90 के दशक में जब मुंबई में अपराध अपने चरम पर थे और वहां अंडरवर्ल्ड का दबदबा था तब पीठासीन सरकार ने पुलिस के साथ मिल कर एक फैसला लिया था, अंडरवर्ल्ड और गैंगवार के सफाये और इसी फैसले ने जन्म दिया सरकारी कत्ल यानी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की टीम को. उसी टीम का हिस्सा था सचिन वाजे, सब इंस्पेक्टर क्राइम ब्रांच सीआईयू. 2002 में हुए बम धमाके में सीआईडी जांच में वाजे का नाम आया और उसे ससपेंड कर दिया गया. 16 साल बाद अब वाजे को गुमनामी से बाहर निकलना था, वापस से शोहरत हासिल करनी थी. क्या इसीलिए रची गयी थी एंटीलिया साजिश?
In the 90s, when crime in Mumbai was at its peak the presiding government took a decision with the police, to form a team of Encounter Specialists. Sachin Vaze was a part of the team and he rose to fame during that time. But his name started to fade after 2002 when he was suspended in a bomb blast case. After 16 years, now Vaze had to come out of oblivion.