दिल्ली पुलिस के साइबर सेल ने ठगों (Online Fraud) के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है. गिरोह के लोग सरकारी अफसर बनकर ठगी करते थे. ये लोग खुद को ऑनलाइन निवारण (रिड्रेसल) सिस्टम का सरकारी अधिकारी बताते थे. यहां उन लोगों को चूना लगाया जाता था जो कि ऑनलाइन ठगी की शिकायत करना चाहते थे. ये लोग अबतक करीब 1.74 करोड़ की ठगी कर चुके थे, इसमें इन्होंने 3 हजार के करीब लोगों को निशाना बनाया था.
इन ठगों ने पीड़ितों से प्रोसेसिंग शुल्क लिया और बाद में उनके नम्बर को ही ब्लॉक कर दिया. इस केस में पुलिस ने 2 महिलाओं सहित 12 लोगों को गिरफ्तार किया है.
ठगों द्वारा लगभग 3000 पीड़ितों को ठगा गया है. बैंक डिटेल्स से पता चलता है कि अब तक इन ठगों ने 1.74 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है. इन ठगों से 7 लैपटॉप, 25 मोबाइल फोन, एक अर्टिगा कार और नकद 52 हजार 500 रुपये बरामद किए गए हैं.
पिछले महीने यानी सितंबर में झारखंड के जामताड़ा में दिल्ली पुलिस के साइबर सेल ने छापेमारी की थी. वहां ऑनलाइन ठगी के 'रॉकस्टार' समेत 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. गैंग के इस मास्टरमाइंड के पास जामताड़ा इलाके में करोड़ों रुपये की संपत्ति और गाड़ियां मौजूद थीं.
वहीं, साइबर क्राइम यूनिट के डीसीपी केपीएस मल्होत्रा के मुताबिक, एक शिकायत मिली थी जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि जब वह धोखाधड़ी की एक घटना के बारे में शिकायत करने की कोशिश कर रहा था, तो वह एक वेबसाइट www.jansurkashakendara.in पर आया, जो एक अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल होने का दावा कर रहा था. उन्होंने वेबसाइट पर उपलब्ध कराए गए मोबाइल फोन नंबर पर कॉल किया, जिसने उन्हें सूचित किया कि वे सरकार के साथ काम करने वाले अधिकृत लोग हैं और वे धोखाधड़ी के संबंध में उसकी एफआईआर दर्ज करेंगे.
आरोपियों ने शिकायत दर्ज कराने व पूछताछ करने के बहाने उससे 2850 रुपये वसूले, एक बार भुगतान होने के बाद, उन्होंने शिकायतकर्ता के मोबाइल को ब्लॉक कर दिया. इसके अलावा इसी तरह की 7 और शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज की गईं. एक केस कर्नाटक में भी दर्ज हुआ. जांच के दौरान पता चला कि पिछले एक साल में जालसाजों को 1,74,00,000 रुपये मिले हैं.