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दिल्ली: विवादित नारेबाजी मामले में FIR दर्ज, वीडियो से आरोपियों की पहचान में जुटी पुलिस

विवादित नारेबाजी मामले में दिल्ली के कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर अब आरोपियों की पहचान की जा रही है. 

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ था कार्यक्रम
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ था कार्यक्रम
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली में विवादित नारेबाजी का वीडियो वायरल
  • पुलिस ने FIR दर्ज की, आरोपियों की तलाश जारी

देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में रविवार को जंतर-मंतर पर कुछ संगठनों द्वारा प्रदर्शन किया गया. इसी प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण दिए गए और विवादित नारे लगाए गए, जिसके वीडियो सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हो रहे हैं. अब दिल्ली पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है. 

दिल्ली के कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर अब आरोपियों की पहचान की जा रही है. वहीं, जमीयत उलमा-ए-हिंद के पदाधिकारियों ने ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर और डीसीपी नई दिल्ली रेंज से मुलाकात की. उन्होंने इस मामले में एक्शन की मांग की. 

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दरअसल, रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर के पास कुछ संगठनों द्वारा क्विट इंडिया मूवमेंट की एनिवर्सरी को लेकर प्रदर्शन किया गया. इस दौरान अंग्रेज़ों के ज़माने के कुछ कानूनों का वापस लेने की मांग की गई, इसी दौरान विवादित नारेबाजी की गई.  

दिल्ली पुलिस के अधिकारी ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया के जरिए कुछ वीडियो मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है. जो लोग नारेबाजी कर रहे हैं, उन लोगों की पहचान की जा रही है. 

अश्विनी उपाध्याय द्वारा दी गई सफाई

जिस कार्यक्रम के दौरान ये विवादित नारेबाजी हुई उसका आयोजन अश्विनी उपाध्याय द्वारा किया गया था. उन्होंने इस कार्यक्रम पर ट्वीट किया कि मुझे विश्वास है कि आजादी की 75वीं वर्षगांठ (15 अगस्त 2022) से पहले सभी अंग्रेजी कानूनों को समाप्त कर नया कानून बन जाएगा. वहीं, विवादित नारेबाजी के मसले पर उन्होंने कहा कि वह उसको (नारेबाजी करने वाले) नहीं जानते हैं. 

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कार्यक्रम का आयोजन करने वाले अश्विनी उपाध्याय ने इस मामले में कमिश्नर को चिट्ठी लिखी है और कहा है कि नारे लगाने वालों से उनका कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग मुझे बदनाम करने के लिए मेरा नाम लेकर यह वीडियो ट्विटर, फेसबुक और वाट्सएप पर शेयर कर रहे हैं जबकि वीडियो में दिख रहे लोगों को न तो मैं जानता हूं, न तो इनमें से किसी से मिला हूं और न तो इन्हें बुलाया गया था. कानून बहुत ही घटिया और कमजोर है इसीलिए प्रसिद्धि पाने के लिए भी कई बार लोग उन्मादी वीडियो जारी करते हैं.

 

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