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फर्जी जाति प्रमाणपत्र से 35 साल पहले हासिल की नौकरी, CBI ने दर्ज की FIR

2 दर्ज मामलों में से एक मामले में सीबीआई ने रमेश चंद मीना के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की है. रमेश ने 24 जुलाई 1985 को एक फर्जी एसटी प्रमाण पत्र का उपयोग करते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में लोअर डिविजन क्लर्क के पद पर नौकरी प्राप्त की थी.

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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने 2 आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की (सांकेतिक)
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने 2 आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की (सांकेतिक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सवाई माधोपुर से जारी कराई गई जाली सर्टिफिकेट
  • फर्जी सर्टिफिकेट की वजह से रमेश को मिले प्रमोशन
  • दोनों आरोपियों के नाम आपस में मिलते-जुलते दिख रहे

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कर करीब 35 साल पहले सरकारी नौकरी पाने वाले दो शख्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है. एक आरोपी पर 1987 में एसटी कोटे के लाभ के तहत डीडीए फ्लैट आवंटन कराने का भी आरोप है.

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सीबीआई ने 35 साल पहले फर्जी एसटी (अनुसूचित जनजाति) प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर सरकारी नौकरी में पाने वाले दो शख्स के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं.

पहले मामले में सीबीआई ने रमेश चंद मीना के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की है. रमेश ने 24 जुलाई 1985 को एक फर्जी एसटी प्रमाण पत्र का उपयोग करते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में लोअर डिविजन क्लर्क के पद पर नौकरी प्राप्त की थी.

एफआईआर के मुताबिक, जाली सर्टिफिकेट को सवाई माधोपुर में इस वक्त तैनात डिविजनल मजिस्ट्रेट के द्वारा जारी कराया गया था. हालांकि आरोपी कथित रूप से मथुरा (उत्तर प्रदेश) का निवासी था.

फर्जी प्रमाणपत्र से प्रमोशन

सीबीआई के प्रवक्ता आरसी जोशी ने मुताबिक एफआईआर में यह आरोप लगाया गया कि एसटी प्रमाणपत्र के लाभ का उपयोग करके नौकरी मिलने के बाद रमेश को प्रवर्तन अधिकारी के पद पर पदोन्नत भी उसी फर्जी प्रमाण पत्र के आधार मिला.

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इसी तरह के एक और मामले में भी सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है जिसमें आरोपी का नाम संयोग से पहले मामले के आरोपी के नाम से मिलता-जुलता है. दूसरे मामले में सीबीआई ने रमेश चंद मीणा के खिलाफ मामला दर्ज किया है जो 1987 में MTNL (महानगर टेलीफोन नगर लिमिटेड) में शामिल हुए थे.

फ्लैट का आवंटन भी

यह आरोप लगाया गया है कि रमेश मीणा को एमटीएनएल के एसटी कोटे के तहत नौकरी मिली थी, लेकिन एसटी प्रमाण पत्र फर्जी था. रमेश के फर्जी प्रमाण पत्र को राजस्थान के एक उप प्रभागीय मजिस्ट्रेट द्वारा जारी कराया गया था, जबकि रमेश उस वक्त हाथरस (यूपी) का निवासी था.

एफआईआर के अनुसार, रमेश चंद मीणा को एसटी श्रेणी के तहत विभागीय परीक्षा के माध्यम से जूनियर दूरसंचार अधिकारी (जेटीओ) के रूप में पदोन्नत भी किया गया था. 

रमेश चंद मीणा 31 जुलाई, 2018 को एमटीएनएल, नई दिल्ली से वरिष्ठ प्रबंधक (टेलीफोन) के रूप में सेवानिवृत्त हुए. मीणा ने वर्ष 1987 में एसटी कोटे के लाभ के तहत एक डीडीए फ्लैट का आवंटन भी कराया था. जांच एजेंसी ने बुधवार को इन मामलों के सिलसिले में यूपी और दिल्ली तलाशी भी की. सूत्रों ने बताया कि अधिकारियों ने तलाशी के दौरान कई दस्तावेज भी जब्त किए.

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