हरियाणा के पलवल में पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो जमीनों की रजिस्ट्री की कॉपी निकाल कर लोगों के बैंक खातों को साफ कर रहे थे. इनकी मोडस ऑपरेंडी आम साइबर ठगों से बिल्कुल अलग थी. इस गिरोह के लोग रजिस्ट्री से आधार नंबर और रजिस्ट्री के कागजों पर लगे अंगूठे के प्रिंट को स्कैन कर और फिर उसका रबड़ क्लोन बनाते थे और फिर लोगों के बैंक खाते से लाखों रुपये निकाल लेते थे. पुलिस ने इस गिरोह के पांच शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है.
अचानक पलवल में ऐसे मामले बढ़ गए थे. पलवल पुलिस ने इस तरह की ठगी के 3 दिन में 43 मामले दर्ज किए थे. पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने अभी तक 31 लाख रुपये की ठगी की है और करीब 3 करोड़ की ठगी का प्लान तैयार कर रखा था. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2000 से ज़्यादा रजिस्ट्री की कॉपी भी बरामद की हैं. पलवल पुलिस इसे साइबर ठगी का नायाब तरीका बता रही है. आरोपी अनोखे साइबर ठग हैं, जो आपकी जानकारी के बिना या आपको बिना कोई फोन कॉल किए या ओटीपी पूछे या बिना कोई लिंक का मैसेज भेजे ही चूना लगा सकते हैं. आप के खातों में पड़ा सारा रुपया साफ कर सकते हैं.
पलवल पुलिस ने बताया कि जून महीने की ही 1 से 3 तारीख के दौरान ऐसे साइबर अपराध की 43 शिकायतें मिली. सभी शिकायतें लगभग एक ही तरह की थी. पुलिस ने तुरंत सभी 43 मामलों में एफआईआर दर्ज कर ली और मामले की जांच पड़ताल शुरू की. इन मामलों की सबसे खास बात यह थी कि इसमें से किसी भी पीड़ित के पास ओटीपी जानने के लिए ना कोई फोन आया और ना ही किसी तरह का कोई लिंक उन्हें भेजा गया था. जैसा कि साइबर ठग आमतौर पर ठगी के लिए करते हैं.
एसपी के मुताबिक आरोपियों ने कई जिलों में इस तरह की ठगी करने की कोशिश की लेकिन उनकी दाल नहीं गली. क्योंकि उन्हें कहीं भी रजिस्ट्री की कॉपी नहीं मिली थी. फिर ये लोग पलवल आए तो वहां रजिस्ट्री ऑफिस में डेली बेसिस पर काम करने वाला एक कर्मचारी तोताराम उन्हें मिल गया. आरोपियों की उससे सेटिंग हो गई और वहां से उन्होंने करीब दो हजार रजिस्ट्री निकाल लीं. फिर गिरोह के लोगों ने रजिस्ट्री में अंकित लोगों के आधार कार्ड नंबर और थंब प्रिंट ले लिए बाद में टैंकर और एक लिक्विड के माध्यम से रबड़ के थंब क्लोन बना लिए, जैसे रबड़ की मोहर बनाई जाती है.
फिर उन लोगों के बैंक खातों की जानकारी हासिल की. इसके बाद आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम की मदद से और एक गेटवे वॉलेट की मदद से इन्होंने लोगों के खातों से पैसे ट्रांसफर करना शुरू कर दिया. हालांकि इस सिस्टम में यह लोग एक बार में केवल 10000 रुपये तक ही ट्रांसफर कर सकते थे. लेकिन इसे कितनी ही बार यूज किया जा सकता था. कई बार लोगों को ट्रांजेक्शन का मैसेज लेट आता है, तब तक ये शातिर उस बैंक खाते से लाखों रुपये साफ कर चुके होते थे.
एसपी दीपक गहलावत ने बताया कि अभी तक इन लोगों ने पलवल में 31 लाख रुपये की ठगी की है. जिसमें से करीब 1000000 रुपये इनके एक बैंक खाते में थे. जिसे फ्रीज करा दिया गया है और करीब 1200000 रुपये की इन्होंने एक कार खरीद ली है. जबकि बाकी करीब 900000 रुपये की बरामदगी की जानी है. फिलहाल इस मामले में एक लड़की समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस ठगी को अंजाम देने से पहले इन लोगों ने पलवल में एक रूम किराए पर भी लिया था.
एसपी के मुताबिक इन लोगों के पास से करीब 200 से ज्यादा लोगों के डिटेल बरामद हुए हैं. जिसमें खाता धारक का नाम, अकाउंट नंबर, आधार नंबर और उसके खाते में कितने पैसे हैं? ये सब जानकारी थी. ये शातिर गिरोह इन सभी लोगों को कुछ ही दिनों में अपना शिकार बनाने वाला था. लेकिन ऐसा होने से पहले ही पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया और करीब 3 करोड़ से ज्यादा की ठगी होने से बचा ली.