पंजाब में आतंकियों से लोहा लेने वाले शौर्य चक्र विजेता कामरेड बलविंदर सिंह संधु की हत्या के मामले में मंगलवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 8 आतंकियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है. ये सभी आतंकी खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) से जुड़े हुए हैं. एनआईए की चार्जशीट में दावा किया गया है कि कामरेड बलविंदर सिंह की हत्या इसलिए की गई थी, ताकि आतंकी भारतीयों खासतौर से खालिस्तान के विरोधियों के मन में डर पैदा कर सकें.
इन 8 आतंकियों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट
पाकिस्तान से होती थी फंडिंग
एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक, इन आतंकियों को पाकिस्तान में बैठे केएलएफ चीफ लखवीर सिंह रोडे की तरफ से हथियार और फंड दिया जाता था. इसके अलावा ये आतंकी पाकिस्तान सीमा के जरिए ड्रग्स की तस्करी भी करते थे. एनआईए की जांच में ये भी सामने आया है कि केएलएफ के आतंकियों ने जनवरी 2016 से लेकर अक्टूबर 2017 के बीच 8 घटनाओं को अंजाम दिया था, जिसमें 7 लोग मारे गए थे. एनआईए की जांच में ये भी सामने आया है कि पाकिस्तान से सुखमीत पाल सिंह को हथियार और पैसे भेजे जाते थे और उसका इस्तेमाल खलिस्तान विरोधियों की हत्या करने के लिए किया जाता है. जांच में ये भी पता चला है कि जनवरी 2020 में बलविंदर सिंह की हत्या की साजिश रची गई थी.
क्या है पूरा मामला?
16 अक्टूबर 2020 को तरनतारन के भिखीवींड में दो आतंकियों ने घर में घुसकर शौर्य चक्र विजेता कामरेड बलविंदर सिंह संधु की गोली मारकर हत्या कर दी थी. आतंकियों ने उनकी पीठ पर गोलियां मारी थीं. आतंकियों से लोहा लेने की वजह से बलविंदर सिंह, उनके भाई और दोनों की पत्नियों को 1993 में तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया था. उस वक्त शौर्य चक्र से सम्मानित होने वाला ये देश का इकलौता परिवार था.