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बस दो ही ख्वाहिशें: न्याय करो और सुरक्षा दो

बस दो ही ख्वाहिशें: न्याय करो और सुरक्षा दो

नौ घंटे बीत चुके हैं, लेकिन लोगों की आवाज नहीं थमी. शायद पहली बार ऐसा हुआ है कि सुबह से रायसीना की पहाड़ियों पर प्रदर्शनकारियों ने मोर्चाबंदी कर रखी थी. बार-बार इंसाफ की मांग उठती और बार बार सरकार की ताकत उस आवाज को दबाने की कोशिश करती रही. शाम हुई तो लोगों के गुस्से ने हिंसा का रूप लेना शुरू कर दिया, फिर पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी.

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