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मुख्तार अंसारी की बुलंदी और बेबसी के किस्से... जब मछली के लिए जेल में तालाब खुदवाने वाला गैंगस्टर कुरकुरे के लिए तरस गया!

उत्तर प्रदेश के मऊ से पूर्व विधायक गैंगस्टर मुख्तार अंसारी को गाजीपुर के मोहम्मदाबाद के कालीबाग कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया. इस दौरान वहां हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे. बांदा जेल में हार्ट अटैक से मौत होने के बाद मुख्तार के शव को भारी सुरक्षा के बीच मोहम्मदाबाद लाया गया था.

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गैंगस्टर मुख्तार अंसारी को सुपुर्द ए खाक कर दिया गया.
गैंगस्टर मुख्तार अंसारी को सुपुर्द ए खाक कर दिया गया.

''माटी कहे कुम्हार से तू क्या रौंदे मोए, इक दिन ऐसा आयेगा मैं रौंदूंगी तोए''... कबीर दास की ये पंक्तियां गैंगस्टर मुख्तार अंसारी पर सटीक बैठती हैं. एक वक्त था जब उसकी पूरे यूपी में तूती बोलती थी. पुलिस और प्रशासन की बात तो छोड़िए सरकार भी उसके इशारे पर काम करती थी. पूर्वांचल में आतंक ऐसा था कि लोग उसके नाम से थर थर कांपते थे. वो जेल में रहे या बाहर, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. उसका काला कारोबार बदस्तूर जारी रहता. लेकिन कहते हैं वक्त से बड़ा बलवान कोई नहीं है. वक्त बदला तो मुख्तार के बुरे दिन शुरू हो गए. देखते ही देखते बुलंदी बेबसी में बदल गई.

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साल 2005 में हुए मऊ दंगे का वो दृश्य भला कौन भूल सकता है, जब खुली जीप में हथियार लहराते मूंछों पर ताव देते हुए आगे-आगे मुख्तार चल रहा था, पीछे-पीछे पुलिस उसके गुर्गों की तरह दौड़ रही थी. ये सत्ता का साथ और बाहुबल ही था कि वो जिसे चाहता उसे उठवा लेता. जिसे चाहता उसे मौत की नींद सुला देता. लेकिन अपने आखिरी दिनों में उसकी आंखों से नींद गायब हो गई थी. वो हर वक्त बेचैन रहता था. परिवार से मिलने के लिए तड़पता था. जेल की ऊंची दीवारों के नीचे उसके अरमान दफ्न हो गए. आज उसका साम्राज्य खत्म हो चुका है. पूरा परिवार कानूनी शिकंजे फंसा हुआ है.

एक समय मुख्तार अंसारी के लिए जेल पनाहगाह हुआ करती थी. वहां उसके लिए हर सुख सुविधा ध्यान रखा जाता था. फाइव स्टार सुविधाएं मिलती थी. जेल प्रशासन से लेकर पुलिस तक में उसका नेटवर्क था. उसे सियासी समर्थन हासिल था. इसलिए उसके खिलाफ बोलने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पाता था. साल 2005 में अपने जानी दुश्मन बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कराने से पहले वो यूपी की फतेहगढ़ जेल में बंद हो गया था. उसके बाद उसे गाजीपुर जेल में शिफ्ट गया था. बताया जाता है कि वो मछली खाने का बहुत शौकीन था. लेकिन गाजीपुर जेल में उसे ताजी मछली नहीं मिल पाती थी.

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ताजी मछली के लिए गाजीपुर जेल में खुदवा दिया तालाब

वो जेल के सादा खाना खाकर तंग आ चुका था. इसलिए उसने जेल के अंदर ही एक तालाब खुदवा दिया. उसमें अपनी मनपसंद मछलियां पाली थीं. अब जब भी उसका मन होता, वो तालाब से मछली निकलवाकर बनवाता और खा लेता. कहा जाता है कि उसकी फिश पार्टी में कई बड़े नेता और अफसर भी शामिल होते थे. जेल के अंदर सब लोग मिलकर जमकर जश्न मनाते थे. यूपी पुलिस में तत्कालीन आईजी बृजलाल ने इस घटना की पुष्टि की थी. उन्होंने बताया था, "गाजीपुर जेल मुख्तार का घर हुआ करती थी. हर शाम जेल के अंदर दरबार लगता था. बड़े अफसर बैडमिंटन खेलने जाते थे."

मुख्तार की आवभगत में पंजाब पुलिस ने खर्चे 55 लाख

उत्तर प्रदेश में सरकार चाहे जिसकी रहे, चलती मुख्तार अंसारी एंड गैंग की ही थी. लेकिन साल 2017 में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद उसके बुरे दिन शुरू हो गए. यूपी में अपने खिलाफ स्थिति होते देख मुख्तार अपने सियासी नेटवर्क का इस्तेमाल करके पंजाब चला गया. वहां के एक मामले में पंजाब पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर ले गई, जहां उसे रोपड़ जेल में बंद कर दिया गया. वहां भी उसकी खूब आवभगत हुई थी. वो साल 2019 से 2021 के बीच में वहां रहा था. उसे जेल में न सिर्फ विशेष सुविधाएं दी गईं. यहां तक कि पंजाब पुलिस ने सुविधा के नाम पर 55 लाख रुपए खर्च कर दिए. 

