न उमर की सीमा हो, न जनम का हो बंधन; जब प्यार करे कोई, तो देखे केवल मन; नई रीत चलाकर तुम, ये रीत अमर कर दो... गजल सम्राट जगजीत सिंह के गाए इस गाने का सार यही है कि प्रेमी जोड़े अपने प्यार के आगे कुछ नहीं देखते. उनके सामने न तो कोई सीमा होती है, न ही कोई बंधन, न ही कोई सामाजिक मान्यता. वो तो बस प्यार करते हैं. एक-दूसरे को जी जान से चाहते हैं. उनके प्यार के आगे जमाने को झुकना पड़ता है. कुछ ऐसा ही एक मामला बिहार के गोपालगंज जिले में सामने आया है.
4 फरवरी रविवार को गोपालगंज के भोरे थाने में लोगों की भारी भीड़ एकत्र थी. एक प्रेमी जोड़ा एक-दूसरे से शादी करने की जिद्द किए बैठा था. कुछ लोग उनका विरोध कर रहे थे. पता चला कि महिला चार बच्चों की मां है. उसके पति की छह महीने पहले मौत हो चुकी है. उसके बाद वो अपने ही चचिया ससुर से इश्क करने लगी. दोनों का प्यार परवान चढ़ा तो समाज की परवाह किए बिना उन्होंने शादी का फैसला कर लिया. लेकिन हमेशा की तरह समाज और परिवार उनके प्यार का दुश्मन बन बैठा. उनके रिश्ते के खिलाफ हो गया.
समाज का डर दिखाकर परिजन महिला को इस शादी के लिए रोकने लगे. देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि लोगों को थाने आना पड़ा. वहां पुलिस के अधिकारियों ने भी दोनों को खूब समझाया. उन्हें लोक लाज का डर दिखाया, लेकिन जब प्रेमी जोड़े ने एक-दूसरे का साथ छोड़ने से इनकार कर दिया तो मजबूरन थाने में ही उनकी शादी करानी पड़ी. थाना प्रभारी की मौजूदगी में थाने में बने मंदिर में दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाई. उसके बाद ससुर ने बहू की मांग में सिंदूर भरके उसे हमेशा के लिए अपना बना लिया.
जानकारी के मुताबिक, गोपलागंज जिले के भोरे थाना क्षेत्र के दुबवलिया गांव के एक युवक की छह महीने पहले ट्रेन से गिरकर मौत हो गई. इस घटना के बाद उसकी पत्नी सीमा देवी विधवा हो गई. उनके चार बच्चे हैं. अब उनकी देखभाल की जिम्मेदारी उनके अकेले कंधों पर आ गई. उनका खुद का जीवन भी अकेला हो गया. उसके दुख की घड़ी में उनका चचिया ससुर तूफानी साह एक फरिश्ते की तरह आया. बच्चों और उनकी मां का देखभाल करने लगा. उनकी जरूरतों को पूरा करने लगा. इसे देखकर सीमा उससे इश्क कर बैठी.
सीमा और तूफानी के रिश्ते की खबर आग की तरह गांव में फैल गई. परिजनों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया. उनके नहीं मानने पर लोग उन्हें लेकर थाने गए. वहां पुलिस के समझाने के बाद भी जब दोनों नहीं माने तो थाना परिसर में फूल की माला और सिंदूर मंगाकर मंदिर के आगे शादी करा दी गई. महिला के ससुर तूफानी साह ने बताया कि पिछले एक महीने से दोनों के बीच प्रेम संबंध में है. वो सीमा से शादी करके बहुत खुश है. ऐसा करके सीमा की तरह उसे भी एक नई जिंदगी मिल गई है.
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बताते चलें कि पिछले साल उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में भी इसी तरह का एक मामला सामने आया था. यहां 70 साल के एक बुजुर्ग ने अपनी 28 साल की बहू से शादी रचा ली थी. दोनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होते ही यह अनोखा विवाह चर्चा का विषय बन गया था. यह मामला जिले के बड़हलगंज थाना क्षेत्र का था. यहां छपिया उमराव गांव निवासी कैलाश यादव (70 वर्ष) ने अपने बेटे की विधवा पत्नी पूजा (28 वर्ष) से मंदिर में शादी किया था. ससुर के 42 साल छोटी बहू से शादी की खबर से हर कोई अचंभित था.
छपिया गांव निवासी कैलाश यादव बड़हलगंज थाने के चौकीदार हैं. इनकी पत्नी की मौत 12 साल पहले हो चुकी है. उनके 4 बच्चों में तीसरे नंबर की बहू पूजा के पति की मृत्यु के बाद अपनी जिंदगी कहीं और बसाने वाली थी. लेकिन इसी बीच ससुर का दिल बहू पर आ गया. इसके बाद उम्र और समाज के बंधनों की जंजीर तोड़ दोनों ने मंदिर में जाकर एक-दूजे के साथ सात फेरे ले लिया. दोनों ने आपसी रजामंदी से ही शादी रचाई. इस शादी के बाद एक नई बहस छिड़ गई कि क्या इस तरह के संबंध जायज है या नहीं.