसने गांव के 40 लोगों को नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया है. एसआईटी के पास अब 8 दिन का समय बचा है. तो क्या ये मानकर चला जाए कि 8 दिन बाद बाद इस सवाल का जवाब देश को मिल जाएगा कि हाथरस की पीड़िता बेटी को किसने मारा?

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