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Pegasus: जांच पैनल का दावा- सिर्फ दो डिवाइस जमा की गईं, जबकि 300 की जासूसी का था दावा

जुलाई 2021 में दावा किया गया था कि इजरायली सॉफ्टवेयर Pegasus के जरिए भारत के 300 लोगों के फोन नंबर की जासूसी की गई. हालांकि, इसकी जांच कर रही कमेटी के पास अब तक 2 लोगों ने ही अपनी डिवाइस जमा कराई है.

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तीन सदस्यों की कमेटी पेगासस मामले की जांच कर रही है. (फाइल फोटो)
तीन सदस्यों की कमेटी पेगासस मामले की जांच कर रही है. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सुप्रीम कोर्ट की गठित कमेटी कर रही है जांच
  • कमेटी के सामने अब तक 9 लोगों ने बयान दिए

इजरायली कंपनी NSO के जासूसी सॉफ्टवेयर Pegasus का मामला एक बार फिर से चर्चा में है. अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि केंद्र सरकार ने 2017 में इजरायल के साथ एक डिफेंस डील में Pegasus को खरीदा था. पिछले साल जुलाई में Pegasus के जरिए जासूसी का दावा किया गया था. दावा था कि केंद्र सरकार ने 300 लोगों की जासूसी की. हालांकि, इन आरोपों की जांच के लिए बनी कमेटी के पास अब तक सिर्फ दो लोगों ने ही अपने मोबाइल जमा कराए हैं. 

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दरअसल, पिछले साल जुलाई में खोजी पत्रकारों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह ने दावा किया था कि इजरायली सॉफ्टवेयर Pegasus के जरिए दुनियाभर के 50 हजार से ज्यादा लोगों की जासूसी की गई है. दावा किया गया था कि इन 50 हजार में से 300 नंबर भारतीयों के हैं. 

रिपोर्ट में जिन लोगों की जासूसी का दावा किया गया था, उनमें कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi), चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor), आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) समेत कई पत्रकारों और एक्टिविस्ट का नाम शामिल था.

ये भी पढ़ें-- जानिए क्या है जासूसी सॉफ्टवेयर Pegasus जो WhatsApp भी कर सकता है हैक, ऐसे बनाता है निशाना

फिर क्या हुआ?

- केंद्र सरकार पर जासूसी के आरोप लगने के बाद सड़क से लेकर संसद तक जमकर बवाल हुआ. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए 28 अक्टूबर को 3 सदस्यों की एक कमेटी का गठन किया. 

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- जांच कमेटी के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आरवी रवींद्रन हैं. जस्टिस रवींद्रन 2005 से 2011 तक सुप्रीम कोर्ट के जज रहे हैं. कमेटी में उनके साथ पूर्व आईपीएस अधिकारी आलोक जोशी और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट संदीप ओबेराय भी हैं.

- इस कमेटी को 8 हफ्तों में अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी. लेकिन सूत्रों का कहना है कि जांच में लोग सहयोग नहीं कर रहे हैं, जिस कारण जांच धीमी चल रही है.

जांच कमेटी को अब तक क्या-क्या मिला?

- कमेटी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अब तक सिर्फ 2 लोगों ही जांच के लिए अपनी डिवाइस जमा की है. अब तक कुल 9 लोगों ने अपने बयान दर्ज करवाए हैं. इनमें कुछ साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, पत्रकार और एक्टिविस्ट शामिल हैं. एक सांसद ने भी बयान दिया है.

- इतनी धीमी प्रक्रिया होने से कमेटी की जांच में भी देरी हो रही है. लिहाजा कमेटी ने उन लोगों से सामने आने की अपील की है जिन्हें अपनी जासूसी होने का शक है. 

NYT ने क्या किया है दावा?

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया है कि भारत ने 2017 में इजरायल से 2 अरब डॉलर की रक्षा डील के तहत जासूसी सॉफ्टवेयर Pegasus खरीदा था. इस रक्षा सौदे में भारत ने मिसाइल सिस्टम और हथियार खरीदे थे. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने भी ये सॉफ्टवेयर खरीदा था, लेकिन टेस्टिंग के बाद इसका इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया.

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