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कर्नाटक इंजीनियरिंग सीट ब्लॉकिंग स्कैम: बेंगलुरु पुलिस ने 10 लोगों को किया गिरफ्तार

कर्नाटक इंजीनियरिंग सीट ब्लॉकिंग स्कैम में शामिल 10 लोगों को बेंगलुरु पुलिस ने गिरफ्तार किया है. इसमें कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (केईए) का एक कर्मचारी भी शामिल है. यह मामला 13 नवंबर को तब प्रकाश में आया जब केईए के अधिकारियों ने मल्लेश्वरम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई.

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स्कैम में शामिल 10 लोगों को बेंगलुरु पुलिस ने गिरफ्तार किया है. (Meta AI Image)
स्कैम में शामिल 10 लोगों को बेंगलुरु पुलिस ने गिरफ्तार किया है. (Meta AI Image)

कर्नाटक इंजीनियरिंग सीट ब्लॉकिंग स्कैम में शामिल 10 लोगों को बेंगलुरु पुलिस ने गिरफ्तार किया है. इसमें कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (केईए) का एक कर्मचारी भी शामिल है. यह मामला 13 नवंबर को तब प्रकाश में आया जब केईए के अधिकारियों ने मल्लेश्वरम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. इसमें 2024-2025 अंडरग्रेजुएट इंजीनियरिंग एडमिशन के दौरान सीट ब्लॉकिंग की साजिश की सूचना दी गई.

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एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कईए की शिकायत के आधार पर तीन निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रबंधकों से पूछताछ की गई. इस दौरान संबंधित सबूत एकत्र किए गए. अधिकारी ने कहा, "हमने केईए के एक कर्मचारी सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें बिचौलिए और कुछ इंजीनियरिंग कॉलेजों के कर्मचारी शामिल हैं." पकड़े गए लोगों को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.

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पुलिस ने बताया कि केईए की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के साथ-साथ आईटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है. एफआईआर के अनुसार, कुछ ऐसे कैंडिडेट का इस्तेमाल कॉलेजों के लिए विकल्प प्रविष्टियों के लिए किया गया, जिनका सीट लेने का कोई इरादा नहीं था. 

इन लोगों ने 52 इंजीनियरिंग कैंडिडेट से लॉगिन आईडी और पासवर्ड प्राप्त किए और फिर उनकी ओर से विकल्प प्रविष्टियां की गईं. आरोपियों ने बीएमएस इंजीनियरिंग कॉलेज, आकाश इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और न्यू होराइजन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में सरकारी कोटे के तहत इंजीनियरिंग सीटों को ब्लॉक कर दिया, जिससे निजी कॉलेजों को फायदा हुआ. 

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पुलिस जांच में पता चला कि आरोपियों ने गोवा, बेंगलुरु, शिवमोग्गा, दावणगेरे और चिकमगलुरु के कदुर में निजी कॉलेजों को फायदा पहुंचाने के लिए विभिन्न स्थानों से लॉग इन करने के लिए मोबाइल फोन और लैपटॉप का इस्तेमाल किया. इस कार्यप्रणाली का उपयोग करते हुए आरोपियों ने सरकारी कोटे की सीटों को ब्लॉक कर दिया, जिससे पात्र छात्रों और केईए दोनों को धोखा मिला.

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