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यूपी पुलिस के एक इंस्पेक्टर की उनके घर के बाहर ही गोली मारकर हत्या कर दी जाती है. सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर पता चलता है कि वारदात के वक्त हुडी पहने एक शख्स साइकिल पर उसी इलाके में घूम रहा था. मगर उसका चेहरा किसी कैमरे में कैद ना हो सका. इसलिए पुलिस उस तक नहीं पहुंच सकी. उसी दौरान पुलिस को इंस्पेक्टर की कार से एक जीपीएस डिवाइस (GPS Device) बरामद होता है. और फिर एक ऐसी साजिश का खुलासा होता है, जिसे सुनकर हर कोई दहल जाता है.
75 दिनों की खूनी साजिश
करीब 75 दिनों से रची जा रही थी एक खूनी साज़िश और निशाने पर था यूपी पुलिस का एक तेज़-तर्रार इंस्पेक्टर. पुलिस की छानबीन के दौरान इंस्पेक्टर की कार में लगा मिला एक खुफ़िया जीपीएस (GPS). जांच आगे बढ़ी तो सोशल मीडिया के ज़रिए हथियारों की ख़रीदारी का पता चला और फिर दिवाली की रात पटाखों के शोर में फायरिंग तो हुई लेकिन गोलियों की आवाज़ कहीं गुम हो गई. कातिल अपने मकसद में कामयाब हो चुका था.
इंस्पेक्टर का 'परफेक्ट' मर्डर
ये क़रीब-क़रीब एक 'परफेक्ट' मर्डर था. जिसे सुलझाने में यूपी पुलिस को इस कुनकुने मौसम में भी पसीने छूटने लगे. लेकिन क़ातिल की एक ग़लती से ना सिर्फ छह दिनों की कोशिश के बाद ये केस सुलझ गया, बल्कि जब इस मर्डर केस के पीछे छुपे असली किरदारों का पता चला, तो मारे गए पुलिस इंस्पेक्टर के घर वालों के साथ-साथ ख़ुद मामले की जांच कर रही पुलिस भी हैरान रह गई.
12 नवंबर 2023, दिवाली की रात
इस कहानी की शुरुआत होती है इसी दिवाली वाली रात से. लखनऊ के मानस नगर के रहनेवाले पुलिस इंस्पेक्टर सतीश कुमार सिंह अपनी पत्नी भावना और दस साल की छोटी सी बेटी साथ राजाजीपुरम में एक रिश्तेदार के घर दिवाली मनाने गए थे. माहौल बेहद खुशगवार था. लेकिन दिवाली सेलिब्रेशन के बीच ही देर रात भावना की तबीयत कुछ ऐसे बिगड़ी कि उसके लिए अपने रिश्तेदार के घर में एक पल भी रुकना मुश्किल होने लगा. लिहाज़ा, इंस्पेक्टर सतीश अपनी पत्नी और बेटी को साथ लेकर वापस मानस नगर के लिए निकल पड़े. चूंकि पत्नी भावना की तबीयत ज्यादा ही खऱाब थी, वो और उनकी बेटी दोनों गाड़ी की पिछली सीट पर सो गए, जबकि सतीश ड्राइव करते हुए घर तक पहुंचे.
12-13 नवंबर की दरम्यानी रात
लेकिन रात करीब 2 बजे के आस-पास जैसे ही गाड़ी मानस नगर में घर के बाहर रुकी और इंस्पेक्टर सतीश घर का गेट खोलने के लिए गाड़ी से नीचे उतरे, अचानक एक के बाद एक गोलियों की कई आवाज़ें सुनाईं पड़ीं और इंस्पेक्टर सतीश खून से लथपथ होकर अपने घर की दहलीज़ पर लुढ़क गए. पहले तो कार में सो रही भावना और उनकी बच्ची को इस वारदात के बारे में कुछ पता ही नहीं चला, लेकिन जब एक के बाद आख़िरी गोलियों की आवाज़ भावना के कानों में पड़ी और उसने गाड़ी से बाहर झांक कर देखा, तो पाया कि उसके पति इंस्पेक्टर सतीश ज़मीन पर पड़े हुए हैं.
