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पेट्रोल पंप, जमीन या हरिद्वार में आश्रम... नरेंद्र और आनंद गिरि के बीच क्या बनी झगड़े की वजह?

आनंद गिरि पर Mahant Narendra Giri को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप भी लग रहे हैं. यह बात भी सामने आई है कि गुरु-शिष्य में जमीन को लेकर भी विवाद था. महंत नरेंद्र पेट्रोल पंप खोलना चाहते थे लेकिन बाद में उन्होंने मन बदल दिया.

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आनंद गिरि. (फाइल फोटो)
आनंद गिरि. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आनंद गिरि ने महंत नरेंद्र गिरि से मांगी थी माफी
  • आनंद के नाम लीज पर की थी जमीन

महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उनके शिष्य आनंद गिरि का नाम सुर्खियों में है. यूपी के प्रयागराज पुलिस आनंद गिरि से पूछताछ भी कर रही है. आनंद गिरि पर नरेंद्र गिरि को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप भी लग रहे हैं. यह बात भी सामने आई है कि गुरु-शिष्य में जमीन को लेकर भी विवाद था. महंत नरेंद्र गिरि पेट्रोल पंप खोलना चाहते थे लेकिन बाद में उन्होंने मन बदल दिया.

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आनंद गिरि अखिल भारतीय मठ के प्रमुख रहे नरेंद्र गिरी के प्रमुख शिष्य हैं. आनंद गिरि को स्वामी की उपाधि प्राप्त है, अतः इनका नाम स्वामी आनंद गिरि पड़ा. स्वामी आनंद गिरि के जीवन को लेकर दो विवाद रहे हैं. उनको निरंजनी अखाड़े से अपने गुरु महंत नरेंद्र गिरि से हुए विवाद के चलते निकाला गया था और वर्तमान में आनंद गिरि ने हरिद्वार के श्यामपुर कांगड़ी में गाजीवाला में अपने आश्रम गंगा विक्रम सेना का निर्माण शुरू किया हुआ है.

युवा भारत साधु समाज के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष

आनंद गिरी, यहीं अपने शिष्यों और साथियों के साथ रहते हैं. वर्तमान में आनंद गिरि युवा भारत साधु समाज के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, आनंद गिरि खुद को एक घुमंतू योगी बताते हैं और यह प्रयागराज के अखिल भारतीय निरंजनी अखाड़े के महंत स्वामी थे और इसी वर्ष इनको अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया था. 

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आनंद गिरि स्वयं बताते हैं कि इन्होंने कभी भी मठ से और न ही मंदिर में चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे से एक भी रुपया लिया है. इन्होंने अपने कथा वाचन और यजमानों के द्वारा दिए जाने वाले दान से ही अपना खर्चा निकाला है और हमेशा शिव और बजरंगबली की सेवा में ही जीवन व्यतीत किया है.

निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत राम रतन गिरि का कहना है कि आनंद गिरि भीलवाड़ा जिले के खंडेलवाल परिवार से हैं और 15 वर्ष की उम्र में साल  2000 में उन्होंने संन्यास ले लिया. यहां पर महंत थे नरेंद्र गिरि, उसके बाद उनका चयन 2004 में बाघंबरी में महंत के रूप में हो गया था. आनंद, महंत के साथ चले गए थे, वहीं उनकी पढ़ाई लिखाई हुई, कथा शुरू की.

आनंद गिरी का निर्माणाधीन आश्रम.

दोनों के बीच विवाद कुंभ मेले के बाद हुआ. दोनों गुरु-चेले में एक जमीन के टुकड़े के चक्कर में विवाद हुआ था. आनंद गिरि 12 वीं पास हैं. प्रयागराज में रहते हुए महंत नरेंद्र गिरि के सानिध्य में आनंद ने कथा का थोड़ा अभ्यास कर लिया और इंग्लिश की कोचिंग की ताकि विदेश में जाकर कार्य कर सकें. उसके बाद आनंद ने धीरे-धीरे बाहर जाना शुरू किया. टूटी फूटी इंग्लिश बोलकर अपने आपको धीरे-धरे जमा लिया. आनंद के साथ ऑस्ट्रेलिया में एक विवाद हुआ था. 2019 में अप्रैल में, वहां कथा चल रही थी. आनंद पर यहां एक लड़की के साथ छेड़छाड़ के आरोप लगे थे जिसके बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा था.

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आनंद गिरि के नाम पर पेट्रोल पंप खोलने का बनाया था विचार

8 बीघे की एक जमीन थी जिसपर महंत नरेंद्र गिरि एक पेट्रोल पंप खोलना चाहते थे. नरेंद्र गिरि पेट्रोल पंप आनंद गिरि के नाम पर ही खोलना चाहते थे. ऐसा नियम है जिसकी जमीन है उसी के नाम पेट्रोल पंप लग सकता था,  इसलिए आनंद गिरि के नाम पर जमीन 30 साल के लिए लीज कर दी गई. हालांकि बाद में महंत नरेंद्र ने कहा कि संत बनने के बाद पेट्रोल पंप क्या चलाना, इस जमीन पर हम कुछ गौशाला या धर्मार्थ अस्पताल बनाएंगे या कुछ और करेंगे. इस बात पर आनंद गिरि राजी नहीं हुए.

आनंद गिरि ने महंत नरेंद्र गिरि को कहा कि आप इस जमीन को इधर-उधर कर देंगे, इसी बात से महंत नरेंद्र गिरि बहुत दुखी हुए. हालांकि बाद में आनंद गिरि ने कान पकड़कर नरेंद्र गिरि से माफी मांगी. नरेंद्र गिरि ने आनंद गिरि को माफ भी किया.और कहा कि गुरु पूर्णिमा के अलावा बाघम्बरी गद्दी में मत आना.

सचिव महंत राम रतन गिरि के मुताबिक, महंत नरेंद्र गिरि ने आनंद को इतनी पावर दे रखी थी कि आनंद गिरी को वहां छोटे महाराज कहा जाने लगा था. महंत नरेंद्र गिरि ने आनंद गिरि को 8-10 साल पहले वसीयत भी कर दी थी, उनके बाद मठ बागंबरी गद्दी के अध्यक्ष आनंद गिरि होंगे, हालांकि बाद में यह फैसला रद्द कर दिया गया. आज की तारीख में आनंद गिरि का अखाड़े से कोई मतलब नहीं है. उनको बाहर कर गया दिया है.

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