Bulli Bai केस में गिरफ्तार आरोपी श्वेता सिंह के परिवार वालों का कहना है कि वो (श्वेता) अभी कुछ ही समय पहले ही 18 साल की हुई है. उसको न तो किसी से कोई मतलब था और न ही वो किसी भी गलत काम में पड़ती थी. उसे सोशल मीडिया पर एक लड़का मिला था, जिसके कहने पर उसने अकाउंट बनाया था.
श्वेता के परिवार ने 'आज तक' को बताया कि उसको सोशल मीडिया के माध्यम से एक लड़का मिला था. जिसने उसके IP एड्रेस से एक अकाउंट बनवा लिया था. उसने कुछ ही समय पहले 12वीं पास की थी. अभी वो बच्ची है. हम किराये के मकान में रहते हैं. कोई नहीं है हमारा. बस 3 छोटी उम्र की बहने हैं और एक छोटा 10 साल का भाई है.
श्वेता की बहनों का कहना है कि उनका घर वात्सल्य योजना के सहारे चलता है. जिसमे प्रति माह प्रति बच्चा 3000 रुपये मिलते हैं. लेकिन जब से श्वेता इस केस में फंसी है, तब से मकान मालिक ने भी घर खाली करने को बोल दिया है.
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बहनों का कहना है कि श्वेता को किताबें पढ़ने का शौक है. वह मनु स्मृति और भागवत गीता पढ़ती है. कुछ ही समय पहले ही उसके पिता का कोरोना से देहांत हो गया था. आज तक ने उसके पड़ोसियों से बात की तो वहां मौजूद सभी लोगों ने कहा कि बच्चे अच्छे हैं. सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देते हैं. श्वेता भी बहुत अच्छी है. लगता नहीं कि बच्ची गलत है.
आरोपी युवती की बहनों ने बताया कि वह यूपी के बुलंदशहर के निवासी हैं. लेकिन करीब 15 वर्ष से रुद्रपुर में ही रहते हैं. उनकी शिक्षा दीक्षा रुद्रपुर से ही हुई है. अभी रुद्रपुर में एक किराए के मकान में रह रहें हैं. जिनके पिता और माता की मृत्यु के बाद 4 बच्चे अनाथ हो गए थे. अभी इनके पिता की मृत्यु को कुछ माह ही हुए है. मां की मौत 11 वर्ष पूर्व हुई थी.
रुद्रपुर के कोतवाल विक्रम राठौर ने बताया कि मुंबई पुलिस ने 67 आईटी एक्ट और आईपीसी के तहत धारा 153A (असहमति को बढ़ावा देना), 153B (गलत अपील प्रकाशित करना), 295A (पूजा की जगह को अपवित्र करना), 509 (किसी भी महिला की शील भंग करने का इरादा), 500 (मानहानि), 453D (महिलाओं का पीछा करना) के तहत मामला दर्ज किया है.
आपको बता दें कि मुंबई पुलिस की एक अन्य टीम उसे महाराष्ट्र ले जाने के लिए रुद्रपुर पहुंची. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी लड़की ने इसी साल 12वीं की पढ़ाई पूरी की है और फिलहाल पुरात्तव विभाग में जाने की तैयारी कर रही है. लड़की अपने परिवार में एक बड़ी बहन एक छोटी बहन और एक भाई के साथ दूसरे नंबर की है. पिता के पीएफ से मिले पैसे से परिवार का खर्चा चलता है.
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