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एक ऐसा कैदी जो खाता है लोहा-लक्कड़

इंसानी जिस्म का यूं तो हर हिस्सा अपने आप में अहम है. मगर पेट की बात ही कुछ और है. पापी पेट के सवाल पर लोग ना जाने क्या-कर गुजरते हैं. मगर हम जिस पेट को लेकर आज वारदात में हाजिर हुए हैं उसमें जब आप झांकेंगे तो यकीन मानिए वो पेट कम पिटारा ज्यादा नज़र आएगा.

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लोहा-लक्कड़ खाता है ये कैदी
लोहा-लक्कड़ खाता है ये कैदी

इंसानी जिस्म का यूं तो हर हिस्सा अपने आप में अहम है. मगर पेट की बात ही कुछ और है. पापी पेट के सवाल पर लोग ना जाने क्या-कर गुजरते हैं. मगर हम जिस पेट को लेकर आज वारदात में हाजिर हुए हैं उसमें जब आप झांकेंगे तो यकीन मानिए वो पेट कम पिटारा ज्यादा नज़र आएगा. बस यूं समझ लीजिए कि एक टूल ब़ॉक्स में जो-जो चीजें रखी जाती हैं, एक साहब ने वो सारी चजें अपने पेट में रखी हुई थीं. पेट को पिटारा बनाने वाले ये साहब का पहला परिचय ये है कि ये एक जेल में कैद कैदी हैं.

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दरअसल मध्य प्रदेश के इंदौर में हथकड़ियों में जकड़े माधव नाम का एक शख्स को देखकर पहले तो कोई भी इसे इलाज के लिए अस्पताल लाया गया एक मामूली कैदी ही समझेगा. लेकिन ये कैदी कोई मामूली कैदी नहीं बल्कि एक ऐसा शख्स है जिसके पेट में हर वो चीज़ मौजूद है जो किसी इंसान के पेट में होना बिल्कुल मुमकिन नहीं. चीज बोले तो वो चीजें जिन्हें खाना यानी पेट के अंदर पहुंचाना तो दूर, जिसके बारे में सोचना भी मुश्किल है. तो आइए अब बिना वक़्त गंवाए आपको इस शख्स की पेट में मौजूद इन अजीबोग़रीब चीज़ों से भी वाकिफ़ कराए देते हैं. ये चीज़ें हैं, स्क्रू ड्राइवर यानी पेचकस, लोहे का पाना, टंग क्लीनर, शीशे के टुकड़े, सुइयां, स्क्रू, पत्थर, प्लास्टिक के टुकड़े और ना जाने क्या-क्या.

लेकिन अब सवाल यही है कि आखिर इस इंसान के पेट में ये चीजें कब और कैसे पहुंची? क्या इस शख्स ने खुद ही इन चीजों को जानबूझ कर अपने पेट में पहुंचाया या फिर किसी धोखे से ये चीज़ें उसके जिस्म में दाखिल हो गईं? सवाल ये भी है कि ऐसी अजीबोगरीब चीज़ों के साथ ये शख्स आख़िर इतने लंबे समय से ज़िंदा कैसे है? और इस शख्स के साथ अब आगे क्या होनेवाला है? यकीनन, हर एक सवाल का जवाब बेहद बेचैन करने वाला है.

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दरअसल, मध्य प्रदेश की पुलिस माधव नाम के शख्स को इंदौर के नज़दीक अलीराजपुर नाम की एक जगह से लेकर पहुंची. इस शख्स पर मर्डर यानी कत्ल का इल्जाम है. लेकिन माधव की मानें तो ये क़त्ल का ये इल्जाम ही उसके पेट में इन अजीबोगरीब चीजों के पहुंचने की सबसे बड़ी वजह है. माधव के मुताबिक आज से कुछ साल पहले एक रोज धार पुलिस ने अचानक उसे गिरफ्तार कर लिया था. गिरफ्तारी के बाद सबसे पहले उसे थाने लेकर जाया गया और वहां उससे रिश्वत के तौर पर रुपयों की मांग की गई लेकिन चूंकि वो गरीब था और उसके पास पुलिस को देने के लिए पैसे नहीं थे, पुलिस ने उसे उठा कर सीधे जेल भेज दिया और बस यहीं से उसकी ज़िंदगी बदल गई.

तब तक माधव अपने आनेवाले वक़्त का अहसास नहीं था. लेकिन कुछ रोज़ बाद जब उसकी दोबारा अदालत में पेशी हुई, तो उसे पता चला कि उस पर एक शख्स के कत्ल का संगीन इल्जाम है, तो बस इसी रोज से उसका दिमाग़ फिर गया. अब इसे जुल्म के खिलाफ माधव का ग़ुस्सा कहें या फिर खुद को नुकसान पहुंचाने की सनक, माधव हर वो चीज़ खाने लगा जो उसे हाथ लग जाता फिर चाहे वो पेचकस हो, पाना, लोहे का टुकड़ा, टंग क्लीनर, ब्लेड या फिर कुछ और.

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वैसे डॉक्टरों के मुताबिक अब इस ऑपरेशन के बाद माधव पर कोई ख़तरा नहीं है. लेकिन जेल में बंद रह कर भी लंबे समय से लोहा-लक्कड़ खा रहे माधव की ज़िंदगी अपने-आप में कई सवाल खड़े करती है. सवाल ये कि क्या वाकई माधव बेकुसूर है? और झूठे मुकदमे का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाने की वजह से पागल हो गया है? अगर हां, तो वो जेल में क्यों बंद है? मुकदमे का फ़ैसला तो ख़ैर अदालत को करना है लेकिन जेल की जगह माधव की सही जगह यकीनन मानसिक रोगियों का अस्पताल है. ठीक इसी तरह य़े चीज़ें इतनी आसानी से माधव को जेल में मिलती कहां से हैं? अब तक इन चीज़ों पर हाथ साफ़ करते हुए माधव पर किसी की निगाह क्यों नहीं गई? और अगर माधव को जेल में लोगों ने ये सबकुछ खाते हुए देखा, तो उसे पहले ही अस्पताल क्यों नहीं लाया गया? ज़ाहिर है, इन सवालों का जवाब मध्य प्रदेश पुलिस और अलीराजपुर जेल प्रशासन को ही देना होगा.

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