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योगी सरकार के बाद बेबस और लाचार हो गया मुख्तार

इधर यूपी पुलिस भी उसे पंजाब से लाने में जुटी रही. तमाम कोशिशों के बाद उसे रोपड़ से बांदा जेल लाकर बंद कर दिया गया. इसके बाद उसके गुनाहों का हिसाब होने शुरू हो गया. मुख्तार अंसारी पर करीब 65 केस दर्ज थे. पिछले दो वर्षों में कई केस में उसे सजा मिली, कई में मिलने वाली थी. वो जेल में बेबसी और लाचारी की जिंदगी जी रहा था. मछली खाने के लिए कभी जेल में तालाब खुदवाने वाला बाहुबली कुरकुरे और केले के लिए तरस रहा था. बार-बार अपनी बीमारी का हवाला देकर जमानत पर जेल से बाहर आना चाहता था. जमानत नहीं मिलने की स्थिति में बांदा से लखनऊ शिफ्ट होना चाहता था.

मी लॉर्ड! मैं बहुत बीमार हूं... जब कोर्ट में लगाई गुहार

''मी लॉर्ड! मैं बहुत बीमार हूं. मेरा सही से इलाज नहीं हो पा रहा है. मेरे समुचित इलाज का आदेश कर दिया जाए''... मुख्तार अंसारी ने एक मामले की सुनवाई के दौरान जज के सामने गिड़गिड़ाते हुए अपने इलाज की गुहार लगाई थी. इसी तरह बाराबंकी के एमपी-एमएलए कोर्ट में फर्जी एंबुलेंस कांड में वीडियो कॉन्फेंसिंग के जरिए सुनवाई के दौरान उसे बहुत परेशान देखा गया था. वो अपने गवाह को देखकर बार-बार पानी पी रहा था. दारोगा सुरेंद्र सिंह गवाही देने के लिए कोर्ट में पहुंचे हुए थे. उनको देखते ही मुख्तार पसीने से तर-बतर हो गया. अपनी परेशानी को छुपाने के लिए बार-बार पानी पीता रहा.

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कोर्ट में कुरकुरे और केले के लिए गिड़गिड़ाया डॉन

इसके पहले भी मुख्तार अंसारी जज के सामने कई बार गिड़गिड़ा चुका था. एक बार तो जेल के खाने से परेशान होकर उसने एमपी-एमएलए कोर्ट में अपने पसंदीदा खानों की मांग कर दी. उसने जज कमल कांत श्रीवास्तव के सामने गुहार लगाई कि वो जेल के खाने से ऊब चुका है. उसे खाने पीने का सामान, फल और कुरकुरे भिजवाया जाए. फल खाने की उसकी बेताबी तो पहले भी कई बार दिख चुकी है. एक बार इसी केस में सुनवाई के दौरान उसने जज से कहा कि साहब फल उपलब्ध करवा दीजिए. जज ने भी उसकी मांग पूरी कर दी. अगली सुनवाई से पहले ही उसके पास केला और आम भेज दिया गया था. 

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दादा स्वतंत्रता सेनानी, नाना ब्रिगेडियर, लेकिन...

बताते चलें कि मुख्तार अंसारी का जन्म गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद में 3 जून 1963 को हुआ था. उसके पिता का नाम सुबहानउल्लाह अंसारी और मां का नाम बेगम राबिया था. गाजीपुर में मुख्तार अंसारी के परिवार का सियासी रसूख शुरू से रहा है. मुख़्तार के दादा डॉक्टर मुख़्तार अहमद अंसारी स्वतंत्रता सेनानी थे. गांधी जी के साथ काम करते हुए वो 1926-27 में कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे. मुख्तार के नाना ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान को 1947 की लड़ाई में शहादत के लिए महावीर चक्र से नवाज़ा गया था. उसके पिता सुबहानउल्लाह अंसारी अपनी साफ सुथरी छवि के साथ राजनीति में सक्रिय रहे थे.

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संभ्रांत परिवार में पैदा होकर भी बना गैंगस्टर

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी रिश्ते में मुख़्तार अंसारी के चाचा लगते हैं. ऐसे परिवार में जन्म लेने के बावजूद वो गलत रास्ते पर चल पड़ा. ठेकेदारी, खनन, स्क्रैप, शराब, रेलवे ठेकेदारी में उसका कब्जा रहा है. इसके दम पर उसने अपनी सल्तनत खड़ी की थी. गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के खिलाफ करीब 65 केस दर्ज हैं. उसके सिर पर आईपीसी की वो सारी धाराएं है, जिन्हें संगीन माना जाता है. इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, धोखाधड़ी, गुंडा एक्ट, आर्म्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट, सीएलए एक्ट से लेकर एनएसए तक शामिल है. हालांकि, कुछ लोग उसे लोगों की मदद करने वाला रॉबिनहुड भी मानते रहे हैं.

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