गोली लगने से इंस्पेक्टर की मौत
इसी दौरान भावना की नजर गाड़ी के बगल से तेजी से भागते एक हुडी पहने हुए शख्स पर पड़ी. भावना ने फौरन गाड़ी से उतर कर अपने पति को संभालने की कोशिश की, लेकिन उनकी हालत देख कर घबरा गईं. और बुरी तरह से चिल्ला-चिल्ला कर रोने लगी. भावना ने ही इस वारदात के बारे में पुलिस को इत्तिला दी और आनन-फानन में मौके पर पहुंची पीसीआर और कृष्णानगर थाने की टीम ने सतीश को उठा कर अस्पताल पहुंचाया. लेकिन जब तक उन्हें अस्पताल पहुंचाया जाता, तब तक उनकी जान जा चुकी थी. डॉक्टरों ने इंस्पेक्टर सतीश को मुर्दा करार दे दिया.
कौन था कत्ल के पीछे?
चूंकि मामला क़त्ल का था, पुलिस मामले की खबर मिलने के साथ ही मामले की छानबीन शुरू कर चुकी थी. पुलिस को पता चला कि इंस्पेक्टर सतीश कुमार सिंह पीएसी की एक यूनिट में तैनात हैं और उनकी पोस्टिंग प्रयागराज में थी. सतीश दिवाली की छुट्टियों में कुछ दिन पहले ही घर लौटे थे और अब ये वारदात हो गई. पर सवाल ये था कि आखिर इस वारदात के पीछे कौन था? आधी रात किसने ली इंस्पेक्टर सतीश की जान? क्या थी इस वारदात के पीछे की कहानी? रात के अंधेरे में हुडी पहन कर आया क़ातिल कौन था?
पुलिस ने खंगाली CCTV कैमरों की फुटेज
अब ऐसे कई सवाल पुलिस के सामने थे, उसे जिनकी तह तक जाना था. पुलिस ने मामले की छानबीन के लिए कई टीमें बनाईं, जिन्हें घरवालों से, सतीश के सहकर्मियों से और पड़ोसियों से बातचीत कर उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाने का जिम्मा दिया गया. साथ ही पुलिस की कई टीमें सतीश के घर के आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगालने लगी.
पत्नी भावना ने मृत पति पर लगाया गंभीर इल्जाम
इस छानबीन के दौरान पुलिस को कई चौंकाने वाली बातें पता चलीं. खुद इंस्पेक्टर सतीश की पत्नी भावना ने उनके बारे में कई अजीब बातें बताईं. भावना ने कहा कि उनके पति सतीश बहुत आशिक मिज़ाज किस्म के इंसान थे और शादीशुदा और बाल-बच्चेदार होने के बावजूद उनके ना सिर्फ कई लड़कियों से रिश्ते थे. बल्कि कई बार सतीश उनके घर में होने के बावजूद दूसरी लड़कियों को घर लेकर आते थे. यहां तक कि एक बार उनकी दस साल की बच्ची ने खुद अपने पापा को ऐसा कुछ करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था. भावना का कहना था कि सतीश ने अपने एक दूसरे मकान में ऐसी ही कुछ लड़कियों को किराये पर भी रखा है, जिनसे उसके रिश्ते हैं. सतीश के बारे में ऐसी बातों ने पुलिस को इस पहलू की गहराई से छानबीन करने के लिए मजबूर कर दिया.
बेदाग लड़की तलाश रहे थे इंस्पेक्टर सतीश!
