मुंबई में राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने सोने और चांदी की तस्करी करने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है. यहां से 19.6 करोड़ रुपए मूल्य का सोना, चांदी और नकदी जब्त की गई है. एजेंसी ने रैकेट के मास्टरमाइंड को भी गिरफ्तार कर लिया है. रैकेट से जुड़े लोगों की तलाश की जा रही है.
डीआरआई के एक अधिकारी ने बताया, "विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर मुंबई क्षेत्रीय इकाई के अधिकारियों ने तीन संदिग्ध स्थानों पर तलाशी ली. इस दौरान यह पता चला है कि तस्करी के सोने को पिघलाने के लिए सोने के निष्कर्षण और शोधन सुविधा का इस्तेमाल किया जा रहा था."
डीआरआई ने कहा कि तलाशी अभियान में बार और पिघले हुए रूप में 23.92 किलोग्राम सोना, विदेशी सोना, 37 किलोग्राम चांदी और 5.40 लाख रुपए नकद बरामद किए गए हैं. गिरोह के सरगना को श्रमिकों और सहायकों के बयान दर्ज करने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है. आगे की जांच जारी है.
बताते चलें कि दुनिया में सोने की तस्करी दो तरीकों से की जाती है. पहला, कमर्शियल स्मगलिंग. इसमें इंपोर्ट-एक्सपोर्ट के अलग-अलग तरीके काम में आते हैं. वहीं दूसरी है इनडिविजुअल स्मगलिंग, जिसमें एक या दो लोग आपस में मिलकर कस्टम को धोखा देने की कोशिश करते हैं.
कमर्शियल तस्करी को पकड़ना ज्यादा मुश्किल है. इसमें पूरा गिरोह काम करता है, जो एयरपोर्ट या समुद्र में कस्टम जांच को धोखा देता है. एक बार चेक पॉइंट से बाहर निकलने के बाद वे कम ही पकड़ा पाते हैं. अक्सर इनके पास गोल्ड की खेप भी ज्यादा रहती है. इसे पता लगा पाना भी मुश्किल होता है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में तस्करी का ज्यादातर सोना (करीब 75 प्रतिशत) संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से आता है. इसके अलावा, हमारी पूर्वी सीमाएं बहुत लंबी हैं और ज्यादातर जगहों पर पहरा नहीं होता. इन रास्तों से तस्कर गोल्ड लाने-ले जाने में कामयाब हो जाते हैं. सूडानीज सिंडिकेट भी गोल्ड रैकेट चला रहा है.
सूडानी तस्कर इंडिया-नेपाल सीमा से होते हुए या यूएई से उड़ान भरकर आते हैं. साल 2023 में दर्जनभर से ज्यादा सूडानी लोग पटना, पुणे, मुंबई, कोलकाता, कोच्चि और दिल्ली में पकड़े गए थे. सूडान अफ्रीका का तीसरा सबसे बड़ा सोना उत्पादक देश है. रूस-यूक्रेन लड़ाई के चलते गोल्ड की कीमतें बढ़ी हुई हैं.
इसका फायदा उठाते हुए सूडान में अवैध माइनिंग चल रही है. हर साल सैकड़ों टन गोल्ड स्मगल हो रहा है. इसका बड़ा हिस्सा भारत में भी आ रहा है. जब भी ये सोना जब्त होता है, वित्त मंत्रालय की निगरानी में उसकी रिव्यूइंग होती है. तमाम जांच चलती है जिसके बाद सीज किया हुआ गोल्ड लीगल टेंडर बन जाता है.