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दिल्लीः फोटो ले रहे पुलिसवालों पर प्रदर्शनकारी किसानों का हमला, FIR दर्ज; टिकैत बोले- हम हिंसा नहीं करते

सिंघु बॉर्डर पर दो पुलिसकर्मियों पर किसानों ने हमला कर दिया. घटना 10 जून की है. इस मामले में अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है. वहीं किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हम हिंसा नहीं करते हैं.

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पिछले 7 महीनों से चल रहा है किसान आंदोलन (फाइल फोटो-PTI)
पिछले 7 महीनों से चल रहा है किसान आंदोलन (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 10 जून को पुलिसकर्मियों पर हुआ हमला
  • दिल्ली पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
  • टिकैत ने कहा, हम हिंसा में शामिल नहीं

दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर कई महीनों से डटे किसानों पर पुलिसकर्मियों पर हमला करने का आरोप लगा है. आरोप है कि 10 जून को सिंघु बॉर्डर के पास किसानों ने फोटो खींच रहे दो पुलिकर्मियों पर हमला कर दिया. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है. वहीं, किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि किसान हिंसा में शामिल नहीं होते.

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दरअसल, दो दिन पहले 10 जून को भारी संख्या में पानीपत से किसान दिल्ली की ओर आ रहे थे. एफआईआर के मुताबिक, 10 तारीख को दोपहर साढ़े तीन बजे एएसआई रमेश और चंद्र सिंह सिंघु बॉर्डर के पास खड़े होकर फोटो खींच रहे थे. तभी एक महिला प्रदर्शनकारी अपने 2-3 साथियों के साथ वहां आ गई और पुलिसकर्मियों से मारपीट करने लगी. 

एएसआई रमेश और एएसआई चंद्र सिंह दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में तैनात थे. इस मामले में नरेला थाने में अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. एफआईआर में उन्होंने आरोप लगाया है कि महिला और उसके साथियों ने उन दोनों के साथ न सिर्फ बदसलूकी की, बल्कि गाली-गलोज और मारपीट भी की. 

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टिकैत बोले- हम हिंसा में शामिल नहीं होते
वहीं, इस पूरे मामले पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत का बयान भी सामने आ गया है. उन्होंने दावा किया कि किसान हिंसा में शामिल नहीं होते. न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, "हो सकता है कि वो (पुलिस) सिविल ड्रेस में हों और उन्हें लगा होगा कि ये मीडिया वाले हैं जो हमें गलत तरह से दिखाते हैं. हम हिंसा में शामिल नहीं होते."

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टिकैत ने आगे कहा, "पुलिस और सरकार किसानों को भड़काना चाहते हैं. अगर वो (पुलिस) कई दिनों प्रदर्शन स्थल पर आ रहे थे तो उन्हें बात करनी चाहिए थी. वो एफआईआर दर्ज कर सकते हैं, लेकिन उसमें लिखने के लिए भी तो कुछ होना चाहिए."

पिछले 7 महीने से चल रहा है किसान आंदोलन
पिछले साल सितंबर में केंद्र सरकार ने खेती से जुड़े तीन कानून लागू किए थे. इन्हीं तीन कानूनों के खिलाफ किसान पिछले साल 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं. किसान और सरकार के बीच 11 बार बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन कोई सहमति नहीं बनी. किसान चाहते हैं कि सरकार तीनों कानूनों को रद्द करे और MSP पर गारंटी का कानून लेकर आए. लेकिन सरकार का कहना है कि वो कानूनों को वापस नहीं ले सकती. अगर किसान चाहते हैं, तो उनके हिसाब से इसमें संशोधन किए जा सकते हैं.

 

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