'कितना अच्छा होता कि एसिड बिकता ही नहीं, बिकता नहीं तो किसी पर फिकता भी नहीं.'...ये डायलॉग बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की फिल्म 'छपाक' का है. फिल्म में एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी को बयां किया गया है. लक्ष्मी पर 2005 में एसिड फेंका गया था. इस घटना को करीब 17 साल हो गए. लेकिन दीपिका की फिल्म का ये डायलॉग दिल्ली के द्वारका में हुए स्कूली छात्रा पर एसिड अटैक की घटना पर एकदम फिट बैठता है. पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने Flipkart से एसिड खरीदा और छात्रा पर फेंक दिया. बिक्री पर प्रतिबंध के बावजूद इतनी आसानी से एसिड का उपलब्ध होना पुलिस और प्रशासन पर तमाम सवाल खड़े कर रहा है.
दिल्ली के द्वारका के मोहन गार्डन में बुधवार को दो बहने स्कूल जाने के लिए घर से निकली थीं. इस दौरान बाइक पर आए दो युवकों ने 17 साल की लड़की पर एसिड फेंक दिया और फरार हो गए. पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी सचिन अरोड़ा, उसके दो दोस्तों हर्षित अग्रवाल और वीरेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया है.
ब्रेकअप के बाद किया एसिड अटैक
स्पेशल पुलिस कमिश्नर सागर प्रीत हुड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेस कर बताया कि आरोपियों ने ऑनलाइन एसिड खरीदा था. इसका भुगतान अरोड़ा द्वारा किया गया था. पुलिस के मुताबिक, इसे फ्लिपकार्ट से खरीदा गया था. हालांकि, इस पर अभी तक कंपनी का कोई बयान नहीं आया है. पुलिस के मुताबिक, जांच में पता चला है कि आरोपी सचिन अरोड़ा और पीड़िता सितंबर तक दोस्त थे. लेकिन इसके बाद दोनों का ब्रेकअप हो गया. इसके बाद आरोपी ने एसिड फेंकने का फैसला किया. आरोपी लड़की के पड़ोस में ही रहता है.
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपने दोनों दोस्तों के साथ मिलकर तीन महीने तक इसकी साजिश रची और फिर बुधवार को वारदात को अंजाम दिया. साजिश के तहत सचिन अरोड़ा और हर्षित अग्रवाल बाइक पर आए और छात्रा पर तेजाब फेका. जबकि तीसरा आरोपी वीरेंद्र सिंह सचिन अरोड़ा और हर्षित का मोबाइल और स्कूटी लेकर दूसरी लोकेशन पर जाकर बैठ गया, ताकि जांच के दौरान पुलिस को गुमराह किया जा सके और बाद में इन्हें सबूत के तौर पर पेश किया जा सके.
सीसीटीवी में कैद हुई वारदात
यह पूरी घटना सीसीटीवी पर कैद हो गई. इस दौरान पीड़िता के साथ उसकी बहन थी. चेहरे पर एसिड गिरने से छात्रा का चेहरा जल गया. छात्रा का इलाज सफदरजंग अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती है. छात्रा की हालत गंभीर बताई जा रही है. हालांकि, एसिड अटैक में उसका चेहरा 8% जल गया, इसके साथ ही उसकी आंखों पर भी प्रभाव पड़ा है. पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में पता चल रहा है कि इस हमले में नाइट्रिक एसिड का इस्तेमाल किया गया. सैंपल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया. छात्रा की मां बात करते हुए भावुक हो गईं, उन्होंने कहा कि मैं उसका चेहरा भी नहीं देख पा रही हूं. वह अपनी आंखें तक नहीं खोल पा रही है. वह काफी दर्द में है.
2020 में देशभर में एसिड अटैक के 182 मामले
दिल्ली में 2018 में एसिड अटैक के 11 और 2019 में 10 मामले सामने आए थे. 2020 में ये घटकर 2 रह गए थे, दरअसल, तब देश में लॉकडाउन था. पूरे देश की बात करें तो 2018 में एसिड अटैक के 228 मामले सामने आए थे. वहीं, 2019 में 249 और 2020 में 182 मामले सामने आए थे.