हैदराबाद की रहने वाली सुनीता कृष्णन (40) ने वीडियोज के सहारे गुनहगारों को सजा दिलाने का बीड़ा उठाया है. ऐसे गुनहगार, जिन्हें शायद इंसान कहना भी इंसानियत की तौहीन है. पिछले दो महीने में उन्हें अलग-अलग वेबसाइटों पर मौजूद रेप की घटनाओं के घृणित वीडियो मिले हैं.
चौंकाने वाली बात ये थी कि वीडियोज की शिकायत किए जाने के बाद भी इन सभी वीडियो क्लिप्स के गुनहगारों के खिलाफ किसी भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, क्योंकि इन क्लिप में गैंगरेप के गुनहगारों ने जिन लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बनाया, उनमें से ज्यादातर अपनी फरियाद लेकर पुलिस के पास जाने की हिम्मत ही नहीं जुटा सकीं थीं.
सामाजिक कार्यकर्ता सुनीता कृष्णन ने बलात्कार की शिकार लड़कियों की मदद करने वाला एनजीओ चला कर और अब 'शेम द रेपिस्ट कैंपेन' यानी बलात्कारी को शर्मसार करने का अभियान चला कर रातों-रात जैसे पूरे सिस्टम को हिला दिया है. सुनीता को देश भर से 90 ऐसे वीडियो क्लिप्स मिले, जिनमें गैंगरेप की वारदातें कैद थीं.
सुनीता ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा और साथ में एक पेन ड्राइव में वो नौ वीडियो भी भेजे जो इंसानियत के साथ-साथ देश के कानून को भी धोखा दे रहे थे. जिन्हें देखने के बाद अब देश की सबसे ऊंची अदालत भी सकते में आ गई है. गैंगरेप के इन अलग-अलग वीडियो में ऐसे अनगिनत गुनहगारों के चेहरे कैद हैं, जो अलग-अलग जगहों पर लड़कियों के साथ ज्यादती करते और उनकी हर चीख और हर तकलीफ पर हंसते हुए नजर आ रहे हैं.
इन वीडियो क्लिप्स को देखकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि आखिर अलग-अलग राज्यों की सायबर सेल कर क्या रही है, जो ऐसी वीडियो के सामने आने के बावजूद गुनहगार खुलेआम घूम रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने देश के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल को बुलवाया और राज्यों के साइबर सेल की काहिली पर जवाब तलब करते हुए मामले को देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई की हवाले कर दिया.
सुनीता को अपनी लड़ाई में पहली जीत मिल चुकी थी. लेकिन उसे दूसरी जीत तब मिली, जब सीबीआई ने ऐसे ही एक वीडियो को ट्रैक करते हुए ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से एक ऐसे बिल्डर को धर दबोचा, जिसने एक लड़की के साथ गैंग करते हुए अपने एक साथी की मदद से उसे शूट किया था. लेकिन इसके बाद सुनीता तब सकते में आ गई, जब इंसाफ़ की उम्मीद में उसे लोगों ने ऐसे ही 90 अलग-अलग वीडियो क्लिप्स भेजे जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों में अनगिनत बलात्कारी अलग-अलग लड़कियों के साथ ज्यादती करते हुए नज़र आ रहे थे. अब खुद सुनीता को ये समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर इतने सारे बलात्कारियों से निपटे तो कैसे निपटे. बहरहाल मामला शीर्ष अदालत के पास है और इंसाफ की उम्मीद अभी बाकी है.