कुत्तों को इंसानों का सबसे वफादार साथी माना गया है. कई कुत्ते तो आज भी मिसाल हैं, जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर मुसीबत के समय में इंसानों की जान बचाई है. यही वजह है कि जानवरों में सबसे ज्यादा पालतू कुत्ते ही होते हैं. शहर हो गांव ज्यादातर घरों में पालतू कुत्ते दिख जाएंगे, जिन्हें लोग अपने परिजनों की तरह रखते हैं. लेकिन बदलते समय के साथ कुत्तों का स्वभाव भी तेजी से बदल रहा है. पिछले कुछ वर्षों के दौरान ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कुत्तों ने इंसानों की जान ली है. बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा उनके निशाने पर रहे हैं. ऐसी घटनाओं का सामने आना बदस्तूर जारी है. ताजा मामला नोएडा के सेक्टर 53 का है.
नोएडा के सेक्टर 24 थाना क्षेत्र के गिझोड़ गांव के रहने वाले नरेंद्र शर्मा अपने पालतू कुत्ते को टहलाने के लिए निकले थे. पाकिस्तानी पिट बुल नस्ल कुत्ता बिना पट्टे के खुलेआम घूम रहा था. तभी उसके सामने एक आवारा कुत्ता आ गया. दोनों ने एक-दूसरे को देखा और भौंकना शुरू कर दिया. अचानक पिट बुल ने दूसरे कुत्ते पर हमला कर दिया. नरेंद्र लगातार कोशिश करते रहे, लेकिन पिट बुल ने उसे लहूलुहान करने के बाद ही छोड़ा. वहां मौजूद लोगों में दहशत देखी जा सकती थी. एक महिला तो डर के मारे चिल्लाने लगी. इस घटना ने एक बार फिर कुत्तों के खिलाफ मुहिम को तेज कर दिया है. लोग इस मामले में पिट बुल के मालिक के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
पिता की गोद में मासूम ने तड़प-तड़प कर तोड़ा दम
अभी पिछले महीने की बात है. गाजियाबाद में एक दर्दनाक घटना घटी थी. यहां विजयनगर थाना क्षेत्र की चरण सिंह कॉलोनी में रहने वाले एक बच्चे को किसी आवारा कुत्ते ने काट लिया था. घर पर डांट सुनने की डर से उसने परिजनों को इस बारे में कुछ नहीं बताया. लेकिन कुछ दिनों बाद उसके अंदर अजीब परिवर्तन आने लगे. वो अजीबो-गरीब हरकतें करने लगा. खाना पीना बंद कर दिया. पानी देखते ही डर जाता था. कभी कभी तो कुत्ते के भौंकने जैसी आवाज भी निकलता. यह सब देखकर पूरा परिवार डर गया. आनन-फानन में अस्पताल में ले गए, लेकिन किसी भी ईलाज नहीं मिला. आखिरकार बच्चे ने एंबुलेंस में पिता की गोद में उसने तड़प-तड़प कर अपनी जान दे दी.
कुत्तों के काटने से हर साल 20 हजार लोगों की मौत
भारत में हर साल कुत्तों के काटने से 20 हजार लोगों की मौत हो जाती है. इसमें सबसे मौत की वजह रैबीज बनता है, जिसके सबसे ज्यादा मामले भारत में पाए जाते हैं. भारत सरकार के स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्रालय ने संसद में पिछले साल बताया था कि साल 2019, 2020, 2021 और 2022 में देश में लोगों पर कुत्तों के कुल कितने हमले हुए हैं. इसके अनुसार, साल 2019 में 72 लाख 77 हजार 523, साल 2020 में 46 लाख 33 हजार 493, साल 2021 में 17 लाख 1 हजार 133 और साल 2022 में 14 लाख 50 हजार 666 मामले सामने आए थे. अपने देश में आवारा कुत्तों की संख्या करीब 3.50 करोड़ है, जबकि 1 करोड़ पालतू कुत्ते हैं. इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.
आतंकवादियों से ज्यादा खतरनाक आदमखोर कुत्ते
किसी भी देश में आतंकी वारदात को सबसे खतरनाक माना जाता है. भारत में भी कई बड़े आतंकी हमले हो चुके हैं, जिसमें सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गंवाई है. यहां नक्सली हमलों और उनमें मारे गए लोगों की संख्या शामिल नहीं की जा रही है. हम देश से बार के प्रायोजित आतंकी हमलों की बात कर रहे हैं. यदि इन आतंकी हमलों में मारे गए लोगों की तुलना करें तो कुत्तों के काटने होने वाली मौत की संख्या बहुत अधिक है. उदाहरण के लिए यदि मुंबई की बात करें तो वहां साल 1994 से लेकर साल 2016 तक 13.12 लाख लोगों को कुत्तों ने काटा था, जिसमें से 429 लोगों की रैबिज से मौत हो गई. दूसरी तरफ 1993 सीरियल ब्लॉस्ट में 257 लोग मारे गए थे, जबकि 717 लोग शहीद हुए थे. वहीं 26/11 के आतंकी हमले में 164 लोगों की मौत हुई और 308 लोग घायल हुए थे. इस तरह आतंकी हमले में कुल 421 लोगों की मौत हुई, जबकि कुत्ते के काटने से 429.
भारत में इस नस्ल के कुत्तों के पालने पर प्रतिबंध
भारत में कई नस्ल के कुत्तों के पालने पर पहले से ही प्रतिबंध है. साल 2016 में केंद्र सरकार ने अमेरिकन पिट बुल टेरियर्स, डोगो अर्जेंटिनो, रॉटवीलर, नीपोलिटन मास्टिफ, बोअरबेल, प्रेसा कैनारियो, वुल्फ डॉग, बैंडोग, अमेरिकन बुलडॉग, फिला ब्रासीलेरो और केन कोरो नस्ल के कुत्तों के पालने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित लगा दिया था. कई शहरों में नगर निगम ने अपने हिसाब से बैन लगाया है. जैसे कि गाजियाबाद शहर में पिट बुल, डोगो अर्जेंटिनो और रॉटवीलर नस्ल के कुत्ते पालने पर रोक है. आदेश के वक्त जिन लोगों के पास इन नस्ल के कुत्ते थे, उनको नसबंदी कराकर निगम में पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया था. इसके बाद उनसे 5000 रुपये का जुर्माना भी वसूला गया था.