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FIR दर्ज होने के 24 साल बाद SIT का गठन, हिंसा के 41 साल बाद सजा का ऐलान... जानिए सज्जन कुमार केस में कब-क्या हुआ?

Sajjan Kumar Case Timeline: साल 1984 में सिख विरोधी दंगों के दौरान हुए दोहरे हत्याकांड के मामले में दोषी पूर्व सांसद सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा मिली है. इस केस की जांच करने वाली एसआईटी ने 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' बताते हुए फांसी की सजा की मांग की थी.

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पूर्व सांसद सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा.
पूर्व सांसद सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा.

साल 1984 में सिख विरोधी दंगों के दौरान हुए दोहरे हत्याकांड के मामले में दोषी पूर्व सांसद सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा मिली है. इस केस की जांच करने वाली एसआईटी ने 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' बताते हुए फांसी की सजा की मांग की थी. पुलिस ने कोर्ट में दाखिल लिखित दलीलों में कहा कि ये मामला निर्भया केस भी कहीं ज़्यादा संगीन है. निर्भया केस में एक महिला को टारगेट किया गया था. लेकिन यहां पर एक समुदाय विशेष के लोगों को टारगेट किया गया.

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साल 1984 में सिखों का कत्लेआम मानवता के खिलाफ अपराध है. इन दंगों ने समाज की चेतना को झकझोर कर रख दिया. हालांकि, अदालत ने इन तमाम दलिलों को सुनने के बावजूद सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा दी है. साल 1991 में सज्जन कुमार के खिलाफ 2 लोगों की हत्या के आरोप में आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 149 (गैरकानूनी जमावड़ा) और 436 (आगजनी) के तहत केस दर्ज किया गया था. लेकिन साल 1994 में इस केस को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. 

24 साल बाद जस्टिस जी पी माथुर कमेटी की सिफारिश पर इस केस की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया. एसआईटी ने अपनी जांच पूरी करने के बाद 5 मई, 2021 को सज्जन कुमार के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी. इसके बाद अदालत ने 16 दिसंबर, 2021 को आईपीसी की धारा 147/148/149 के साथ धारा 302/308/323/395/397/427/436/440 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए आरोप तय किए. अब दोहरे हत्याकांड के 41 साल बाद सजा का ऐलान किया गया है.

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आइए तारीख-दर-तारीख जानते हैं कि इस केस में कब-क्या हुआ...

1984:- पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली में एक सिख जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या कर दी गई. भीड़ ने दोनों को जिंदा जला दिया. कांग्रेस नेता सज्जन कुमार ने दंगाइयों की इस भीड़ का नेतृत्व किया था. उस वक्त पीड़ित के घर में लूटपाट भी की गई थी.

1991:- इस दोहरे हत्याकांड के सात साल बाद सज्जन कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 149 (गैरकानूनी जमावड़ा) और 436 (आग से संपत्ति को नष्ट करना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई.

8 जुलाई, 1994:- दिल्ली की अदालत को अभियोजन शुरू करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले. इस मामले में सज्जन कुमार के खिलाफ चार्जशीट दायर नहीं की गई.

12 फरवरी, 2015:- जस्टिस जी पी माथुर कमेटी की सिफारिश पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया.

21 नवंबर, 2016:- एसआईटी ने अदालत से कहा कि इस मामले में आगे की जांच की जरूरत है.

6 अप्रैल, 2021:- एसआईटी ने सज्जन कुमार को गिरफ्तार कर लिया.

5 मई, 2021:- एसआईटी ने अदालत में सज्जन कुमार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया.

26 जुलाई, 2021:- अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लिया.

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1 अक्टूबर, 2021:- अदालत ने आरोपों पर दलीलें सुनना शुरू किया.

16 दिसंबर, 2021:- अदालत ने सज्जन कुमार के खिलाफ आईपीसी की धारा 147/148/149 के साथ-साथ धारा 302/308/323/395/397/427/436/440 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए आरोप तय किए.

1 नवंबर 2023:- अदालत ने सज्जन कुमार का बयान दर्ज किया. उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया था. जस्टिस जी पी माथुर कमेटी की सिफारिश पर गठित विशेष जांच दल ने इस मामले की जांच की और चार्जशीट दाखिल की।

31 जनवरी, 2024:- अदालत ने अंतिम दलीलें सुनना शुरू किया.

8 नवंबर, 2024:- अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा.

12 फरवरी, 2025:- अदालत ने सज्जन कुमार को दोषी ठहराया.

25 फरवरी, 2025:- अदालत ने सज्जन कुमार के लिए उम्रैकद की सजा का ऐलान किया.

1984 में हुए दंगों के दौरान 2733 लोग मारे गए थे. इन घटनाओं की जांच के लिए गठित नानावटी आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में 587 एफआईआर दर्ज की गई थीं. लेकिन 240 एफआईआर को पुलिस ने बंद कर दिया और 250 मामलों में आरोपी बरी हो गए. 587 एफआईआर में से केवल 28 मामलों में ही दोषसिद्धि हुई, जिनमें लगभग 400 लोगों को दोषी ठहराया गया. सज्जन कुमार सहित लगभग 50 लोगों को हत्या के लिए दोषी ठहराया गया.

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कांग्रेस नेता सज्जन कुमार पर 1 और 2 नवंबर 1984 को दिल्ली की पालम कॉलोनी में पांच लोगों की हत्या के मामले में भी आरोप लगाया गया था. इस मामले में भी उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिस पर सुनवाई लंबित है. 

सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा मिलने पर पीड़ित परिवार की बलबीर कौर ने कहा कि वो फैसले से संतुष्ट हैं. जो जैसा करेगा, वैसा ही भरेगा. उन्होंने बताया कि दंगाइयों ने उनके साथ भी मारपीट की थी. बलबीर कौर ने उस वक्त को याद करते हुए बताया कि वो अपने पति सुरजीत सिंह के साथ दिल्ली में रहते थी. जिस वक्त दंगा हुआ वह अपने पति के साथ आग सेंक रही थीं. तभी कुछ लोग उनके घर में घुस गए और उनके पति के साथ मार पीट करना शुरू कर दी. 

इसके बाद दंगाइयों ने उनके घर को आग लगा दी. इस पूरे घटनाक्रम में उनके पति की टांग टू गई थी. उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें गुरुद्वारे में ठहरा दिया था. वह 28 दिनों तक वहां रहे और इसके बाद वह पंजाब आ गए. आज वह दिन आ गया जिसका उन्हें बेसब्री से इंतजार था.

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