उस शख्स ने एक तख्ती पर पहले अपना जुर्म लिखा. फिर नाम लिखा. फिर उस तख्ती को गले में लटका कर सीधे बिकरू थाने पहुंच गया. वो भी अपने परिवार को साथ लेकर. इस फरियाद के साथ कि मेरा एनकाउंटर मत करो. मुझे गिरफ्तार कर लो. बिकरू कांड के बाद से अब तक विकास दुबे समेत छह लोगों का यूपी पुलिस एनकाउंटर कर चुकी है. मगर जिस अंदाज में बिकरू कांड का ये आरोपी खुद थाने पहुंचा उससे कम से कम सातवां एनकाउंटर तो फिलहाल उसने टाल ही दिया है.
बिकरू कांड का पहला एनकाउंटर अतुल दुबे. बिकरू कांड का दूसरा एनकाउंटर प्रेम प्रकाश. बिकरू कांड का तीसरा एनकाउंटर अमर दुबे. बिकरू कांड का चौथा एनकाउंटर बउअन. बिकरू कांड का पांचवा एनकाउंटर प्रभात. बिकरू कांड का छठवां एनकाउंटर विकास दुबे का हुआ. और सातवां एनकाउंटर होना था उमाकांत शुक्ला का, जो होते-होते टल गया. क्योंकि वो गले में तख्ती डालकर थाने पहुंच गया.
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उमाकांत शुक्ला बिकरू कांड के मास्टर माइंड विकास दुबे का साथी है, जो उस रात पुलिसवालों के कत्ल में भी शामिल था. उसके सिर पर पचास हजार का इनाम है. अब उसे अपने एनकाउंटर का डर सता रहा था. इसलिए उसने थाने में आत्मसमर्पण करने का अनोखा तरीका अपनाया. वो अपनी बीवी और बेटी के साथ गले तख्ती डालकर थाने पहुंच गया. वो थाना परिसर में नतमस्तक होकर लेट गया. उसकी पत्नी भी उसका साथ दे रही थी.
पुलिसवाले हैरान होकर ये सब देख रहे थे. पहले तो पुलिस को इस बात का यकीन नहीं हुआ कि वो विकास दुबे का साथी उमाकांत ही है. लेकिन उसकी शिनाख्त और तस्दीक करने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. वो लगातार माफी मांग रहा था. उसकी पत्नी और बेटी भी पुलिस से रहम की गुहार लगा रहे थे. बेटी रहम की भीख मांग रही थी. कह रही थी उसके पापा से गलती हो गई. उसे माफ कर दिया जाए.
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पुलिस ने उमाकांत की पत्नी और बेटी को दिलासा दिया कि परेशान ना हो. इसके बाद उमाकांत के सरेंडर की सूचना आला अधिकारियों को दी गई. तब पुलिस मुख्यालय ने एक प्रेस नोट जारी करके मीडिया को इस बारे में पूरी सूचना दी. उमाकांत के सरेंडर से एक बात तो साफ हो गई कि पुलिस के ताबडतोड़ एनकाउंटर का खौफ अपराधियों में कहीं ना कहीं तो असर कर रहा है.