कहते हैं पैसों के लालच में इंसान कुछ भी कर सकता है, लेकिन कोई अपनी औलाद को बेच देगा ये सुनने में भला ही अटपटा लगे, पर बिहार से हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक फैले एक मासूम बच्चे की कहानी आपको भी हैरान कर देगी.
बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले लालची मां-बाप ने अपनी ही औलाद का सौदा कर दिया. मासूम बच्चे ने जब आंख खोली, तो मां की गोद बदल चुकी थी. उस मासूम को तो शायद पता भी नहीं था, कि उसके साथ क्या हो रहा है. वहीं दूसरी तरफ इस मासूम को खरीदने वाले मां-बाप खुश थे और बच्चे के सभी पुराने कनेक्शन तोड़कर रियल मां-बाप से उसे दूर ले जाना चाहते थे, लेकिन बच्चे के सौदे की रकम ने ये पूरा खेल बिगड़ गया.
जिस दंपत्ति को बेटा हुआ उनका नाम गोविंग और पूजा है. ये दंपति बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं. काफी दिनों से दोनों ही गुरुग्राम में रह रहे थे. गोविंद यहां पर काम करता था. काम के दौरान ही उसकी जान पहचान रमन से हुई, जो मधुबनी का रहने वाला है. रमन ने बताया कि उसके एक रिश्तेदार जिनकी उम्र लगभग 50 साल है, 25 साल शादी के बाद भी उन्हें कोई औलाद नहीं है. रमन ने कहा अगर तुम्हें बच्चा पैदा होगा और वह बेटा होगा तो हमारे रिश्तेदार तुम्हारे बच्चे को खरीद लेंगे.
गोविंद ने अपने पत्नी पूजा को इस सौदे के बारे में बताया. गर्भवती पूजा भी पैसों के लालच में उस बच्चे को बेचने के लिए तैयार हो गई, जो अभी तक दुनिया में आया भी नहीं था. 10 जून को गुरुग्राम में पूजा ने इस बच्चे को जन्म दिया. उसके बाद बच्चे के पिता गोविंद ने रमन को बताया कि उसे बेटा हुआ है और वह अपने बच्चे का सौदा करने को तैयार है. रमन ने यह खबर अपने रिश्तेदार विद्यानंद यादव को दी, जोकि बिहार के मधुबनी के रहने वाले हैं. बच्चे की खबर सुनते ही विद्यानंद ने अपनी दो बीघा जमीन बेच दी और दो लाख रुपये की रकम जुटाकर गुरुग्राम आ गए.
(प्रतीकात्मक फोटो)
यहां पर उनकी मुलाकात रमन और उसके साथी हरपाल से हुई. बच्चे का सौदा हरपाल के घर दिल्ली के आया नगर में हुआ. यहां पर साढ़े तीन लाख रुपये में बच्चा बेचने की बात हो गई. दोनों पक्षों ने रजामंदी के तहत एग्रीमेंट किया. विद्यानंद ने 2 लाख नगद और डेढ़ लाख रुपए का चेक बच्चे के मां-बाप को दे दिया. उसके बाद वे बच्चे को लेकर वहां से चले गए.
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विद्यानंद ने 18 जून का चेक दिया था, लेकिन गोविंद और पूजा ने ये चेक 15 जून को ही बैंक में क्लीयर होने के लिए डाल दिया. क्योंकि चेक पर डेट आगे की डली थी, इसलिए बैंक से उन्हें पैसा नहीं मिल सका. गोविंद ने समझा कि उनके साथ धोखा हुआ है. इसके बाद उसने रमन के पास फोन किया, लेकिन उसने फोन उठाना भी बंद कर दिया. इसके बाद गोविंद का शक और मजबूत होने लगा. जब वह हरपाल के घर पहुंचा, तो वहां भी उसे कोई नहीं मिला.
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15 जून को गोविंद ने अपने बच्चे के अपहरण की सूचना पुलिस को दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी. सबसे पहले हरपाल को आया नगर इलाके से पकड़ा. हरपाल के पकड़े जाने के बाद चाणक्यपुरी की झुग्गियों से रमन को पकड़वाया. उसके बाद पुलिस ने दोनों से थोड़ी सख्ती दिखाई, तो रमन और हरपाल ने बच्चों के इस सौदे का सारा किस्सा सुना दिया.
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि विद्यानंद बच्चे को लेकर बिहार के लिए रवाना हो चुका है. जब तक पुलिस दिल्ली स्टेशन पहुंची, तब तक बिहार जाने वाली स्वतंत्रता सेनानी ट्रेन रवाना हो चुकी थी. पुलिस ने राम में ही ट्रेन का लॉकेशन ट्रेस किया और करीब दो बजे उत्तर प्रदेश के हरवंश मोहाल के एसएचओ सत्यदेव शर्मा को बच्चे के सौदे के बारे में बताया. इस सूचना के बाद एसएचओ ने ट्रेन को कानपुर पहुंचने के बाद बच्चे के साथ-साथ बच्चे के खरीदार दंपति विद्यानंद यादव और राम परी यादव को हिरासत में ले लिया.
रात में ही फतेहपुर बेरी थाने के एसएचओ कुलदीप सिंह ने एक टीम बनाई और कानपुर के लिए रवाना कर दिया. बच्चे को दिल्ली वापस लाया गया. इसके साथ ही पुलिस ने बच्चे के सौदागर और झूठी किडनैप करने के मामले में 6 आरोपियों को हिरासत में ले लिया है, जिनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.