पुलिस सूत्रों की मानें तो सतीश के कई लड़कियों से रिश्ते की बात तो सामने आई ही थी, उन्हें ये भी पता चला कि सतीश कुछ तांत्रिकों के भी संपर्क में थे, जिन्होंने उन्हें ख़ज़ाना पाने के लिए कुछ तंत्र क्रियाओं के बारे में बताया था. इस तरह तंत्र क्रिया के लिए खास कर सतीश को ऐसी अविवाहित लड़की की तलाश थी, जिसके शरीर में कोई दाग़ ना हो. और तो और सतीश ने अपनी इस तलाश का जिक्र अपनी पत्नी से भी किया था. सतीश ने भावना को फतेहपुर के एक तांत्रिक का जिक्र करते हुए ऐसे विधि-विधान की चर्चा की थी. ऐसे में पुलिस ये सोच रही थी कि क्या तंत्र-मंत्र के चक्कर में ही किसी ने सतीश की हत्या कर दी या फिर इस कहानी का राज़ कुछ और है?
नकाबपोश साइकिल सवार पर शक
पुलिस इन तमाम एंगल को एक्सप्लोर तो कर ही रही थी, साथ ही वो सीसीटीवी फुटेज की भी जांच कर रही थी. इसी कड़ी में पुलिस को वारदात वाले समय के आस-पास सतीश के घर के पास अलग-अलग रास्तों से एक साइकिल सवार गुजरता हुआ दिखाई दे रहा था. खास बात ये थी कि साइकिल सवार ने हुडी पहन रखी थी और अपना चेहरा छुपा रखा था, जिससे किसी भी सीसीटीवी कैमरे से उसकी पहचान मुमकिन नहीं हो रही थी. ऐसे में पुलिस को शक होने लगा कि इस वारदात में इस नकाबपोश साइकिल वाले का हाथ हो सकता है.
इंस्पेक्टर सतीश की कार में मिला GPS
दूसरी ओर पुलिस ने जब इंस्पेक्टर सतीश की क्रेटा कार की तलाशी ली, तो ये देख कर हैरान रह गई कि उसमें खुफिया तरीके से एक जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस लगाया गया था, जिससे कार की लोकेशन पता चल सके. पुलिस ने जब इस जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस के सोर्स का पता किया, तो देख कर हैरान रह गई कि जीपीएस की लॉगिन सतीश की पत्नी भावना के भाई देवेंद्र के मोबाइल फोन से की गई थी.
कहानी में आया नया मोड
ये एक अजीब बात थी. तो क्या ये देवेंद्र ही था, जिसने अपने बहनोई सतीश की कार में जीपीएस लगाया था और सतीश के मूवमेंट को लगातार ट्रैक कर रहा था? अब पुलिस ने देवेंद्र के बारे में जानकारी जुटाने के साथ-साथ सीसीटीवी कैमरे में नजर आ रहे उस हुडीवाले साइकिल सवार के साथ देवेंद्र का हुलिया मिलाने की कोशिश की. इत्तेफाक देवेंद्र का हुलिया और उसकी बॉडी लैंग्वेज साइकिल सवार से काफी हद तक मिलती जुलती थी. तो क्या ये देवेंद्र ही था, जिसने अपने बहनोई का क़त्ल किया था? कहानी लगातार नए-नए मोड़ लेती जा रही थी.
कत्ल के पीछे भावना और उसके भाई का हाथ
तफ्तीश में सतीश के साले देवेंद्र का नाम सामने आने के बाद आखिरकार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. शुरुआती पूछताछ में उसने तमाम इल्जामों से इनकार किया, लेकिन जब उसका सबूतों से सामना करवाया गया, तो उसके पास जुर्म कबूल करने के सिवाय कोई चारा नहीं था. लेकिन कहानी इतनी भर नहीं थी, कत्ल की इस वारदात में खुद सतीश की पत्नी यानी देवेंद्र की बहन भावना भी शामिल थी, जो अपने पति की हरकतों और इन हरकतों की वजह से घर में रोज़-रोज़ होने वाले झगड़ों से परेशान थी.
