सुबह के पौने 5 बजे थे. यह रात और सुबह के बीच का आखिरी पहर था. वो पहर जब नींद सबसे ज्यादा हावी होती है. पूरी दिल्ली की तरह तब करोल बाग की उस गली में भी सन्नाटा था. लेकिन ठीक इसी पहर में गली के अंदर एक-एक कर छह औरतें नजर आती हैं. उनमें से कुछ एक दुकान के बाहर बैठ जाती हैं और फिर कुछ ऐसा करती हैं जिसे सुनकर आप दांतों तले ऊंगली दबा लेंगे.
दरअसल, ये औरतें चोर हैं और उनकी चोरी का तरीका भी अनूठा है. गली के अंदर घुसते ही उनमें से चार सीधे जिस दुकान के शटर के बाहर बैठती हैं वह उनका निशाना था. वह शटर केएल ज्वेलर्स का था. जिस समय यह सब हो रहा था, तभी दुकान के बाहर एक स्कूर भी खड़ा था.
4 बजकर 47 मिनट: पर्दा और पर्दे की पीछे
आगे की कहानी बड़ी दिलचस्प लेकिन साथ ही हैरान करने वाली है. उन चार औरतों से एक औरत जो आगे बैठी थी अचानक उठती है और अपनी शॉल उतार कर फैला देती है. इसके अगले ही पल दूसरी औरत भी ठीक वैसा ही करती है और फिर बीच में बैठी तीसरी औरत भी अपनी शॉल उसी तरह फैला देती है.
अब शॉल का पर्दा तन चुका था. कुछ इस तरह कि शॉल के पीछे क्या हो रहा है, कुछ दिखाई ना दे. पर तभी शायद गली में कोई आवाज आती है. सारी औरतें अचानक चौकन्नी हो जाती हैं. शॉल का पर्दा हट जाता है और सभी आराम से बैठ जाती हैं, ऐसे जैसे अभी गप्पें मार रही हों.
4 बजकर 49 मिनट
जब सबको यकीन हो जाता है कि गली में कोई नहीं है तो फिर से वही पर्दा तन जाता है. शॉल के पर्दे के पीछे से अब पहली बार अचानक एक टॉर्च की रोशनी कौंधती है. पर्दे के पीछे काम जारी था. काम जौहरी की दुकान के शटर का निचला हिस्सा खोलने या तोड़ने का. उधर पीछे शटर तोड़ने का काम चल रहा था इधर पर्दा ताने आगे की तरफ बैठी औरतें गली के दोनों तरफ, ऊपर नीचे तरफ लगातार नजरें गड़ाई थीं.
4 बजकर 56 मिनट
अभी पीछे शटर तोड़ने का काम जारी ही था कि तभी एक औरत उठती है और गली की दाईं तरफ चल पड़ती है. करीब 21 सेकेंड बाद वही औरत फिर से नजर आती है. वो वापस आ रही है पर इस बार उसके हाथ में छोटा थैला या छोटी बोरी जैसा कुछ सामन है. उसके अंदर शायद कुछ औजार है. वो वापस आती है और फिर से उसी तरह अपनी जगह पर बैठ जाती है.
4 बजकर 57 मिनट: दुकान के अंदर
शायद शटर खोलने का काम पूरा हो चुका था इसीलिए उनमें से एक औरत अब खड़ी हो जाती है. आखिरकार वो घड़ी आ ही गई. शटर के बाहर आकर बैठने के करीब नौ मिनट शायद शटर के नीचे इतनी जगह बन चुकी थी कि अब दुकान में दाखिल हुआ जा सके. इसके बाद एक औरत अपना शॉल हटाती है और किसी तरह घिसटते हुए दुकान के अंदर घुस जाती है. इन छह औरतों में सबसे दुबली-पतली यही थी और इसिलिए उसे ही दुकान के अंदर जाना था.
4 बजकर 58 मिनट: फिर से सन्नाटा
दुकान के अंदर घुसते ही अगले पांच सेकेंड में बाकी की पांचों औरतें उठ खड़ी होती हैं और फिर गली की बाईं तरफ चल पड़ती हैं. अपनी छठी साथी को छोड़कर. वही छठी औरत जो अब दुकान के अंदर है और शटर एक बार फिर से गिरा हुआ. गली में एक बार फिर सन्नाटा पसर जाता है.
5 बजकर 11 मिनट
लगभग 15 मिनट के बाद पांचों औरतें अपनी छठी साथी के पास लौटती हैं. वही छठी साथी जिसे उन्होंने दुकान के अंदर छोड़ा था. एक बार फिर औरतें उसी अंदाज में शॉल का पर्दा बनाती हैं और उनमें से एक शटर को हल्के से पीटती हैं जैसे अपनी साथी को इशारा कर रही हों.
5 बजकर 13 मिनट: हो गया सफाया
दुकान के अंदर से शटर के नीचे से वही दुबली-पतली औरत अब निकलती है. उसके हाथ में बहुत सारा सामान है जो वह अपनी साथी का देती है. सभी वहां से पलक झपकते गायब हो जाती हैं और एक बार फिर गली में सन्नाटा छा जाता है. ऐसे जैसे कभी कुछ हुआ ही नहीं.
लाखों की चोरी और सीसीटीवी
सुबह होती है और दुकान का मालिक जब दुकान खोलता है तो हक्का बक्का रह जाता है. शटर टूटा है. शटर के अंदर शीशे का दरवाजा है, जिसके लॉक को बड़ी सावधानी के साथ काट दिया गया है. दुकान से लाखों का माल गायब है और दुकान के सामने लगे सीसीटीवी कैमरे में चोरी की यह पूरी दास्तान कैद है.
दिल्ली पुलिस का कहना है कि इससे पहले भी उसने कई महिला चोरों को पकड़ा है. लेकिन चोरी का तरीका नया है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच में लगी है और चोर आजाद है.