उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक बार फिर आदमखोर बाघ का आतंक कायम हो गया है. दक्षिण खीरी वन प्रभाग के महेशपुर रेंज के अंतर्गत गन्ने के खेत के पास रविवार को बाघ के हमले में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया. पीड़ित की पहचान भदैया गांव निवासी तेजपाल (40) के रूप में हुई है. वो अपने खेत पर गया हुआ था. उसी वक्त गन्ने के खेत में छिपे बाघ ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया.
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के वन अधिकारी (डीएफओ) संजय बिस्वाल ने बताया कि बाघ के हमले में तेजपाल के सिर और चेहरे पर गहरी चोटें आई हैं. आस-पास काम कर रहे किसानों ने बाघ को किसी तरह से दूर भगाया. घायल तेजपाल को गोला स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां उसका प्रारंभिक उपचार किया गया. उसकी गंभीर स्थिति देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया. हालांकि, सीएमओ उसकी हालत खतरे से बाहर बताई है.
डीएफओ ने बताया कि तेजपाल पर हमला करने वाला बाघ महेशपुर रेंज में दो लोगों को मारने वाले आदमखोर से अलग है. उस बाघ ने 27 अगस्त और 11 सितंबर को हमला करके दो लोगों को मार दिया था. 28 अगस्त से ही प्रभावित गांवों में वन विभाग की टीमों को तैनात कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि फील्ड अफसर और ट्रैंकुलाइजिंग एक्सपर्ट की टीमें ड्रोन कैमरों और अन्य उपकरणों से लैस होकर लगातार गश्त कर रही हैं.
बताते चलें कि लखीमपुर खीरी ज़िले के गन्ने के खेतों में छुपा बैठा आदमखोर बाघ एक-एक कर गांव वालों को अपना निशाना बना रहा है. महज महीने भर के अंदर ही उस बाघ ने चार जिंदगियों को लील लिया. 11 सितंबर को महेशपुर रेंज में एक 40 वर्षीय व्यक्ति को मार डाला. मूडा अस्सी गांव के निवासी जाकिर पर उस समय उसने हमला किया, जब वो अपने गन्ने के खेत में काम कर रहा था. इस घटना से स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश है.
इससे पहले इसी बाघ ने 27 अगस्त को एक ग्रामीण अंबरीश कुमार को मार डाला था. राज्य के वन मंत्री अरुण कुमार ने स्थिति का आकलन करने और वन अधिकारियों को बाघ को पकड़ने का निर्देश देने के लिए क्षेत्र का दौरा किया. इसके बाद वन विभाग ने गश्ती दल तैनात किए. पिंजरे और कैमरे लगाए गए. आदमखोर जानवर को पकड़ने के लिए ट्रैंक्विलाइज़िंग एक्सपर्ट को बुलाया गया. हालांकि, अभी तक को वन विभाग की पकड़ में नहीं आ सका है.
लखीमपुर जिले के करीब 50 गांवों में बाघ का आतंक है. बाघ प्रभावित गावों में रहने वाले लोग बताते हैं कि वैसे तो बाघ हर बार गन्ने की फसल के ऊंची होने के साथ ही जंगल से रिहायशी इलाकों और खेतों की तरफ चले आते हैं, क्योंकि इन फसलों के बीच उन्हें अक्सर मवेशियों, सियार और जंगली सूअर की सूरत में आसान शिकार मिल जाते हैं. लेकिन असली दिक्कत तब होती है, जब बाघ गन्ने के खेतों में काम कर रहे इंसानों का शिकार करते हैं.
एक खास बात है कि अब तक जितने भी लोगों को बाघ ने मारा है, वो सभी के सभी लोग खेतों में बैठ कर काम कर रहे थे और बाघ ने पीछे से ही हमला किया. लेकिन खड़े लोगों को और खास कर सामने से बाघ ने कभी किसी को टार्गेट नहीं किया. इससे लगता है कि शायद बाघ इंसानों को भी धोखे से ही मारते हैं, जानबूझ कर नहीं. वैसे ये पहला मौका नहीं है, जब लखीमपुर खीरी में लोग बाघों के हमले से जान गंवा रहे हैं. पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं.
लखीमपुरी खीरी के नजदीक अकेले दुधवा टाइगर रिजर्व में ही 140 से ज्यादा बाघों की आबादी है, लेकिन जिस तरह से ये बाघ ग्रामीण इलाकों में घुस रहे हैं, वो एक बड़ा खतरा बन चुका है. 1 अगस्त को खीरी थाना इलाके में बाघ ने एक 10 साल के बच्चे पर हमला कर दिया था. उसकी लाश गन्ने के खेत में मिली. 2 अगस्त को शारदा नगर थाने के मैनहा गांव में 9 साल के बच्चे को बाघ ने शिकार बनाया. बच्चे की क्षत विक्षत लाश गन्ने के खेत में मिली थी.