भाई-बहन ने मिलकर रची थी खूनी साजिश
असल में इंस्पेक्टर सतीश की शादी को दस साल हो चुके थे. लेकिन दस सालों से ही उसका रिलेशन अलग-अलग लड़कियों से चल रहा था. जिसे लेकर पति-पत्नी के बीच लड़ाइयां होती रहती थीं और अपनी बहन की इस परेशानी से देवेंद्र भी अक्सर बेचैन रहता था. फिर देवेंद्र और भावना ने मिल कर सतीश की हत्या करने का फैसला कर लिया. करीब ढाई महीने पहले उन्होंने इस आइडिया पर काम करना शुरू किया.
तमंचे और पिस्टल से मारी थी गोली
फिर तय प्लानिंग के मुताबिक 12 और 13 नवंबर की दरम्यानी रात को जब सतीश अपनी पत्नी और बेटी के साथ राजाजीपुरम से अपने घर मानस नगर पहुंचा, वहां पहले से घात लगाए उसका इंतजार कर रहे देवेंद्र ने उसे पीछे गोली मार दी. देवेंद्र ने पहले उसे तमंचे से एक गोली मारी और फिर .32 बोर की पिस्टल से चार और गोलियां मारीं और फिर फरार हो गया. भाई-बहन ने दिवाली की रात को इसलिए चुना, ताकि पटाखों की शोर में गोली चलने की आवाज गुम हो जाए. साजिश के मुताबिक जब कत्ल के बाद देवेंद्र भाग गया, उसके बाद बहन भावना ने रोना-चिल्लाना शुरू किया. पुलिस को मिली फुटेज में देवेंद्र केसाइकिल से आने जाने की तस्वीरें तो ख़ैर शामिल हैं ही, सीसीटीवी कैमरे में भावना के रोने-चिल्लाने की आवाज भी आखिरी गोली चलने के 65 सेकंड बाद रिकॉर्ड हुई है.
कातिल का शातिराना अंदाज
तफ्तीश में पता चला है कि हत्या के लिए देवेंद्र ने सबसे पहले जीपीएस डिवाइस खरीदा था और उसे सतीश की कार में चुपके से फिट कर दिया था. पकड़े जाने से बचने के लिए उसने हुडी खरीदी, ताकि उसे पहन कर खुद को छुपाया जा सके. यूट्यूब पर हथियार बेचनेवालों का पता किया और कानपुर के रहनेवाले किसी अपराधी से तमंचा खरीदा. हत्या के लिए उसने साइकिल खरीदी, क्योंकि उसे पता था कि साइकिल वालों पर आम तौर पर पुलिस का ध्यान नहीं जाता. और वारदात के लिए दिवाली की रात को चुना ताकि पटाखों के शोर में गोलियों की आवाज़ दब जाए. और तो और जीपीएस ट्रैकिंग के लिए एक पुराना मोबाइल फोन खरीदा और उसका इस्तेमाल करता रहा. अपना मोबाइल फोन उसने घर पर ही छोड़ दिया था, ताकि उसकी लोकेशन मौका-ए-वारदात पर ना दिखे.
इंजीनियर है अपने जीजा का कातिल देवेंद्र
यहां तक कि उसने अपने घर के एक बच्चे को दिवाली की रात अपना मोबाइल फोन देकर उससे ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने की भी बात कही और थोड़ी देर में लौट कर आने की बात कह कर घर से निकल गया, ताकि उसके घर में ही होने का एक सबूत मौजूद हो. वो अपने साथ जीपीएस ट्रैकिंग वाला दूसरा मोबाइल फोन लेकर गया था. लेकिन सीसीटीवी फुटेज, जीपीएस ट्रैकर, दोनों फोन की अलग-अलग लोकेशन और बाकी सुरागों की मदद से आखिरकार पुलिस ने इस मामले का खुलासा कर दिया. इस पूरे मामले की खास बात ये रही कि कत्ल के आरोप में गिरफ्तार देवेंद्र इंजीनियर है, उसने बैंक पीओ की भी तैयारी की थी और चार साल तक बैंक में नौकरी कर चुका है. इसके बाद वो यूपीएससी की तैयारी कर रहा था, ताकि बड़ा अफसर बन सके, लेकिन इससे पहले ही वो हत्या की वारदात को अंजाम देकर जेल चला गया.