गाजा के रफाह में अस्पताल जाते समय भारतीय सेना के पूर्व कर्नल वैभव अनिल काले इजरायली हवाई हमले में मारे गए हैं. उन्होंने तीन सप्ताह पहले ही बतारौ सुरक्षा सेवा समन्वयक संयुक्त राष्ट्र के लिए काम शुरू किया था. घटना के वक्त संयुक्त राष्ट्र का झंडा लेकर एक वाहन से जा रहे थे.
इंडिगो के एक वरिष्ठ कमांडर विंग कमांडर प्रशांत कार्डे (सेवानिवृत्त) ने बताया कि वैभव अनिल काले का परिवार पुणे में रहता है. उन्होंने तीन साल पहले भारतीय सेना छोड़ दी थी. वो नागपुर के रहने वाले थे. उन्होंने वहां के सोमलवार हाई स्कूल में पढ़ाई की थी. उनके शव का इंतजार किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि काले मानव और समाज सेवा के लिए हमेशा उत्सुक रहते थे. यही वजह है कि भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में शामिल होने का फैसला किया था. उनको कुछ दिन पहले गाजा में भेजा गया था, लेकिन इजरायली हवाई हमले में उनकी मौत हो गई.
भारतीय सेना में रहते हुए कर्नल वैभव अनिल काले ने 2009-10 में प्रतिनियुक्ति पर कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भाग लिया था. उसी दौरान वो संयुक्त राष्ट्र के कार्यों से प्रभावित हुए थे. लेकिन उनका फैसला घातक साबित हुआ. वो साल 1998 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे.
उन्होंने सेना में अपने दो दशक से अधिक लंबे करियर में उत्तर-पूर्व और सियाचिन ग्लेशियर में भी सेवा की थी. वो कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स के पूर्व डिप्टी कमांडर थे. काउंटर इंटेलिजेंस और आतंकवाद विरोधी अभियानों का हिस्सा थे. इसके बाद महू में सेना के इन्फैंट्री स्कूल में प्रशिक्षक बन गए थे.
बताते चलें कि गाजा के रफाह में लाखों की संख्या में फिलिस्तिनियों ने शरण लिया हुआ है. यहां कई रिफ्यूजी कैंप संचालित किए जा रहे हैं. इनकी देखरेख में संयुक्त राष्ट्र का भी अहम योगदान है. उनके सैकड़ों अधिकारी और कर्मचारी मानव सेवा के लिए लगातार काम कर रहे हैं.
इसके बावजूद इजरायल वहां लगातार हवाई हमले कर रहा है. कई बार तो रिफ्यूजी कैंप को निशाना बनाकर हमले हो रहे हैं. इजरायल का कहना है कि यहां हमास के लड़ाके छिपे हुए हैं. वो उनको निशाना बना रहे हैं. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जमीनी अभियान की भी चेतावनी दी है.