फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग प्लेटफॉर्म (Falcon Invoice Discounting Platform) के नाम पर चलाए जा रहे 850 करोड़ रुपये के पोंजी स्कैम में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस घोटाले में देशभर के 6,000 से ज्यादा निवेशकों को ठगा गया. पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपियों ने लोगों को अल्पकालिक निवेश (Short-term deposits) पर ज्यादा रिटर्न का लालच देकर ठगी की.
कैसे हुआ घोटाला?
पुलिस के मुताबिक, फाल्कन कैपिटल वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के एमडी अमरदीप कुमार, सीओओ आर्यन सिंह और सीईओ योगेंद्र सिंह अभी फरार हैं. इन सभी ने लोगों को 11-22% तक सालाना रिटर्न देने का झांसा दिया. निवेश की सीमा 25,000 रुपये से 9 लाख रुपये तक थी और अवधि 45 से 180 दिन तय की गई थी.
ऐसे दिया झांसा
इसके लिए मोबाइल ऐप और वेबसाइट बनाई गई, जिससे यह स्कीम सही इनवॉइस डिस्काउंटिंग सेवा की तरह लगे. लेकिन हकीकत में फर्जी वेंडर प्रोफाइल और नकली सौदों के जरिए निवेशकों को ठगा गया.
पुलिस ने इस मामले में अब तक 19 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जिनमें से दो को गिरफ्तार कर लिया गया है और बाकी फरार हैं. गिरफ्तार आरोपियों में पवन कुमार (कैपिटल प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट और फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग प्लेटफॉर्म के बिजनेस हेड) काव्या एन (कैपिटल प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड और फाल्कन कैपिटल वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर) शामिल हैं.
कब हुआ घोटाला?
यह घोटाला 2021 से चल रहा था. नए निवेशकों से पैसा लेकर पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था, जो पोंजी स्कीम की तरह काम कर रहा था. 15 जनवरी 2025 को इस स्कीम का पेमेंट बंद हो गया और हैदराबाद स्थित ऑफिस बंद कर दिया गया. इसके बाद निवेशकों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. आरोपियों ने निवेशकों के पैसे को शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया और इससे क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म, आईटी सॉफ्टवेयर कंपनियां, मल्टी-लेवल मार्केटिंग स्कीम, लक्जरी होटल और प्राइवेट चार्टर सर्विस, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट जैसे कारोबार खड़े कर लिए.
पुलिस ने BNS और तेलंगाना स्टेट प्रोटेक्शन ऑफ डिपॉजिटर्स ऑफ फाइनेंशियल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, 1999 के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस गबन किए गए पैसों की बरामदगी और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जांच कर रही है.